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रामेश्वरम् जहां से राम पहुंचे थे लंका

March 2025

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Sadhana Path

चारों दिशाओं में, चार धामों में यह दक्षिण दिशा का धाम है, जो कि एक समुद्रीद्वीप में स्थित है। भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक रामेश्वरम् है, जहां श्री राम ने स्वयं शिवलिंग की स्थापना की थी। इसका नाम श्री राम के नाम पर पड़ा है। कहा जाता है कि लंका पर चढ़ाई करने से पूर्व श्री राम ने यहां मंदिर का निर्माण कर भगवान शिव की पूजा की थी।

- अनुज श्रीवास्तव

रामेश्वरम् जहां से राम पहुंचे थे लंका

भारत के दक्षिण में रामेश्वरम् का महान तीर्थ है। यह भारत की चारों दिशाओं की अंतिम सीमा पर स्थित है। रामेश्वरम् की गणना द्वादश ज्योतिर्लिंगों में की जाती है, जिसकी स्थापना भगवान राम ने की थी। उत्तर भारत में वाराणसी और दक्षिण भारत में रामेश्वरम्, धार्मिक श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास के प्रमुख केंद्र हैं। हिन्दुओं की आस्था के मुख्य केंद्रों में वाराणसी और रामेश्वरम् की ऐसी मान्यता है कि यदि किसी को तीर्थ यात्रा करनी हो, तो वाराणसी के बाद रामेश्वरम् की यात्रा करना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा यह तीर्थ यात्रा सफल नहीं मानी जाती।

इस पवित्र स्थल की मान्यता भगवान श्री राम तथा पवित्र रामायण से जुड़ी हुई है। माना जाता है देवी सीता की तलाश तथा श्रीलंका जाने के लिए भगवान राम ने इसी रास्ते का प्रयोग किया था तथा यहीं विशाल सेतु का निर्माण किया था। बाद में राम ने विभिषण के अनुरोध पर धनुषकोटि नामक स्थान पर यह सेतु तोड़ दिया था। आज भी इस 30 मील (48 कि.मी.) लंबे आदि-सेतु के अवशेष सागर में दिखाई देते हैं। जिस स्थान पर यह टापु मुख्य भूमि से जुड़ा हुआ था, वहां इस समय ढाई मील चौड़ी एक खाड़ी है। शुरू में इस खाड़ी को नावों से पार किया जाता था। बताया जाता है, कि बहुत पहले धनुषकोटि से मन्नार द्वीप तक पैदल चलकर भी लोग जाते थे।

शिवलिंग की स्थापना

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