يحاول ذهب - حر
गेस्ट रूम के मानक नियम
January 2023
|Sadhana Path
प्रत्येक भवन अथवा प्रतिष्ठान में प्राय: अतिथि कक्ष (गेस्ट रूम) अवश्य बनवाया जाता है। इसका कारण यह है कि सभी परिवारों में उनके कुछ संबंधी, मित्र आदि अथवा प्रतिष्ठान से जुड़े लोग प्राय: दो-चार दिन के लिए किसी कार्य वश आते रहते हैं।
ऐसे में भवन या प्रतिष्ठान में उनके निवास की व्यवस्था अतिथि कक्ष में की जाती है। लेकिन अतिथि कक्ष कहां और किस तरह का बनवाया जाए तथा इसके विषय में किन-किन बातों का ध्यान रखा जाए इन सबका भारतीय वास्तु शास्त्र में वर्णन किया गया है। यहां हम इसी विषय पर प्रकाश डाल रहे हैं।
• भारतीय परिवेश में अतिथि को देवता स्वरूप माना जाता है। 'अ-तिथि' का अर्थ है- जिसके आने की कोई तिथि न हो। अतिथि प्रायः अल्पावधि के लिए ठहरता है, इसलिए अतिथि कक्ष सभी प्रकार से सुविधाजनक, आरामदायक और शांतिपूर्ण होना चाहिए।
• अतिथि कक्ष का निर्माण वायव्य कोण, उत्तर दिशा के मध्य अथवा पश्चिम एवं वायव्य कोण के मध्य स्थान पर करवाना चाहिए।
• यदि भवन दो मंजिला या तीन-मंजिला हो तो भूतल पर पश्चिम अथवा उत्तर दिशा में अतिथि कक्ष बनवाना उचित होता है।
• यदि भूतल पर स्थान उपलब्ध हो तो अतिथि कक्ष को प्रथम तल (फर्स्ट फ्लोर) पर ही बनवाया जाना चाहिए लेकिन इस कक्ष का स्थान पूर्वोक्त दिशा में ही रखना चाहिए।
هذه القصة من طبعة January 2023 من Sadhana Path.
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