يحاول ذهب - حر
प्रकृति की देन है आयुर्वेद
December 2022
|Sadhana Path
हमारे आस-पास मौजूद पेड़-पौधों से ही कई ऐसी जड़ी-बूटियां तैयार की जाती हैं, जो बड़े से बड़ा और असाध्य रोग को भी ठीक कर दे। ये वनस्पति कई औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं और हमारे स्वास्थ्य को कई लाभ देते हैं। कैसे, जानें इस लेख से।
प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद दो शब्दों के मेल से बना है। संस्कृत में मूल शब्द 'आयुर' का अभिप्राय है दीर्घायु अथवा आयु तथा 'वेद' अर्थात् विज्ञान। और इस चिकित्सा पद्धति का आधार है हमारी प्रकृति । ये हरेभरे पेड़-पौधे पर्यावरण के लिए जितने आवश्यक हैं उतने ही हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी।
इनमें से कई पेड़-पौधे हम अपने बागबगीचे की खूबसूरती बढ़ाने के लिए लगाते हैं और कुछ हम आए दिन अपनी रसोई में उपयोग करते हैं जो हमारे घर या आसपास आसानी से उपलब्ध होते हैं, जैसे-
आंवला- यह विटामिन सी का भंडार है। आयुर्वेद में इसका महत्त्वपूर्ण स्थान है। आंवला ताजा हो या सूखा दोनों ही रूपों में यह सेहत के लिए फायदेमंद है। सूखे आंवले में विटामिन 'सी' अम्ल, स्टार्च, प्रोटीन आदि ताजे फलों की तुलना में अधिक होते हैं । आंवले के नियमित सेवन से कब्ज की समस्या दूर होती है।
• आंवला आंखों के लिए बेहद फायदेमंद है। इसके सेवन से नेत्र की ज्योति बढ़ती है।
• यदि बाल गिरते हों अथवा असमय सफेद हो रहे हों तो सूखे आंवले के टुकड़े को रात भर पानी में भिंगों दे और सुबह उसके पानी से बाल धो लें। इसके प्रयोग से बालों का टूटना, पकना बंद हो जाएगा और बाल काले तथा घने भी होंगे।
• सूखे आंवले का चूर्ण भी फायदेमंद है। सूखे आंवले को कूटकर या पीसकर चूर्ण बना लिया जाता है। यदि पीलिया हो तो आंवले का चूर्ण छाछ के साथ लेने से रोग में आराम मिलता है।
• सूखे आंवले के चूर्ण को मूली के साथ खाने से मूत्र पथरी भी नष्ट होता है।
• यदि बच्चा तुतलाता हो तो सूखे आंवले के चूर्ण को गाय के घी के साथ मिलाकर चटाएं। कुछ दिनों में तुतलाना ठीक में हो जाएगा।
• सूखे आंवले, चित्रक की जड़, हरड़ पीपल और सेंधा नमक को समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें और बुखार होने पर इसका सेवन करें। यह सभी प्रकार का ज्वरनाशक है। इसके साथ ही आंवला त्वचा और हृदय रोग में भी लाभकारी माना जाता है।
هذه القصة من طبعة December 2022 من Sadhana Path.
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