يحاول ذهب - حر

बा और बापू

January Second 2025

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Champak - Hindi

मोहनदास करमचंद गांधी, जिन्हें लोग 'महात्मा' और कुछ प्यार से 'बापू' कहते थे, मेरे परदादा एक असाधारण व्यक्ति थे.

- तुषार गांधी

बा और बापू

इसलिए नहीं कि वे जन्म से महान थे या उन का जन्म एक जानेमाने परिवार में हुआ था, बल्कि इसलिए कि उन्हें अपनी कमजोरियों और दोषों का अहसास था. उन्होंने अपनी गलतियों को स्वीकार किया और उन पर काबू पाया, यह सुनिश्चित करते हुए कि वे उन्हें फिर कभी नहीं दोहराएं. हम भी ऐसा कर सकते हैं, लेकिन इस के लिए हिम्मत की जरूरत होती है.

मोहन की सगाई पोरबंदर में उन के पड़ोसी की बेटी कस्तूर से हुई थी, जब वे दोनों सात साल के थे. उन की शादी 13 साल की उम्र में हुई थी. कस्तूर मोहन से लगभग 6 महीने बड़ी थी. शादी के समय दोनों में से किसी को भी मालूम नहीं था कि पतिपत्नी होने का क्या मतलब है.

मोहन को पढ़ना बहुत पसंद था, उस के भाई के दोस्त ने उसे एक किताब दी, जिस में 'पति कैसे बनें' के बारे मे बताया गया था. मोहन किताब पढ़ता और मानता कि किताब में जो लिखा है, वह एक आदर्श पति का व्यवहार है. वह अपनी बाल वधू कस्तूर पर किताब में जो पढ़ता था, उस का पालन करने की कोशिश करता था.

किताब में एक सबक यह था कि पत्नी को घर से बाहर निकलने से पहले अपने पति की अनुमति लेनी चाहिए. हर शाम मोहन देखता था कि कस्तूर अच्छे से तैयार हो कर बिना उस की अनुमति के घर से बाहर निकल जाती थी.

एक दिन मोहन ने उस से कहा, “अब से तुम मेरी अनुमति के बिना घर से बाहर नहीं निकलोगी,” लेकिन कस्तूर ने इस की परवाह नहीं की और बाहर चली गई.

आखिर मोहन ने कस्तूर को चेतावनी देते हुए कहा, “अगर तुम मेरी अनुमति के बिना घर से बाहर निकली तो वापस मत आना, मेरे घर के दरवाजे तुम्हारे लिए हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे.”

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