يحاول ذهب - حر

सेल्वी का सरप्राइज

January First 2025

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Champak - Hindi

'चाय काप्पिई, चाय काप्पिई,' 'इडली वड़े, इडली वड़े,' बेचने वालों की तेज आवाज ने सेल्वी को जगा दिया. सूरज ढल चुका था और उस की ट्रेन अभी अभी तिरुनेलवेली जंक्शन में दाखिल हुई थी.

- राम्या राम

सेल्वी का सरप्राइज

"हम पहुंच गए हैं, अप्पा," सेल्वी जिस ऊपरी बर्थ पर सो रही थी, उस से उतरी और खिड़की पर अपने पापा के पास आ गई. अप्पा का चेहरा और आंखें चमक उठीं.

सेल्वी अपने दादाजी से मिलने के लिए उत्सुक थी, जिन्हें वह ‘थाथा' कहती थी. जब भी थाथा चेन्नई में उनसे मिलने आते थे, तो वे हमेशा तिरुनेलवेली से मुक्कू और दूसरे स्नैक्स लाते. हालांकि वे पिछले एक साल से उन से मिलने नहीं गए थे और इसलिए सेल्वी की पोंगल की छुट्टियों में अप्पा ने तय किया कि वे थाया से मिलने जाएंगे.

"सेल्वी, मैं यहां हूं, ” थाथा ने उन्हें देख कर कहा.

“थाथा, मैं आप को देख कर बहुत खुश हूं,” सेल्वी चीखी और उनकी बाहों में झूल गई.

"कैसी हो, मेरे मीठे काले हलवा ?” थाथा ने पूछा.

image"ओह, थाथा, आप को अभी भी वह प्यारा नाम याद है, जो आप ने मुझे दिया था."

"बेशक, छोटी, तुम तिरुनेलवेली के सब से अच्छे हलवे से भी ज्यादा मीठी हो,” थाथा ने हंसते हुए उसे एक छोटा सा अखबार का पैकेट दिया.

पैकेट गरम था. सेल्वी ने उत्सुकता से उसे खोला तो अंदर एक और केले के पत्ते का पैकेट था. पैकेट से मीठी सुगंध आई और सेल्वी के नथुने फड़कने लगे. वह समझ गई कि उस में क्या है और उस के मुंह में पानी आ गया.

"क्या मैं इसे यहां खा सकती हूं, अप्पा?” उस ने अपने पापा से पूछा, जो अपना सामान ले कर ट्रेन से उतर रहे थे.

"यहां नहीं सेल्वी, यहां धूल और भीड़ है. जब तक हम गाड़ी में न पहुंच जाएं, तब तक इंतजार करो,” अप्पा ने जवाब दिया.

"लेकिन यहां ठंड लगेगी," सेल्वी ने तर्क दिया.

अप्पा थाथा से बातचीत करने में व्यस्त थे. सेल्वी ने केले के पत्ते का पैकेट खोलने का फैसला किया, जिस में गरमागरम स्वादिष्ठ तिरुनेलवेली हलवा था. थाथा ने इसे 'इरुटुकादाई' नामक एक छोटी सी दुकान से खरीदा था, जो हर शाम कुछ घंटे के लिए खिड़की से अपने सिग्नेचर 'डार्क हलवा' के पैकेट बेचती थी. थाथा को खिड़की के बाहर इंतजार करना पड़ता था.

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