يحاول ذهب - حر

चांद पर जाना

December First 2024

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Champak - Hindi

होशियारपुर के जंगल में डब्बू नाम का एक शरारती भालू रहता था. वह कभीकभी शहर आता था, जहां वह चाय की दुकान पर टीवी पर समाचार या रेस्तरां में देशदुनिया के बारे में बातचीत सुनता था. इस तरह वह अधिक जान कर और होशियार हो गया. वह स्वादिष्ठ भोजन का स्वाद भी लेता था, क्योंकि बच्चे उसे देख कर खुश होते थे और अपनी थाली से उसे खाना देते थे. डब्बू उन के बीच बैठता और उन के मासूम, क 'चतुर विचारों को अपना लेता.

- डा. लता अग्रवाल

चांद पर जाना

एक दिन, डब्बू अपने दोस्तों के साथ जंगल में बैठा था, जब उन में से एक ने टिप्पणी की, “डब्बू, तुम कहां गायब हो जाते हो? हम तुम्हें अब कभीकभार ही देख पाते हैं."

"मैं नई चीजें सीखने के लिए शहर जाता हूं. कड़ी मेहनत करता हूं, किताबें पढ़ता हूं और नईनई चीजें सीखने अलगअलग जगहों पर जाता हूं."

डब्बू ने जंगल में अपने दोस्तों पर काफी प्रभाव डाला था. सभी को लगता था कि वह वास्तव होशियार है.

एक दिन, स्टेला सांप ने कहा, "हम बहुत भाग्यशाली हैं, हम दुनिया के सब से बड़े जंगल में रहते हैं."

डब्बू ने तुरंत अपना ज्ञान बघारना शुरू कर दिया. "तुम क्या कह रही हो, स्टेला? हम सब से बड़े जंगल में नहीं रहते हैं, अमेजन वर्षावन दुनिया का सबसे बड़ा वन है."

"तुम्हें यह कैसे पता, डब्बू?” कोको मगरमच्छ ने पूछा.

विनम्रता से पेश आते हुए डब्बू ने जवाब दिया, "क्या तुम्हें नहीं पता? मैं सारा दिन और पूरी रात किताबों में नहीं खोया रहता, मैं वास्तव में उन का अध्ययन करता हूं.” डब्बू यह स्वीकार कर के अपनी छवि खराब नहीं करना चाहता था कि उस ने यह ज्ञान शहर में सुनीसुनाई बातों से सीखा है.

"अरे वाह, तब तो तुम वाकई होशियार हो. तुम्हें हमारे बच्चों को भी सिखाना चाहिए," हाउली लकड़बग्घा ने कहा. यह सुन कर डब्बू गर्व से फूल गया.

imageएक दिन शहर में घूमते हुए, डब्बू की नजर एक नर्सरी स्कूल पर पड़ी, जहां टीचर बच्चों को एक कविता सुना रहा था, "चलो, चांद पर चलते हैं, चलो अपनी सारी छुट्टियां वहां बिताते हैं, जहां चौकलेट के पेड़ और लौलीपोप की कलियां होंगी, हवा में लहराते पत्तों के लिए कुरकुरे बिस्किट, आम का जूस, फ्रूट पंच और कोला के तालाब होंगे."

कविता उपहारों से भरी मिठाई की टोकरी की तरह थी और इसे सुनते ही डब्बू के मुंह में पानी आ गया.

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