पौधों का प्रवर्धन कैसे करें, पौधे तैयार करने की विधियाँ
Modern Kheti - Hindi|15th December 2022
पौधों के प्रवर्धन के लिए, बीजू पौधों को 2 से 3 माह के उपरान्त पहले से तैयार क्यारियों या गमलों में रोप देना चाहिए तथा पौधों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर रोपित करने की इस विधि में सिंचाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए।
पौधों का प्रवर्धन कैसे करें, पौधे तैयार करने की विधियाँ

फलदार या अन्य पौधों का प्रवर्धन दो प्रकार से होता है। लेकिन इस दो प्रकार में भी अनेक विधियां शामिल हैं जिनका उपयोग करके पौधों को एक किस्म का रूप दिया जाता है। इस लेख में किसान और बागवान भाइयों की सुविधा के लिए हम उन सब विधियों की जानकारी देंगे जो प्रमुख है। साथ-साथ प्रवर्धन के लाभ और कमियों को भी उजागर किया जाएगा जिनकी जानकारी होना भी अति आवश्यक है, तो जानिए बागवानी पौधों का प्रवर्धन, और फलदार पौधों के लिए प्रवर्धन की की प्रक्रिया क्या है। पौधों का प्रवर्धन दो प्रकार से होता है, जैसे:

1. बीज प्रवर्धन

2. वानस्पतिक प्रवर्धन

बीज द्वारा प्रवर्धन: इस प्रकार के प्रवर्धन में बीजों का उपयोग किया जाता है।

विशेषताएँ:

नवीन किस्मों का विकास: फल और फूलों की नवीन किस्मों का विकास बीज द्वारा ही सम्भव हो पाता है।

अनिवार्य विधि: फलों की कुछ ऐसी प्रजातियां हैं, जिन्हें वानस्पतिक विधि से प्रवर्धित नहीं किया जा सकता है, इसलिए बीज प्रवर्धन, उनके लिए एक अनिवार्य विधि है, जैसे- पपीता आदि। 

सरलता: बीज प्रवर्धन और अन्य प्रवर्धन विधियों की तुलना में सरल है, उपयुक्त समय पर उपयुक्त वातावरण में बीज की बिजाई करके पौधे तैयार किये जा सकते हैं।

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