ओलिंपिक-2021- खिलाड़ी बेटियां हम से है जमाना
Grihshobha - Hindi|August Second 2021
भेदभाव की शिकार रहीं भारतीय खिलाड़ी बेटियों ने अपने दम पर जो मुकाम बनाया है, वह दकियानूसी सोच वालों के दांत खट्टे करने के लिए काफी है...
गरिमा पंकज

भारत की बेटियों ने इस बार ओलिंपिक खेलों में अपने खूब जलवे दिखाए. खेल के प्रति उन का जनून रंग लाया. अब तक के ओलिंपिक के इतिहास में भारत ने सब से ज्यादा 7 मैडल्स जीते.

भारतीय शटलर पीवी सिंधु ने इतिहास रच दिया. उन्होंने महिला एकल मैच में चीन की ही बिंगजियाओ को 21-13, 21-15 से हरा कर कांस्य पदक पर कब्जा किया. महज 52 मिनट में सिंधु ने यह मुकाबला अपने नाम कर लिया. इसी के साथ सिंधु लगातार 2 ओलिंपिक खेलों में मैडल जीतने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं. सिंधु ने 2016 रियो ओलिंपिक में भी सिल्वर मैडल अपने नाम किया था.

फेमस रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने सिंधु को खास अंदाज में बधाई दी. उन्होंने पुरी समुद्र तट पर रेत से सिंधु की एक शानदार आकृति उकेर कर उन्हें बधाई दी.

मजबूत हौसला

इसी तरह भारतीय महिला हाकी टीम ने भी इस ओलिंपिक में शानदार खेल दिखा कर पूरे देश को गौरवान्वित किया है. टोक्यो के मैदान पर देश की बेटियों के मजबूत हौसले और जज्बे ने सब का दिल जीता.

भारतीय महिला हौकी टीम भले टोक्यो ओलिंपिक में कांस्य पदक हासिल नहीं कर सकी हो पर उस ने जिस दिलेरी से ग्रेट ब्रिटेन जैसी मजबूत टीम से संघर्ष किया वह भुलाए नहीं भूलेगा.

आस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीम को हरा कर भारतीय हौकी टीम ने सेमीफाइनल में जगह बनाई थी. प्रधानमंत्री ने टीम को बधाई देते हुए उस की हौसलाअफजाई की.

अब बात करें मुक्केबाजी की तो भारत की लवलीना बोरगोहेन को टोक्यो ओलिंपिक की महिला मुक्केबाजी की 69 किलोग्राम प्रतियोगिता में तुर्की की मौजूदा विश्व चैंपियन बुसेनाज सुरमेनेली के खिलाफ शिकस्त के साथ कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा.

लेकिन वे ओलिंपिक में बौक्सिग में भारत को मैडल दिलाने वाली दूसरी महिला बौक्सर बन गई हैं. लवलीना से पहले 2012 में ऐसा कमाल सिर्फ मैरी काम ने किया था. इस तरह 9 साल बाद भारत को बौक्सिग में मैडल मिला है.

असम की 23 वर्षीय लवलीना बौक्सिग में ब्रौंज मैडल जीतने वाली तीसरी भारतीय खिलाड़ी हैं. लवलीना सेमीफाइनल में भले ही फौर्म में नजर नहीं आईं, लेकिन उन्होंने ओलिंपिक में सेमीफाइनल में पहुंच कर धमाल मचा दी. लवलीना ने सेमीफाइनल में चीनी ताइपे की नीन चिन चेन को 4-1 से हरा कर अपनी जगह बनाई थी.

बाधाओं के बावजूद शीर्ष पर

फिल्म दंगल के बाद से सब की जबान पर यह लाइन रहने लगी है कि म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के? सच है लड़कियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहीं. बात चाहे विज्ञान की हो, खेल की हो, राजनीति की हो या टैक्नोलौजी की और अब खेल में कुश्ती हो, क्रिकेट हो, शूटिंग हो, हौकी हो या फिर कोई और खेल, भारतीय महिलाएं खेल के हर क्षेत्र में झंडे गाड़ रही हैं. ये महिला खिलाड़ी देश में तो कमाल कर ही रही हैं, विश्वस्तर पर भी चमक रही हैं. ये बाधाओं के बावजूद आगे बढ़ रही हैं.

आइए जानते हैं कुछ खास भारतीय महिला खिलाड़ियों के बारे में:

पुसरला वेंकट सिंधुः पुसरला वेंकट सिंधु (पीवी सिंधु) का जन्म 5 जुलाई, 1995 को हैदराबाद, आंध्र प्रदेश में हुआ था. उन्होंने 8 वर्ष की उम्र से ही बैडमिंटन का अभ्यास शुरू कर दिया था. सिंधु ने ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में आयोजित किए गए 2016 ग्रीष्मकालीन ओलिंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और महिला एकल स्पर्धा के फाइनल में पहुंचने वाली भारत की पहली महिला बनीं.

सिंधु ने बैडमिंटन के अनेक पुरस्कार और सम्मान जीते. इस साल टोक्यो ओलिंपिक में भी सिंधु ने कांस्य पदक जीत कर देश का नाम रोशन किया.

सानिया मिर्जा: टेनिस स्टार के नाम से मशहूर सानिया मिर्जा का जन्म 15 नवंबर, 1986 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ. वे टेनिस की खिलाड़ी हैं. उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत उन्होंने 1999 में विश्व जूनियर टेनिस चैंपियनशिप में हिस्सा ले कर की थी. 2003 उन के जीवन का सब से रोचक मोड़ बना जब भारत की तरफ से वाइल्ड कार्ड एंट्री करने के बाद सानिया मिर्जा ने विंबलडन में डबल्स के दौरान जीत हासिल की. 2004 में बेहतर प्रदर्शन के लिए उन्हें 2005 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया. 2009 में वे भारत की तरफ से ग्रैंड स्लैम जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनीं.

मैरी कौमः मैंगते चंग्नेइजैग मैरी कौम (एम सी मैरी कौम) का जन्म 1 मार्च, 1983 को मणिपुर में हुआ. उन को खेलकूद का शौक बचपन से ही था और उन के ही प्रदेश के मुक्केबाज डिंग्को सिंह की सफलता ने उन्हें मुक्केबाज बनने के लिए और प्रोत्साहित किया. मैरी कौम 5 बार विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता की विजेता रह चुकी हैं. 2012 के लंदन ओलिंपिक में उन्होंने कांस्य पदक जीता. 2010 के एशियाई खेलों में कांस्य तथा 2014 के एशियाई खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया.

जब साक्षी ने 2016 के रियो समर ओलिंपिक में ब्रौंज मेडल जीता था. इस के बाद से लगातार गूगल पर उन की जाति ढूंढ़ी जाती रही. यह सिलसिला अभी भी थमा नहीं है...

साक्षी मलिकः साक्षी मलिक का जन्म 3 सितंबर, 1992 को रोहतक, हरियाणा में हुआ. वे महिला पहलवान हैं. उन्होंने ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में हुए 2016 ग्रीष्मकालीन ओलिंपिक में कांस्य पदक जीता था. भारत के लिए ओलिंपिक पदक जीतने वाली वे पहली महिला पहलवान हैं. इस से पहले उन्होंने ग्लासगो में आयोजित 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक जीता था. 2014 की विश्व कुश्ती प्रतियोगिता में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया.

कर्णम मल्लेश्वरी: कर्णम मल्लेश्वरी का जन्म पहली जून, 1975 को श्रीकाकुलम, आंध्र प्रदेश में हुआ. वे महिला वेटलिफ्टर हैं. उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत जूनियर वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप से की जहां उन्होंने नंबर एक पायदान पर कब्जा किया. 1992 की एशियन चैंपियनशिप में मल्लेश्वरी ने 3 रजत पदक जीते. वैसे तो उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में 3 कांस्य पदक पर कब्जा किया है, किंतु उन को सब से बड़ी कामयाबी 2000 के सिडनी ओलिंपिक में मिली, जहां उन्होंने कांस्य पर कब्जा किया और इसी पदक के साथ वे ओलिंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं.

दीपिका कुमारी: दीपिका कुमारी का जन्म 13 जून, 1994 को झारखंड में हुआ. वे महिला तीरंदाज हैं. दीपिका 15 साल की थीं तब 2009 में उन्होंने अमेरिका में 11वीं युवा विश्व तीरंदाजी स्पर्धा अपने नाम की थी. तीरंदाजी में उन के प्रोफैशनल कैरियर की शुरुआत 2006 में हुई. इस युवा तीरंदाज ने 2006 में मैक्सिको में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में कंपाउंट एकल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया. फिर 2010 में एशियन गेम्स में कांस्य पदक हासिल किया.

इस के बाद इसी वर्ष कौमनवैल्थ खेलों में महिला एकल और टीम के साथ 2 स्वर्ण पदक हासिल किये.

जाति न पूछो खिलाड़ी की

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