“आज बोल्ड होने के अलग माने हैं" इंदिरा तिवारी
Grihshobha - Hindi|August Second 2021
दमदार किरदार से दर्शकों का दिल जीतने वाली इंदिरा छोटे शहर की जरूर हैं, मगर उन का हौसला काफी ऊंचा है...
शान्तिस्वरूप त्रिपाठी

कंगना रानौत सहित चंद कलाकार अकसर बौलीवुड में नैपोटिज्म के आरोप लगाते रहते हैं. इन का आरोप है कि बौलीवुड में नैपोटिज्म के चलते तमाम प्रतिभाशाली कलाकारों को काम करने से वंचित किया जाता है. मगर भोपाल के मध्यवर्गीय परिवार की लड़की और 2008 में 'मूर्तिकला व चित्रकला' में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित इंदिरा तिवारी ने पहली अगस्त, 2018 को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद महज 2 वर्ष के अंदर सुमन मुखोपाध्याय द्वारा निर्देशित 'नजरबंद,' पाल रतनराज निर्देशित द्वारा सृष्टि, सुधीर मिश्रा द्वारा निर्देशित 'सीरियस मैन' और संजय लीला भंसाली निर्देशित फिल्म 'गंगूबाई काठियावाड़ी' में अभिनय कर लिया है.

मूलतया भोपाल निवासी इंदिरा तिवारी की मां ने सिंगल पेरेंट्स के रूप में उन की परवरिश की. 2010 में जब प्रकाश झा अपनी फिल्म 'आरक्षण' की शूटिंग भोपाल में कर रहे थे, तब उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ अपनी फिल्म 'आरक्षण' में छोटी भूमिका निभाने का अवसर इंदिरा तिवारी को दिया था.

उस वक्त तक इंदिरा ने अभिनय को कैरियर बनाने के बारे में नहीं सोचा था. 2015 में अपने थिएटर गुरु के कहने पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में प्रवेश लिया और यहां तक पहुंच गईं.

प्रस्तुत हैं, इंदिरा तिवारी से हुई ऐक्सक्लूसिव बातचीत के अंश:

आप ने पेंटिंग, मूर्तिकला, शास्त्रीय संगीत, नृत्य व अभिनय सीखा है. लेकिन अभिनय को ही कैरियर बनाने का निर्णय किस सोच के तहत लिया?

चित्रकला/चित्रकारी तो मैं अपने लिए आज भी कर ही रही हूं. चित्रकला में राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने के बाद मुझे एहसास हो गया था कि यह मेरा स्टाइल है. मैं इस तरह से काम करती हूं. मैं ने नृत्य सीखा. मैं ने खाली समय में भरत नाट्यम व कत्थक नृत्य सीखा.

भोपाल, दिल्ली व मुंबई में आप ने क्या अंतर पाया?

मुझे किसी भी शहर में तकलीफ नहीं हुई. जब मैं कोई नया काम करने के लिए कदम उठाती हूं, तो मेरे मन में पहला सवाल आता है कि मेरी मां क्या सोचेंगी? जब दिल्ली के राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में रहते हुए मुझे अपने कैरियर की पहली फिल्म 'नजरबंद' मिली, तो मेरे मन में सवाल आया कि यदि इस में मेरे अंतरंग दृश्य सीन हैं, तो मेरी भी कुछ सीमाएं हैं तब मैं ने निर्देशक से कहा कि दायरे में रहते हुए मैं इस से अधिक नहीं कर सकती.

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