धार्मिक कट्टरवाद खतरे में इंसानियत
Grihshobha - Hindi|February Second 2021
धार्मिक कट्टरता अकसर आतंकवाद में बदल जाती है और हाल ही में पेरिस में एक शिक्षक का गला काटना इसी कट्टरता की निशानी है...
शाहनवाज

हम जब किसी से नाराज हो जाते हैं, तब अपनी नाराजगी जाहिर करते हैं, यह नाराजगी हम कई तरह से जाहिर करते हैं. कुछ लोग किसी से नाराज हो जाने पर उस से बात करना छोड़ देते हैं. कुछ बात तो करते हैं लेकिन रूठे हुए स्वर में बात करते हैं. कुछ लोग अपनी नाराजगी उसी व्यक्ति के सामने उसे दोचार सुना कर अपने मन का बोझ हलका कर लेते हैं. आधुनिक समाज में लोगों की एकदूसरे के साथ सहमति या असहमति तो होती ही है, लेकिन जो लोग धार्मिक कट्टरवाद से बीमार होते हैं, उन के नाराज होने पर हमें हमेशा खुद को बचाने के की सोचनी चाहिए.

जी हां. धार्मिक कट्टरवाद की बीमारी से जूझ रहे लोग यदि आप से नाराज हो जाएं, गुस्सा हो जाएं या फिर आप की बात से असहमत हो जाएं तो उस के नतीजे बड़े भयानक हो सकते हैं. पैरिस में कुछ दिनों पहले हुई एक घटना इस का सब से ताजा उदाहरण है. किसी भी धर्म कट्टरपंथी पागलखाने में मानसिक रूप से बीमार लोगों से भी ज्यादा बीमार और समाज के लिए बड़ा खतरा होते हैं.

धार्मिक कट्टरपंथी पृथ्वी में पाए जाने वाले जहरीले जीवों से भी ज्यादा जहरीले होते हैं. जहरीले जीव तो फिर भी पृथ्वी के ईकोसिस्टम के लिए महत्त्वपूर्ण होते हैं. कट्टरपंथी शरीर में पाए जाने वाले पैरासाइट की तरह होते हैं.

हमले का पूरा मामला

फ्रांस की राजधानी पैरिस में बीते साल कुछ ऐसा हुआ जिस की चर्चा पूरे विश्व में हो रही है. 18 वर्षीय एक छात्र ने स्कूल के इतिहास के टीचर पर हमला किया और उन का गला रेत दिया. ऐसा उस 18 वर्षीय छात्र ने केवल इसलिए किया क्योंकि इतिहास के टीचर सैमुअल पैटी ने अपनी क्लास में अभिव्यक्ति की आजादी फ्रीडम औफ ऐक्सप्रेशन का उदाहरण देने के लिए पैगंबर मुहम्मद से जुड़े एक कार्टून को दिखाया था. इसलाम को मानने वाला यह छात्र कथित तौर पर कार्टून के दिखाए जाने पर नाराज था.

18 वर्षीय इस युवक ने कौंफ्लैंस सौं होनोरी नाम के एक स्कूल के पास सैमुअल पैटी पर हमला किया और इस वारदात को अंजाम दिया. स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने युवक को चारों ओर से घेर लिया. युवक अपनी जेब से पिस्तौल निकाल कर धमकी देने लगा. अंत में पुलिस ने उसे गोली मारी जिस से उस की मौत हो गई.

कार्टून पर पहले भी हो चुका है विवाद

शार्ली हेब्दो द्वारा 2005 में डेनमार्क के एक अखबार में धार्मिक अंधविश्वासों और कट्टरपंथी विचारधारा पर चोट करते हुए पैगंबर मुहम्मद पर व्यंग्यात्मक एक कार्टून प्रकाशित किया गया था. इस के प्रकाशित होने के बाद ही इस कार्टून को ले कर दुनियाभर में भारी बवाल हुआ था. फिर इस के अगले ही साल 2006 में शार्ली एब्दो मैगजीन में इस कार्टून को छापा गया और फिर से बवाल मचा.

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