कोमल है कमजोर नहीं
Grihshobha - Hindi|January First 2021
हर दौर में महिलाओं ने अपनी काबिलियत को साबित किया है, मगर फिर भी सदियों से उन्हें कमजोर व अबला बताने वाले कौन हैं और उन की मंशा क्या है...
रोहित

21 वीं सदी के साल 2021 में दुनिया कदम रख चुकी है. बीती सदियों में कई बदलाव हुए, मगर एक चीज जो जस की तस है वह है समाज में महिलाओं की स्थिति. हजारों वर्षों से दुनिया में एक रूढ़िवादी अवधारणा अपनी जड़ें जमाए हुए है, जो कहती है कि पौराणिक समय से ही भगवान व प्रकृति ने महिलापुरुष के बीच भेद किया है, जिस कारण पुरुष का काम अलग और महिलाओं का काम अलग है. यह धारणा हमेशा कहती रही है कि आदिम समाज को जब भी खाना जुटाने जैसा कठोर काम करना पड़ा, चाहे वह पुराने समय में शिकार करना हो या आज के समय में बाहर निकल कर परिवार के लिए पैसा जुटाना हो, पुरुष ही इस का जुगाड़ करने के काबिल रहे हैं और महिलाओं की शारीरिक दुर्बलता के कारण उन के हिस्से घर के हलके काम आए हैं.

इस लैंगिक भेद में महिलाओं का बाहर निकल कर काम न करने का एक बड़ा तर्क उन की शारीरिक दुर्बलता को बताया गया. उन की शारीरिक बनावट को पुरुष के मुकाबले कमजोर और अशुद्ध बताया गया. उन पर रोकटोक लगाई गई. इस बात का एहसास उन्हें खुद ही महसूस करवाया गया कि वे पुरुषों के मुकाबले शारीरिक तौर पर दुर्बल हैं, बाहर का काम करने योग्य नहीं हैं और परिवार का भरणपोषण नहीं कर सकती हैं.

यही कारण रहा कि आज लिंग आधारित असमानता पर दुनियाभर में एक बहस खड़ी हुई, इस बहस में एक बड़ा हिस्सा महिलाओं की शारीरिक दुर्बलता का भी रहा. हालिया इसी बहस के बीच वैज्ञानिकों ने दक्षिण अमेरिका के ऐंडीज पर्वतमाला में 9000 साल पुराने एक ऐसे स्थान का पता लगाया है, जहां महिला शिकारियों को दफनाया जाता था. इस खोज से लंबे समय से चली आ रही इस पुरुष प्रधान अवधारणा को चुनौती मिली है.

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से जुड़े और इस शोध के प्रमुख वैज्ञानिक रैंडी हास का कहना है कि पुरातन काल में दफनाने की प्रक्रिया की इस पुरातात्विक खोज और विश्लेषण से सिर्फ पुरुषों के ही शिकारी होने की अवधारणा खारिज होती है.

कुशल शिकारी

इस खोज में यह बात पुख्ता हुई कि प्राचीन समय में पुरुषों की ही तरह महिलाएं भी बाहर निकल कर शिकार किया करती थीं. उस समय बाहर निकल कर शिकार करना पूरी तरह से श्रम आधारित था न कि लिंग आधारित.

2018 में पेरू के पहाड़ों की ऊंचाइयों पर पुरातात्विक उत्खनन के दौरान शोधकर्ताओं ने पुराने शिकारियों को दफनाने के एक पुराने स्थान की खोज की थी. वहां से शिकार करने और जानवरों को काटने के नुकीले औजार मिले थे. उसी जगह पर 9000 वर्षो से दफन मानव कंकाल भी बरामद हुए, जिन की हड्डियों और दांतों के विश्लेषण से पता चल सका कि वे महिलाओं के कंकाल थे.

उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में मिले ऐसे 107 प्राचीन स्थानों के परीक्षण से शोधकर्ताओं ने 429 कंकालों की पहचान की. वैज्ञानिकों ने बताया कि इन में कुल 27 शिकारी कंकाल थे, जिन में 11 महिलाएं और 16 पुरुष थे. कंकालों और वैज्ञानिकों द्वारा किए इस शोध से साफ है कि प्राचीन समय में महिलाएं भी शिकार करती थीं. इस के मुताबिक इन मिले कंकालों में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का अनुपात लगभग बराबर का रहा है.

वैज्ञानिकों का इस आधार पर कहना रहा है कि उस समय के दौरान बराबर अनुपात में महिलापुरुष शिकार करते रहे. महिलाओं की शिकार में शामिल होने की यह हिस्सेदारी लगभग 30-50% तक थी. उत्खनन में मिले कंकालों के आधार पर ऐसा प्रतीत होता है कि ऐसी कोई रोकटोक (प्राकृतिक या दैवीय) महिलाओं पर उस समय नहीं थी, जिस से कहा जाए कि उन के बीच वर्क डिविजन रहा हो.

इस शोध के माने

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