नवजात की इन समस्याओं से घबराएं नहीं
Grihshobha - Hindi|March Second 2020
ये सुझाव नई मांओं को शिशु की सामान्य समस्याओं से निबटने में सहायक होंगे...
डा. व्योम अग्रवाल

रात के करीब 3 बजे मुझे अंजनी का फोन आया. बड़ी घबराहट भरी आवाज में पहले तो उन्होंने मुझ से असमय फोन करने पर खेद जताया और फिर लगभग रोते हुए बोलीं कि उन का 5 दिन का बच्चा आधे घंटे से बहुत परेशान था. फिर अचानक चीख मार कर रोने लगा. 5 मिनट पहले उस ने पेशाब किया. उस के बाद अब वह आराम से सो रहा है.

दरअसल, उन्हें डर था कि बच्चे के मूत्रमार्ग में कोई रुकावट या इन्फैक्शन है या फिर किडनी की कोई परेशानी है. मैं ने सारी बात सुन कर सांत्वना देते हुए समझाया कि यह नवजातों के लिए बिलकुल सामान्य है. इस का कारण कदाचित यह होता है कि शिशुओं का अपने मूत्र विसर्जन पर नियंत्रण नहीं होता, इसलिए उन का मूत्रमार्ग कस कर बंद होता है, जिस से कि उन का पेशाब हर समय टपकता न रहे. सामान्यतया 2 महीने की उम्र तक यह होना बंद हो जाता है. इस के लिए न तो घबराने की जरूरत है न ही किसी जांच की. यदि अंजनी को यह जानकारी पहले से होती तो कदाचित वह उस के परिजन (और मैं भी) रात में परेशान न होते.

बच्चे का जन्म परिवार में सब को खुशियों से भर देता है. विशेषतया प्रथम बार मातृसुख का अनुभव करने वाली युवतियों के लिए तो यह अविस्मरणीय समय व अनुभव होता है. घर की अनुभवी महिलाएं जैसे दादी, नानी, भाभी, ननद इत्यादि बहुत सीख दे कर मां को असली मातृत्व के लिए तैयार करती हैं व दिनप्रतिदिन आने वाली समस्याओं का सरल उपाय भी बताती रहती हैं. एकल परिवारों में यह कमी प्रथम बार मां बनने वाली युवतियों के द्वारा बारबार महसूस की जाती है और दूसरों से मिलने वाली सलाह भी ठीक है या नहीं, इस का निर्णय कर पाना भी अधिकांश समय संभव नहीं हो पाता.

शिशुओं की सामान्य समस्याएं

अपने लगभग 24 सालों के अनुभव से मैं ने जाना है कि नवजात के अस्पताल से घर जाने के बाद माताएं लगभग एकजैसी परेशानियां अनुभव करती हैं और उस समय डाक्टर से तुरंत संपर्क न होने पर या सही जानकारी के अभाव में बहुत विचलित हो जाती हैं. मातृत्व की दहलीज पर पहला कदम रखने वाली महिलाओं की इसी तरह की मुश्किल को ध्यान में रखते हुए शिशुओं की कुछ सामान्य समस्याओं के बारे में जानकारी दी जा रही है.

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