आप ही से हैं जहां की खुशियां
Grehlakshmi|April 2020
मां-बाप भले ही बड़े से बूढ़े हो जाते हैं, लेकिन बच्चे मां-बाप के लिए कभी बड़े नहीं होते। थोड़े से प्यार और आपसी साझेदारी से उम्र के आखिरी पड़ाव तक हम इस रिश्ते की मिठास बनाए रख सकते हैं।
प्रीता जैन

भागमभाग- व्यक्ति की जिंदगी का बस यही पर्याय बनता जा रहा है। स्वयं की ही इच्छाओं-आकांक्षाओं के ताने-माने में, उनको पूरा करने में इस कदर फंसता जा रहा है कि सुबह से शाम तक व्यस्त दिनचर्या होने के नाते उसकी सोच का दायरा अपने तक ही सिमटता जा रहा है। अपनों के लिए कुछ सोचने, कर गुजरने का तो वक्त ही नहीं मिल पाता परंतु फिर भी इंसानियत के नाते बचपन में सीखे अच्छे संस्कार-शिक्षा की वजह से व्यक्ति के दिलो-दिमाग में परिवार व अपने के लिए जो कर्तव्य-जिम्मेदारियां हैं, वे याद जरूर आते रहते हैं, किंतु तमाम व्यस्तताओं के बीच ना चाहते हुए भी या तो उन्हें जबरदस्ती भुलाने की कोशिश करता है या फिर अपने मन के विचारों को परे धकेलते हुए उनसे अलग होने की ठान लेता है। क्या ऐसा वास्तव में हो पाता है? अपनों से अपने व्यक्तित्व को अलग कर पाता है कोई? शायद नहीं। अच्छा स्वयं से ही सवाल-जवाब कर जानिए क्या आप वास्तव में अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो पाते हैं। आपका दिल व दिमाग एक साथ सहमत हो पाते हैं। जवाब इनका भी शायद नहीं ही होगा, क्योंकि बचपन से जो कर्तव्यों का बोध कराया जाता है, उनसे इंसानी तौर पर ना तो बचा जाता है, ना ही मुंह फेर कर किनारा किया जा सकता है। कहने का तात्पर्य है कि हमें अपने थोड़े-बहुत फर्ज तो निभाने ही पड़ते हैं, चाहे खुश होकर अथवा नाखुश रहकर।

माना कि आज का समय पहले जैसा नहीं रह गया। आगे बढ़ने, तरक्की के रास्ते पर चलने के लिए बैठे-बिठाए कुछ भी हासिल नहीं होता, इधर-उधर आना-जाना लगा ही रहता है, परंतु मंजिल पाने के बावजूद भी सही मायने में सफल आप तब ही कहलाओगे, जब घर-बाहर दोनों में ही संतुलन बनाकर दोहरी जिम्मेदारी व भूमिका निभाएंगे। तभी अपने कर्त्तव्य अदा कर सकेंगे। जीवन में सबसे अहम व्यक्ति के लिए अपना परिवार ही होता है। अब यहां बात अपनों के लिए अपनेपन में कुछ करने की है तो कतई जरूरी नहीं कि बड़े-बड़े वायदे या कार्य ही किए जाएं, वरन अपनी सोच का दायरा विस्तृत कर पारिवारिक सदस्यों के हित से संबंधित छोटी- छोटी बातों का ध्यान रख उन्हें अपने साथ होने का एहसास कराकर भी सच्ची खुशी दी जा सकती है और स्वयं भी आंतरिक शांति व सुकून के भागीदार हो सकते हैं।

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