क्या वनस्पति विज्ञान का अंत हो चुका है?
Srote|August 2021
पिछले दिनों सेल प्रेस रिव्यू में विज्ञान और समाज शीर्षक के अंतर्गत एक पर्चा छपा था दी एंड ऑफ बॉटनी । यह पर्चा संयुक्त रूप से अर्जेंटाइना के वनस्पति संग्रहालय के जार्ज वी. क्रिसी, लिलियाना कैटीनास, मारिया एपीडोका और मिसौरी वनस्पति उद्यान के पीटर सी. हॉच द्वारा लिखा गया है। इस पर्चे का शीर्षक वाकई चौंका देने वाला है और हमें वनस्पति विज्ञान के वर्तमान यथार्थ से रू-ब-रू कराता है।
डॉ. किशोर पवार

मैं स्वयं वनस्पति शास्त्र का शिक्षक रहा हूं। यह पर्चा पढ़ते हुए मुझे विक्रम विश्वविद्यालय की वानस्पतिकी अध्ययन शाला में स्नातकोत्तर शिक्षा (1977-78) के अपने दिन याद आ गए । 1982 तक वहीं मैं शोध छात्र भी रहा । बॉटनी डिपार्टमेंट में एम.एससी. की कक्षाएं खचाखच भरी होती थीं। वनस्पति विज्ञान के प्रतिष्ठित प्राध्यापकों द्वारा अध्यापन किया जाता था। फिर गिरावट का एक ऐसा दौर आया कि विद्यार्थी लगातार कम होते चले गए । अध्यापकों की नई भर्ती हुई नहीं और जो थे वे एक के बाद एक रिटायर होते गए। और वर्तमान में यहां एक ही स्थायी प्राध्यापक है। और विभाग आज वनस्पति शास्त्र विषय लेने वाले विद्यार्थियों को तरसता है।

मुख्य विषय वनस्पति विज्ञान की उपेक्षा वर्तमान में एक विश्वव्यापी चिंता का कारण बन चुकी है। इस स्थिति के लिए ज़िम्मेदार कारण कमोबेश वैश्चिक हैं। दूसरी ओर, इसकी उप-शाखाएं (जैसे बायो-टेक्नोलॉजी, मॉलीक्यूलर बायोलॉजी, एनवायरमेंटल साइंस और माइक्रोबायोलॉजी आदि) फल-फूल रही हैं । दुख की बात तो यह है कि इन तथाकथित नए प्रतिष्ठित विषयों को पढ़ाने वाले, चलाने वाले प्राध्यापक मूल रूप से वनस्पति विज्ञान के विद्यार्थी ही रहे हैं।

वैसे यह पर्चा अमेरिका के संदर्भ में लिखा गया है लेकिन समस्या अमेरिका तक सीमित नहीं है, दुनिया भर में यही स्थिति है। वनस्पति विज्ञान के कई प्राध्यापक भी सामान्य पौधों तक को पहचानने में असमर्थ हैं । यह जानते हुए भी कि पेड़-पौधे जीवन का आधार हैं, हम इस संकट तक कैसे पहुंचे, इसके कारण क्या हैं? इस परिस्थिति को बदलने के लिए हम क्या कर सकते हैं? ऐसे ही कुछ सवाल उक्त पर्चे में उठाए गए हैं जिनका उल्लेख यहां किया जा रहा है।

इस पर्चे में एक विधेयक की भी बात है जिसका शीर्षक है 'दी बॉटेनिकल साइंस एंड नेटिव प्लांट मटेरियर रिसर्च रीस्टोरेशन एंड प्रमोशन एक्ट' जिसे 'बॉटनी विधेयक' भी कहा जा रहा है। यह उन चेतावनियों का नतीजा है जो यूएस नेशनल पार्क सर्विसेज़ एंड ब्यूरो आफ लैंड मैनेजमेंट जैसे संस्थानों द्वारा समय-समय पर दी गई थीं। इन संस्थानों का कहना है कि उन्हें वर्तमान में ऐसे वनस्पति शास्त्री पर्याप्त संख्या में नहीं मिल रहे हैं जो घुसपैठी पौध प्रजातियों, जंगल की आग के बाद पुनःवनीकरण और आधारभूत भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में मदद कर सकें।

विधेयक का उद्देश्य वनस्पति शास्त्र में शोध और विज्ञान क्षमता को बढ़ावा देना और स्थानीय पौध सामग्री की मांग बढ़ाना है। बिल में त्वरित कार्रवाई की ज़रूरत बताई गई है क्योंकि अगले कुछ वर्षों में सेवा निवृत्ति के चलते तथा नई भर्ती के अभाव में यूएस अपने आधे से भी अधिक विशेषज्ञ वनस्पति शास्त्री गंवा देगा। यह टिप्पणी यूं तो विशेषकर यूएसए के लिए है, पर कमोबेश यही स्थिति सारी दुनिया में देखी जा रही है।

Continue reading your story on the app

Continue reading your story in the magazine

MORE STORIES FROM SROTEView All

मादा नेवलों में विचित्र प्रसव-तालमेल

हाल ही में नेवलों की आबादी पर किए गए अध्ययन से प्रजनन सम्बंधी कुछ अद्भुत परिणाम सामने आए हैं।

1 min read
Srote
September 2021

टेक्नॉलॉजी का सहस्राब्दी पुरस्कार

वर्ष 2020 के सहस्राब्दी टेक्नॉलॉजी पुरस्कार की घोषणा मई में की गई। यह पुरस्कार डीएनए अनुक्रमण (सिक्वेसिंग) की क्रांतिकारी तकनीक के विकास हेतु शंकर बालसुब्रमण्यन और डेविड क्लेनरमैन को दिया गया है। उनका काम विज्ञान और नवाचार का उत्कृष्ट संगम है। यह बहुत प्रासंगिक भी है क्योंकि वर्तमान महामारी के संदर्भ में हम सबने जीनोम अनुक्रमण के बारे में खूब सुना है।

1 min read
Srote
September 2021

जीवित मलेरिया परजीवी से निर्मित टीके की सफलता

हर वर्ष मलेरिया से लगभग चार लाख लोगों की मौत होती है। दवाइयों तथा कीटनाशक युक्त मच्छरदानी वगैरह से मलेरिया पर नियंत्रण में मदद मिली है लेकिन टीका मलेरिया नियंत्रण में मील का पत्थर साबित हो सकता है। मलेरिया के एक प्रायोगिक टीके के शुरुआती चरण में आशाजनक परिणाम मिले हैं।

1 min read
Srote
September 2021

कोविङ-19: विभिन्न देशों के स्कूल सम्बंधी अनुभव

पिछला एक वर्ष हम सभी के लिए चुनौती भरा दौर रहा है। एक ओर तो महामारी का दंश तथा दूसरी ओर लॉकडाउन के कारण मानसिक तनाव । साथ ही समस्त शिक्षण का ऑनलाइन हो जाना।

1 min read
Srote
September 2021

हबल दूरबीन लौट आई है!

प्रतिष्ठित अंतरिक्ष दूरबीन हबल में लगभग एक महीने पहले कंप्यूटर सम्बंधी गड़बड़ी आ जाने के कारण उसने काम करना बंद कर दिया था, अब यह फिर से काम करने लगी है। साइंस पत्रिका के अनुसार दूरबीन का नियंत्रण ऑपरेटिंग पेलोड कंट्रोल कंप्यूटर से हटाकर बैकअप उपकरणों पर लाने के बाद हबल दूरबीन के सभी उपकरणों के साथ पुनः संवाद स्थापित कर लिया गया है।

1 min read
Srote
September 2021

संरक्षित ऊतकों से 1918 की महामारी के साक्ष्य

वर्ष 1918 में उस समय के नए इन्फ्लुएंज़ा स्ट्रेन से मारे गए दो जर्मन सैनिकों के फेफड़ों से बीसवीं सदी की सबसे विनाशकारी महामारी की आणविक झलक देखने को मिली है।

1 min read
Srote
August 2021

समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण पर बढ़ती चिंता

प्लास्टिक माउंट एवरेस्ट से लेकर अंटार्कटिका तक पहुंच चुका है। हर वर्ष, लाखों टन प्लास्टिक कचरा समुद्र में बहा दिया जाता है। इनमें से कुछ बड़े टुकड़े तो समुद्र में तैरते रहते हैं, कुछ छोटे कण समुद्र के पेंदे में पहुंच जाते हैं तो कुछ का ठिकाना समुद्र की गहरी खाइयों के क्रस्टेशियन जीवों तक में होता है।

1 min read
Srote
August 2021

आजकल फफूंद की चर्चा हर जुबान पर

इन दिनों फफूंद के बड़े चर्चे हैं। ब्लैक फंगस, वाइट फंगस और फिर येलो फंगस । वैसे ये फफूंदें तो सहस्राब्दियों से हमारे साथ रहती आई हैं और रहेंगी। कभी दोस्त तो कभी दुश्मन बन कर।

1 min read
Srote
August 2021

क्या वनस्पति विज्ञान का अंत हो चुका है?

पिछले दिनों सेल प्रेस रिव्यू में विज्ञान और समाज शीर्षक के अंतर्गत एक पर्चा छपा था दी एंड ऑफ बॉटनी । यह पर्चा संयुक्त रूप से अर्जेंटाइना के वनस्पति संग्रहालय के जार्ज वी. क्रिसी, लिलियाना कैटीनास, मारिया एपीडोका और मिसौरी वनस्पति उद्यान के पीटर सी. हॉच द्वारा लिखा गया है। इस पर्चे का शीर्षक वाकई चौंका देने वाला है और हमें वनस्पति विज्ञान के वर्तमान यथार्थ से रू-ब-रू कराता है।

1 min read
Srote
August 2021

अंतर्राष्ट्रीय महामारी संधि का आह्वान

कोविड -19 महामारी ने यह तथ्य पुख्ता किया है कि जब तक सभी लोग सुरक्षित नहीं होंगे तब तक इस महामारी से कोई भी सुरक्षित नहीं होगा।

1 min read
Srote
August 2021