हर संबंध से बड़ा है गुरु-शिष्य का संबंध
Rishi Prasad Hindi|December 2020
जो सुख के दाता हैं उनका नाम है सद्गुरु'।

पूज्य बापूजी के चचेरे भाई श्री टिल्लूमलजी हरपलानी के परिवार में से कुछ सदस्य १६ नवम्बर २०१९ को सपरिवार अहमदाबाद आश्रम पधारे थे । प्रस्तुत हैं 'ऋषि प्रसाद' के प्रतिनिधि मंडल की उनके साथ हुई बातचीत के कुछ अंश :

पूज्य बापूजी के पावन सान्निध्य में बिताये हुए दिनों को याद कर लाजवंती हरपलानी (पूज्यश्री के चचेरे भाई की ६६ वर्षीया बहू) अत्यंत भावपूर्ण हो गयीं, उनके नेत्र प्रेमाश्रुओं से भर गये । उन्होंने गद्गद कंठ से बताया कि ''शरीर से तो बापूजी मेरे ससुर लगते हैं लेकिन वास्तव में तो बापूजी मेरे गुरु हैं और मैं उनकी शिष्या हूँ। जब मुझे कोई समस्या आती है तो मैं पूज्यश्री के श्रीचित्र के सामने बैठ जाती हूँ। इससे मेरी सब परेशानियाँ हल हो जाती हैं । मुझे गुरुकृपा के कई अनुभव हुए हैं।

१९७४ के आसपास की बात है । मेरे पतिदेव मांस, शराब आदि बहुत खाते-पीते थे । एक दिन मेरे ससुर (टिल्लूमलजी) रात को सोते समय बापूजी को प्रार्थना कर रहे थे कि 'बापूजी ! अगर आपमें शक्ति हो तो मेरे बेटे को सही कर दीजिये।'

दूसरे दिन अचानक पूज्य बापूजी हमारे घर पर आ गये । पूज्यश्री को देखकर मेरे ससुरजी के आश्चर्य का ठिकाना न रहा, बोले : आप यहाँ !

बापूजी बोले : ''आपने मुझे याद किया और मैं आ गया । बताओ क्या समस्या है ?

'जी, मेरे बेटे को ठीक कर दीजिये, मुझे और कुछ नहीं चाहिए।

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