संत-महापुरुषों की जयंती मनाने का उद्देश्य
Rishi Prasad Hindi|March 2020
गुरु को देख मानेंगे तो आप देह से परे नहीं जायेंगे।
पूज्य बापूजी

मेरा जन्मदिवस-उत्सव आप मनाते हैं लेकिन यह समझना भी आवश्यक है कि मेरा और आपका अनादि काल से कई बार जन्म हुआ है। भगवान अपने प्रिय अर्जुन को कहते हैं :

बहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन।

तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परन्तप ।

'हे परंतप अर्जुन ! मेरे और तेरे बहुत-से जन्म हो चुके हैं। उन सबको तू नहीं जानता किंतु मैं जानता हूँ।'

जीव क्यों नहीं जानता है ? क्योंकि जीव नश्वर वस्तुओं का संग्रह करने और उनसे सुख लेने के लिए जो चिंतन करता है उससे उसकी मति व वृत्ति स्थूल हो गयी है। इसलिए वह अपने जन्मों को नहीं जानता है और ईश्वर अपने अवतारों को जानते हैं क्योंकि ईश्वर में विषय-विलास से सुख लेने की मति व वृत्ति नहीं है। ईश्वर को अपने आत्मस्वरूप का भान रहता है। 'जो जन्मता है, बढ़ता है, बूढ़ा होता है और मर जाता है वह मेरा शरीर है।' - ऐसा जिन सत्पुरुषों को अनुभव होता है वे भी अपने शरीर के जन्म को एक निमित्तमात्र बनाते हैं, अपने वास्तविक स्वरूप को जानते हैं। ऐसे पुरुष भगवान के उस रहस्य को समझकर अपने अखंड स्वभाव में जगे रहते हैं।

जयंतियाँ क्यों मनायी जाती हैं ?

Continue reading your story on the app

Continue reading your story in the magazine

MORE STORIES FROM RISHI PRASAD HINDIView All

भक्तों के भाव स्वीकारते गुरुवर पग-पग पर सहाय करते बन रहबर

भगवान को तुम क्या देते हो इसका महत्त्व नहीं है बल्कि किस भाव से देते हो इसका बड़ा महत्त्व है।

1 min read
Rishi Prasad Hindi
January 2022

सूर्यदेव ने कार्तिकजी का पूजन रोककर पहले किनको पूजा ?

तुम आत्मदेव में जग जाओ तो वह दिन दूर नहीं कि देवी-देवता तुम्हें रिझाना शुरू कर दें।

1 min read
Rishi Prasad Hindi
January 2022

शरीर को स्वच्छ व पुष्ट करनेवाला गेहूँ का चोकर

अनुकूलता का सदुपयोग किया तो प्रतिकूलता का असर नहीं होगा।

1 min read
Rishi Prasad Hindi
January 2022

ईश्वरीय अंश विकसित कर यहीं ईश्वरतुल्य हो जाओ

भोगों से विरक्ति हो रही है तो समझो जगने की तरफ (ईश्वर की ओर) चल रहे हैं।

1 min read
Rishi Prasad Hindi
January 2022

कसाब के लिए मानवाधिकार है और संत के लिए नहीं ?

जो सच्चे संतों की निंदा करता है, उनको सताता है, वह अपने भाग्य को ठुकराता है, आत्मघात करता है।

1 min read
Rishi Prasad Hindi
January 2022

परिक्रमा क्यों ?

सत्संग से समत्व योग की कला सुनकर थोड़ा मनन करके अपने व्यवहार में लायें तो व्यवहार भी बंदगी हो जायेगा।

1 min read
Rishi Prasad Hindi
January 2022

दृढव्रती हो जाओ

अपने वास्तविक स्वरूप में टिकने की दृढ़ता आ जाय तो शांति तो हमारा स्वभाव है।

1 min read
Rishi Prasad Hindi
January 2022

ऐसा निःस्वार्थ सेवाभाव महान बना देता है

जो चिंता की खाई में नहीं गिरता है उसके हृदय में आनंद का झरना फूट निकलता है।

1 min read
Rishi Prasad Hindi
January 2022

आशारामजी बापू जेल में नहीं हैं, हमारी संस्कृति की रक्षा-प्रणाली जेल में है : श्री धनंजय देसाई

अधा वृत्राणि जङ्घनाव भूरि ।

1 min read
Rishi Prasad Hindi
January 2022

'सबकी तृप्ति में अपनी तृप्ति' दीपोत्सव मनाने की गुरुप्यारों की अनोखी है युक्ति

तुम्हारे जीवन में जो भी श्रेय है, जो भी अच्छा है वह बाँटने के लिए है।

1 min read
Rishi Prasad Hindi
January 2022