खगोल और ज्योतिष विद्या में अग्रणी थे कश्मीरी पंडित
Kendra Bharati - केन्द्र भारती|April 2021
धरती पर स्वर्ग है कश्मीर, कश्यप ऋषि की तपोभूमि है कश्मीर और कश्मीरी पंडितों की जन्मस्थली है कश्मीर। लेकिन यह दुर्भाग्य है कि कश्मीर पर अधिकांश समय गैरकश्मीरियों का अधिकार रहा। वर्तमान में भी मूल निवासी कश्मीरी पंडितों को बलपूर्वक कश्मीर से भगा दिया गया। तत्कालीन केन्द्र सरकार मूक दर्शक बनकर देखत रही। आज वे अपनी जन्मस्थली से मानसिक पीड़ा झेलते हुए भारत में ही अन्य जगहों पर विस्थापित जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
महेश चन्द्र माथुर

कश्मीरी पंडित धर्मशास्त्रों, खगोलशास्त्र एवं ज्योतिशास्त्र में निपुण थे। वैसे भारत में खगोल शास्त्र की परम्परा बहुत पुरानी है। आर्य भट्ट प्राचीन भारत के एक महान खगोलशास्त्रीय, ज्योतिषविद् और गणितज्ञ थे। कश्मीरी पंडित भी इस क्षेत्र में सदा अग्रणी रहे हैं। यहां हर बच्चे के जन्म के समय ग्रहों की स्थिति के अनुसार उसकी जन्म कुण्डली बनाई जाती थी। जन्म कुण्डली के आधार पर बच्चे के भविष्य और उससे जुड़े भाग्य को आंका जाता था। ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति और उनकी गणना करना पंडितों की अति प्राचीन परम्परा है। ऐसा माना जाता है कि लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व कश्मीरी पंडितों ने सप्तऋषि पंचाग निकालना प्रारंभ किया था।

खगोल विज्ञान में ग्रहों, नक्षत्रों की स्थिति, दूरी एवं गति की गणना की जाती है। चूंकि कश्मीरी पंडित वैदिक गणित में दक्ष थे। अतः विज्ञान में उनकी खोज व जानकारी सही, सटीक होती थी।

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