किन ग्रहयोगों से होता है पितृदोष?
Jyotish Sagar|September 2021
पितृदोष का विचार ज्योतिषशास्त्र में अनेक स्थानों पर किया गया है। यहाँ पितृदोष को 'पितृशाप', 'मातृ-शाप', 'भ्रातृशाप', 'पितृकोप', 'प्रेतकोप' इत्यादि नामों से भी जाना जाता है।

ज्योतिष के सिद्धान्तशिरोमणि (गोलाध्याय, त्रिप्रश्नवासना, श्लोक 13-14), सूर्यसिद्धान्त (14/1, 14), ब्रह्मस्फुट सिद्धान्त (मध्यमाधिकार, श्लोक 25), बटेश्वर सिद्धान्त (मध्यमाधिकार, श्लोक 4) आदि सिद्धान्त ग्रन्थों में पितृलोक के अस्तित्व को स्वीकार किया गया है। बृहत्पाराशरहोराशास्त्र, जातकपारिजात, प्रश्नमार्ग, जातकरत्न, जातकतत्त्व इत्यादि प्रन्थों में पितृदोष का उल्लेख मिलता है। ज्योतिष में आयुर्वेद की भाँति पितर, पिशाच आदि को 'प्रह' कहा गया है। यहाँ ग्रह का आशय उन दुष्ट आत्माओं आदि से है, जो जातक पर दुष्प्रभाव डालते हैं और उसके जीवन को कंटकाकीर्ण कर देते हैं। ज्योतिष में 27 'प्रहं बताए गए हैं, जिनमें 18 'महानह' हैं और 09 'लघुग्रह' हैं। ये 18 महामह निम्नानुसार हैं (प्रश्नमार्ग 15/61-63):

1. अमर, 2. असुर, 3. नाग, 4. यक्ष, 5. गन्धर्ब, 6. राक्षस, 7. हेद्र, 8. कश्मल, 9. निस्तेज, 10. भस्मक, 11. पितर, 12. कृश, 13. विनायक, 14. प्रलाप, 15. पिशाच, 16. अत्यज, 17. योनिज एवं 18. भूत।

नौ लघुग्रह निम्नानुसार हैं (प्रश्नमार्ग 15/64) :

1. अपस्मार, 2. द्विज, 3. ब्रह्मराक्षस, 4. अवनिभुष, 5. वैश्य, 6. वृषल, 7. नीच, 8. चाण्डाल एवं 9, व्यत्तराय।

जिस समय भगवती सती ने शरीर त्याग किया था, तब भगवान् शंकर के क्रोध से ग्रह उत्पन्न हुए थे। इन एवं अन्य ग्रहों को तीन भागों में विभक्त किया गया है (प्रश्नमार्ग 15/65-66)

1. अलिकामा : जो बलि की इच्छा : रखते हों।

2. रन्तुकामा : जो रमण की इच्छा रखते हों, और

3. हन्तुकामा : जो मारने की इच्छा रखते हों। इन ग्रहों की 'सौम्यता' एवं 'उप्रता' के अनुसार पुनः दो भेद होते हैं। इन सबको उसकी स्थिति से समझना चाहिए अर्थात् पितर आदि कोई 'ग्रह' किसी व्यक्ति के लिए इन भी हो सकता है और दूसरे व्यक्ति के लिए सौम्य भी हो सकता है। इसी प्रकार ये ग्रह बलिकामा, रन्तुकामा या हन्तुकामा भी हो सकते हैं। इनमें उग्न हन्तुकामा पितर सर्वाधिक घातक है तथा उग्न स्न्तुकामा पितर बार-बार शान्ति के पश्चात् भी शान्त नहीं होते।

पितृदोष के ग्रहयोग

ज्योतिषग्रन्थों में पितृदोष के जो प्रयोग बताए गए हैं, उनका संक्षेप में वर्णन निम्नानुसार हैं : 1. यदि सूर्य अनिष्ट स्थान अर्थात् त्रिषडाय से भिन्न स्थानों में स्थित हो, तो फितृकोप होता है और उससे जातक को कष्ट होता है एवं हृदय, क्रोड़ एवं नेत्रों में रोग होते हैं। अस्थिसाव, पित्तविकार, अग्नि, विद्युत् आदि का भय एवं पशुओं का भय होता है तथा ताम्न आदि धातुओं की हानि होती है एवं आत्मा को पीड़ा होती है। (प्रश्नमार्ग 14/90)

2. यदि सूर्य बाधक स्थान में मंगल की राशि या नवांश में स्थित हो, तो पितृशाप होता है।

3. इसी प्रकार यदि चन्द्रमा बाधक स्थान में मंगल की राशि या नवांश में स्थित हो, तो मातृशाप होता है।

4. यदि सूर्य एवं चन्द्रमा की राशियों में अनिष्ट स्थानों में पापग्रह स्थित हो, तो भी पितृ अथवा मातृशाप होता है। (प्रश्नमार्ग 15/39)

5. यदि बाधक स्थान में पापग्रह गुरु के साथ स्थित हो अथवा गुरु की राशि बाधक स्थान में स्थित हो और उसमें कोई पापग्रह स्थित हो, तो देवता या ब्राह्मण का शाप होता है।

6. यदि बाधक स्थान में पापग्रह सूर्य की राशि सिंह में स्थित हो अथवा सूर्य के साथ बह बाधक स्थान में स्थित हो, तो पूर्वजों का शाप होता है अथवा गुरुजनों का शाप होता है। यदि बाधक स्थान पापग्रह मंगल हो, तो शाप बहुत उग्न होता है (प्रश्नमार्ग 15/40)।

7. यदि जन्मपत्रिका में षष्ठेश नव्म भाव में तथा नवमेश षष्ठ भाव में स्थित हो, तो पिता, गुरु अथवा पूर्वजों का शाप जानना चाहिए। वे अप्रसन्न हैं, ऐसा समझना चाहिए।

8. यदि सूर्य षष्ठ भाव में स्थित हो अथवा सूर्य एवं षष्ठेश की युति कुण्डली में कहीं भी हो, तो पिता की अप्रसन्नता जाननी चाहिए।

9. इसी प्रकार चन्द्रमा या चतुर्थेश षष्ठ भाव में स्थित हो अथवा चन्द्रमा की षष्ठेश से युति हो, तो माता की अप्रसन्नता जाननी चाहिए। (प्रश्नमार्ग 15/41)

Continue reading your story on the app

Continue reading your story in the magazine

MORE STORIES FROM JYOTISH SAGARView All

गणेश का विलक्षण स्वरुप

गणेश भी वैदिक देवता हैं, किन्तु इनका नाम वेदों में गणेश न होकर 'ब्रह्मणस्पति' है। जो वेद में 'ब्रह्मणस्पति' के नाम से अनेक सूत्रों में अभिहित किए गए हैं।

1 min read
Jyotish Sagar
September 2021

किन ग्रहयोगों से होता है पितृदोष?

पितृदोष का विचार ज्योतिषशास्त्र में अनेक स्थानों पर किया गया है। यहाँ पितृदोष को 'पितृशाप', 'मातृ-शाप', 'भ्रातृशाप', 'पितृकोप', 'प्रेतकोप' इत्यादि नामों से भी जाना जाता है।

1 min read
Jyotish Sagar
September 2021

रुद्रेश्वर मन्दिर अब विश्व धरोहर

काकतीय रुद्रेश्वर मन्दिर, वारंगल

1 min read
Jyotish Sagar
September 2021

कब होती है ग्रहबाधा?

भविष्य का आकलन करने के लिए ज्योतिष में अनेक विधाएँ प्रचलित हैं। घर से किसी काम के लिए निकलते समय शुभ शकुन मिल जाते हैं, तो कार्य पूरा होने की उम्मीद बंध जाती है, इसके विपरीत अशुभ शकुन मिलने पर सफलता पर प्रश्नवाचक चिह्न ला जाता है।

1 min read
Jyotish Sagar
September 2021

धन-सम्पन्नता और सुख देने वाली हस्तरेखाएँ

मनुष्य को कर्म तो सतत करना पड़ता है, क्योंकि जीवन चलने का बाग है, परन्तु सतत कर्म के बाद जो चीज मिलती है, उसे ही अंत में 'किस्मत' कहा जाता है। मनुष्य के जीवन में किस्मत की ऐसी अवधारणा के बीच हाधों की लकीरों में छिपे अपने भाग्य को जानने और समझने के लिए हस्त अध्ययन भी एक कारवार उपकरण के रूप में साबित होता है ...

1 min read
Jyotish Sagar
August 2021

रिचर्ड ब्रैन्सन- अन्तरिक्ष व्यवसाय में ऐतिहासिक छलाँग

एयरलाइंस के क्षेत्र में इनको अच्छी सफलता मिली, अन्य अन्तरिक्ष पर्यटन के क्षेत्र में भी अच्छी सफलता मिलने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लगभग 600 लोगों ने अन्तरिक्ष सैर की एडवांस बुकिंग करवा रखी है।

1 min read
Jyotish Sagar
August 2021

पर्यटन के लिए खुला अन्तरिक्ष

अन्तरिक्ष की सैर

1 min read
Jyotish Sagar
August 2021

जानें कब होगा कल्कि अवतार?

सतयुग में भगवान् श्रीविष्णु के चार अबतार हुए-मत्स्यावतार, कूमवितार, बराहावतार और नृसिंहावतार। दैत्य शंखासुर का बध करने तथा वेदों का उद्धार करने हेतु मत्स्यावतार, पृथ्वी का भार बहन करने हेतु कूर्मावतार, सागर में विलीन धरती का उद्धार करने तथा दैत्य हिरण्याक्ष का बध करने हेतु बराहावतार तथा हिरण्यकशिपु का बध करने तथा भक्तराज प्रहाद की रक्षा के लिए नृसिंहावतार सतयुग में हुए।

1 min read
Jyotish Sagar
August 2021

ट्रेजिडी किंग दिलीप कुमार- हिन्दी सिनेमा के स्वर्णिम युग का अन्त

अमिताभ बच्चन ने उनको श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि एक संस्थान चला गया। हिन्दी सिनेमा का इतिहास जब कभी लिखा जाएगा, यह हमेशा दिलीप कुमार से पहले और उनके बाद कहलाएगा। एक युग पर परदा गिरा, दुबारा कभी न होने के लिए।

1 min read
Jyotish Sagar
August 2021

उपलब्धिदायक हैं दशाएँ

लियोनेल मेस्सी

1 min read
Jyotish Sagar
August 2021