कब होती है ग्रहबाधा?
Jyotish Sagar|September 2021
भविष्य का आकलन करने के लिए ज्योतिष में अनेक विधाएँ प्रचलित हैं। घर से किसी काम के लिए निकलते समय शुभ शकुन मिल जाते हैं, तो कार्य पूरा होने की उम्मीद बंध जाती है, इसके विपरीत अशुभ शकुन मिलने पर सफलता पर प्रश्नवाचक चिह्न ला जाता है।
आचार्य लक्ष्मीनारायण शास्त्री 'व्यास'

जीवन में शकुन, अंग स्फुरण यहाँ तक छींक तक का भी महत्त्व है। ये सब भविष्य की ओर संकेत करते हैं। व्यक्तिगत जीवन में 'जन्मपत्रिका', 'वर्ष फल', 'वास्तुशास्त्र', 'गोचर भ्रमण' और 'मुहूर्त' अपना-अपना महत्व रखते हैं। व्यक्ति का जीवन स्थूल रूप से 50 प्रतिशत जन्मपत्रिका से प्रभावित रहता है, 30 प्रतिशत गोचर भ्रमण उसे प्रभावित करते हैं। वास्तु आदि ज्योतिष की विविध शाखा प्रशाखाएं 20 प्रतिशत में समाविष्ट हो जाती हैं।

जन्मपत्रिका व्यक्ति को सर्वाधिक प्रभावित करती है। जन्मलम जहाँ व्यक्ति के व्यक्तित्व का रेखांकन करता है, वहीं चन्द्र राशि उसकी मानसिकता की रूपरेखा बना देती है। जिस व्यक्ति के लात में बृहस्पति है अथवा केन्द्र स्थान में बृहस्पति है, वह तो सत्ता के सुख का उपभोग करने के लिए ही पैदा हुआ है। इसके विपरीत जिसका मेष लग्न है और मेष लाम में नीच का शनि बैठा हुआ है, उसका जीवन तो निश्चित रूप से संघर्षमय रहेगा अनेक बार उसे असफलता का सामना करना पड़ेगा। जिस व्यक्ति के शुक्र-बुध जैसे ग्रह केन्द्र (1-4-7-10 भाव) में हों, तो जीवन सुव्यवस्थित होता है। शुभ ग्रह शुभ स्थान में हों और पापग्रह अशुभ स्थान में हों, तो दोनों ही स्थिति अनुकूल फलदायक होती है। विपरीत शुभ ग्रह अशुभ स्थान (68-12 भाव) में हो, तो जीवन में ग्रह बाधा तो रहेगी ही। इस आकलन में एक बात की विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, वह है ग्रहों की दृष्टि। बृहस्पति जिस-जिस भाव को देखता है, उस-उस स्थान की वृद्धि करता है। इसके विपरीत शनि जिस-जिस भाव को देखता है, उस-उस भाव की हानि करता है। इन दोनों ग्रहों के बारे में एक और विलक्षण बात प्रचलित है कि शनि जिस भाव में बैठता है, उस भाव की वृद्धि करता है, इसके विपरीत बृहस्पति जिस-जिस भाव में अकेला बैठता है, उस-उस भाव को कुछ हानि पहुंचा देता है। स्वराशि, अपनी उच्चराशि, मित्र राशि में स्थित शुभ ग्रह शुभ स्थान में होने पर शुभ फल देते हैं।

जन्मकुण्डली में नीच राशि में स्थित, अस्तंगत, पाप ग्रहों से दृष्ट प्रह, शत्रुराशि में स्थित ग्रह एवं पापाक्रान्त प्रह अशुभ फल देते हैं, विशेषत: यदि ये शुभ स्थान में होते हैं, तो अधिक अशुभ फलदायक होते हैं। जन्मकुण्डली में अष्टम भाव को आयु स्थान कहा जाता है। 'भावात् भावम' के अनुसार अष्टम से अष्टम अर्थात् तृतीय भाव भी आयु के लिए निर्णायक भूमिका रखता है। अष्टम भाव एवं तृतीय भाव से व्यय अर्थात् द्वादश भाव मारक स्थान होते हैं। इस प्रकार सप्तम भाव और द्वितीय भाव 'मारक स्थान' होते हैं। मारक स्थान का स्वामी कारकेश' कहलाता है। मारकेश के गुणावगुण के आधार पर यह निर्णय किया जाता है कि मृत्यु नैसर्गिक होगी या दुर्घटना पर आधारित या हत्या होगी या आत्महत्या। मारकेश का जब भी समय आता है, शरीर-कष्ट अवश्य होता है।

जन्मकुण्डली में स्थित अशुभ फलदायक ग्रह के समान ही जिनकी कुण्डली में 'कालसर्पयोग होता है, वह भी कष्टदायक होता है। राहु और केतु के मध्य सभी ग्रह आ जाने पर कालसर्पयोग बनता है :

अप्रै राहुरथः केतुः सर्वे मध्यगता प्रहा।

योगेऽयं कालसपाख्यो शीघ्रतं तु विनाशय ।।

द्वादश भावों में राहु की स्थिति के आधार पर 12 प्रकार के कालसर्पयोग होते हैं : 1. अनन्त, 2.कुलिक, 3. वासुकि, 4. शंखपाल, 5. पद्य, 6. महापद्य, 7. तक्षक, 8.कर्कोटक, 9. शंखचूड़ 10. घातक 11. विषधर 12. शेषनाग। राहु और केतु के मध्य सभी ग्रह होने पर उदित कालसर्पयोग' होता है और केतु एवं राहु के मध्य सभी ग्रह स्थित होने पर 'अनुदित कालसर्पयोग होता है। पुनश्च यदि सभी ग्रह अंशों के आधार राहु-केतु के आधार पर इस परिसीमा से बाहर होता है, तो आंशिक कालसर्पयोग बनता है। राहु के साथ यदि सूर्य अथवा चन्द्रमा हो, तो यह कालसर्पयोग अधिक अनिष्टकारक होता है। यदि सूर्य, चन्द्र और राहु एक ही साथ हो, तो यह भयंकर कालसर्पयोग होता है। वैसे भी यह स्थिति ग्रहणादि योगकारक होती है। कालसर्प का प्रभाव सामान्यत: जीवन पर्यन्त रहता है, लेकिन 30 वर्ष की आयु तक इसका प्रभाव विशेषतः देखा जाता है।

बाधक ग्रह के प्रभाव से एक के बाद एक अनेक बाधाएं आती रहती हैं। एक बाधा समाप्त नहीं होती है, उससे पूर्व दूसरी तैयार हो जाती है। किसी साहित्यकार ने इस स्थिति का वर्णन करते हुए कहा है एक दुःख का अन्त ही नहीं हो पाता, उसके पूर्व दूसरा दुःख आकर खड़ा हो जाता है। जैसे किसी बर्तन में या व्यक्ति के जीवन में एक छिद्र होने पर एक के बाद एक अनर्थ होते रहते हैं।

Continue reading your story on the app

Continue reading your story in the magazine

MORE STORIES FROM JYOTISH SAGARView All

गणेश का विलक्षण स्वरुप

गणेश भी वैदिक देवता हैं, किन्तु इनका नाम वेदों में गणेश न होकर 'ब्रह्मणस्पति' है। जो वेद में 'ब्रह्मणस्पति' के नाम से अनेक सूत्रों में अभिहित किए गए हैं।

1 min read
Jyotish Sagar
September 2021

किन ग्रहयोगों से होता है पितृदोष?

पितृदोष का विचार ज्योतिषशास्त्र में अनेक स्थानों पर किया गया है। यहाँ पितृदोष को 'पितृशाप', 'मातृ-शाप', 'भ्रातृशाप', 'पितृकोप', 'प्रेतकोप' इत्यादि नामों से भी जाना जाता है।

1 min read
Jyotish Sagar
September 2021

रुद्रेश्वर मन्दिर अब विश्व धरोहर

काकतीय रुद्रेश्वर मन्दिर, वारंगल

1 min read
Jyotish Sagar
September 2021

कब होती है ग्रहबाधा?

भविष्य का आकलन करने के लिए ज्योतिष में अनेक विधाएँ प्रचलित हैं। घर से किसी काम के लिए निकलते समय शुभ शकुन मिल जाते हैं, तो कार्य पूरा होने की उम्मीद बंध जाती है, इसके विपरीत अशुभ शकुन मिलने पर सफलता पर प्रश्नवाचक चिह्न ला जाता है।

1 min read
Jyotish Sagar
September 2021

धन-सम्पन्नता और सुख देने वाली हस्तरेखाएँ

मनुष्य को कर्म तो सतत करना पड़ता है, क्योंकि जीवन चलने का बाग है, परन्तु सतत कर्म के बाद जो चीज मिलती है, उसे ही अंत में 'किस्मत' कहा जाता है। मनुष्य के जीवन में किस्मत की ऐसी अवधारणा के बीच हाधों की लकीरों में छिपे अपने भाग्य को जानने और समझने के लिए हस्त अध्ययन भी एक कारवार उपकरण के रूप में साबित होता है ...

1 min read
Jyotish Sagar
August 2021

रिचर्ड ब्रैन्सन- अन्तरिक्ष व्यवसाय में ऐतिहासिक छलाँग

एयरलाइंस के क्षेत्र में इनको अच्छी सफलता मिली, अन्य अन्तरिक्ष पर्यटन के क्षेत्र में भी अच्छी सफलता मिलने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लगभग 600 लोगों ने अन्तरिक्ष सैर की एडवांस बुकिंग करवा रखी है।

1 min read
Jyotish Sagar
August 2021

पर्यटन के लिए खुला अन्तरिक्ष

अन्तरिक्ष की सैर

1 min read
Jyotish Sagar
August 2021

जानें कब होगा कल्कि अवतार?

सतयुग में भगवान् श्रीविष्णु के चार अबतार हुए-मत्स्यावतार, कूमवितार, बराहावतार और नृसिंहावतार। दैत्य शंखासुर का बध करने तथा वेदों का उद्धार करने हेतु मत्स्यावतार, पृथ्वी का भार बहन करने हेतु कूर्मावतार, सागर में विलीन धरती का उद्धार करने तथा दैत्य हिरण्याक्ष का बध करने हेतु बराहावतार तथा हिरण्यकशिपु का बध करने तथा भक्तराज प्रहाद की रक्षा के लिए नृसिंहावतार सतयुग में हुए।

1 min read
Jyotish Sagar
August 2021

ट्रेजिडी किंग दिलीप कुमार- हिन्दी सिनेमा के स्वर्णिम युग का अन्त

अमिताभ बच्चन ने उनको श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि एक संस्थान चला गया। हिन्दी सिनेमा का इतिहास जब कभी लिखा जाएगा, यह हमेशा दिलीप कुमार से पहले और उनके बाद कहलाएगा। एक युग पर परदा गिरा, दुबारा कभी न होने के लिए।

1 min read
Jyotish Sagar
August 2021

उपलब्धिदायक हैं दशाएँ

लियोनेल मेस्सी

1 min read
Jyotish Sagar
August 2021