इंतजार!
Akhand Gyan - Hindi|February 2021
ज्यों ही पलकें उठीं, तो बाबा बुढन शाह ने अद्वितीय दिव्य नज़ारा देखा। उनके सामने साक्षात् गुरुदेव खड़े थे। उनका मुखमण्डल कभी गुरु नानक देव जी का दर्शन दे रहा था और कभी वर्तमान गुरु श्री हरगोबिंद सिंह जी का।

हे ईश्वर! धन्य है तू और तेरे वे आशिक, जिन्होंने तुझसे इस हद तक प्रेम किया कि प्रेम शब्द को और भी विराट बना दिया। उनकी जीवन-गाथा पढ़कर हमारे नयन उनके दर्शन के लिए मचल उठते हैं। दिल में एक टीस और गिला भी उठती है'हे प्रभु! जिस घड़ी तूने ऐसे मुरीदों को गढ़ा था, क्यों हमें उस काल, उस ऋतु का हमसफर नहीं बनाया?'

ऐसे ही एक भक्त-प्रेमी हैंबाबा बुढन शाह! उनके प्रेम, वैराग्य और समर्पण की सुगंध रहती दुनिया तक कायम रहेगी। बकरियाँ चराते थे वे! लेकिन जहाँ बकरियाँ दिन भर मैं-मैं के गीत गाती, वहीं बाबा बुढन शाह हर पल तू-तू की रागनियाँ! अन्न कभी मिलता, तो खा लेते; नहीं तो बकरियों के दूध से ही क्षुधा शांत कर लेते। कीरतपुर की पहाड़ियों की गोद में यह सिलसिला अनवरत जारी था।

पर उनका जीवन एकाकी नहीं था! कोई और भी था, जो हरपल उनके साथ थादेह से परे, बंधनों से परे! उसकी याद, उसकी इबादत ही बाबा बुढन को कभी बूढ़ा महसूस नहीं होने देती थी! और वे थे उनके गुरुदेव श्री गुरु नानक देव जी। यूँ तो बाबा बुढन का मन पहाड़ों की ही भाँति स्थिर था, पर एक तरंग थी जो उन्हें तरंगित कर जाया करती थी। गुहार के रूप में उठती'हे गुरुदेव! इससे पहले कि ऊपर-नीचे जाती मेरी इन श्वासों पर विराम-बिंदु लगे, आप एक बार मेरे हाथों से बकरी का दूध ग्रहण कर मुझे कृतार्थ कर देना!' अपने भक्त के अंतर्हदय से निरंतर उठती इस पुकार को गुरुदेव अनसुना न कर सके... और आखिरकार वह दिवस भी आ ही गया, जब बाबा बुढन की चाह को मंज़िल देने के लिए श्री गुरुदेव पहाड़ियों में जा पहुँचे।

यूँ तो बाबा बुढन शाह उस समय किसी पुराने जटाधारी पीपल की उम्र जैसे बूढ़े थे, लेकिन अपने गुरु-भगवान के दर्शन क्या हुए उनका चेहरा तो गेहूँ की जवान स्वर्णिम फसल की तरह चमक उठा। बाबा बुढन की खुशी का कोई पारावार नहीं रहा! रहता भी कैसे? उनकी श्वासों के अपनी सरहद पार करने से पहले ही उनके जीवन की अंतिम इच्छा पूर्ण होने वाली थी। वे अपने हाथों से अपने गुरुदेव को बकरी का दूध पिलाने वाले थे। उन्होंने शीघ्रता से दूध निकाला और दूध से भरा प्याला गुरुदेव के श्रीचरणों में समर्पित कर दिया।

लेकिन यह क्या! भक्त की हर पुकार, हर भाव को सहजता से स्वीकार कर लेने वाले गुरुदेव ने बाबा बुढन की यह विनती स्वीकार नहीं की! क्यों? क्यों दूध पीने से इन्कार कर दिया? बाबा बुढन शाह का तो मानो कलेजा ही निकल गया'हे प्रभु, क्या हुआ? ऐसी कौन सी भूल हुई मुझसे, जिसने आपको खफा कर दिया? क्षमा प्रभु, क्षमा! कृपया कारण तो बताएँ कि आप दूध ग्रहण क्यों नहीं कर रहे?' बाबा बुढन शाह की आँखों से गिरते अश्रु उनके चेहरे की झुर्रियों में से गुज़रते हुए नीचे धरती पर गिरने लगे। पर गुरुदेव के पावन मुखमंडल पर स्वीकृति के संकेत नहीं उभरे। काफी पलों के बाद, गुरुदेव बोले'बाबा बुढन शाह, आपके प्रेम ने हमें यहाँ आने पर विवश कर दिया। आपसे कोई भूल, कोई अपराध नहीं हुआ। आपके हाथों से हमें कुछ भी स्वीकार है, लेकिन... लेकिन आपके हाथों दूध हम इस जन्म में नहीं, बल्कि अपने छठे अवतार में ग्रहण करेंगे। क्या आप तब तक हमारा इंतज़ार कर सकते हैं?'

Continue reading your story on the app

Continue reading your story in the magazine

MORE STORIES FROM AKHAND GYAN - HINDIView All

एका बना वैष्णव वीर!

आपने पिछले प्रकाशित अंक (मार्च 2020) में पढ़ा था, एका शयन कक्ष में अपने गुरुदेव जनार्दन स्वामी की चरण-सेवा कर रहा था। सद्गुरु स्वामी योगनिद्रा में प्रवेश कर समाधिस्थ हो गए थे। इतने में, सेवारत एका को उस कक्ष के भीतर अलौकिक दृश्य दिखाई देने लगे। श्री कृष्ण की द्वापरकालीन अद्भुत लीलाएँ उसे अनुभूति रूप में प्रत्यक्ष होती गईं। इन दिव्यानुभूतियों के प्रभाव से एका को आभास हुआ जैसे कि एक महामानव उसकी देह में प्रवेश कर गया हो। तभी एक दरोगा कक्ष के द्वार पर आया और हाँफते-हाँफते उसने सूचना दी कि 'शत्रु सेना ने देवगढ़ पर चढ़ाई कर दी है। अतः हमारी सेना मुख्य फाटक पर जनार्दन स्वामी के नेतृत्व की प्रतीक्षा में है।' एका ने सद्गुरु स्वामी की समाधिस्थ स्थिति में विघ्न डालना उचित नहीं समझा और स्वयं उनकी युद्ध की पोशाक धारण करके मुख्य फाटक पर पहुँच गया। अब आगे...

1 min read
Akhand Gyan - Hindi
April 2021

'सुख' 'धन' से ज्यादा महंगा!

हेनरी फोर्ड हर पड़ाव पर सुख को तलाशते रहे। कभी अमीरी में, कभी गरीबी में, कभी भोजन में, कभी नींद में कभी मित्रता में! पर यह 'सुख' उनके जीवन से नदारद ही रहा।

1 min read
Akhand Gyan - Hindi
April 2021

कैसा होगा तृतीय विश्व युद्ध?

विश्व इतिहास के पन्नों में दो ऐसे युद्ध दर्ज किए जा चुके हैं, जिनके बारे में सोचकर आज भी मानवता काँप उठती है। पहला था, सन् 1914 में शुरु हुआ प्रथम विश्व युद्ध। कई मिलियन शवों पर खड़े होकर इस विश्व युद्ध ने पूरे संसार में भयंकर तबाही मचाई थी। चार वर्षों तक चले इस मौत के तांडव को आगामी सब युद्धों को खत्म कर देने वाला युद्ध माना गया था।

1 min read
Akhand Gyan - Hindi
April 2021

अपने संग चला लो, हे प्रभु!

जलतरंग- शताब्दियों पूर्व भारत में ही विकसित हुआ था यह वाद्य यंत्र। संगीत जगत का अनुपम यंत्र! विश्व के प्राचीनतम वाद्य यंत्रों में से एक। भारतीय शास्त्रीय संगीत में आज भी इसका विशेष स्थान है। इतने आधुनिक और परिष्कृत यंत्र बनने के बावजूद भी जब कभी जलतरंग से मधुर व अनूठे सुर या राग छेड़े जाते हैं, तो गज़ब का समाँ बँध जाता है। सुनने वालों के हृदय तरंगमय हो उठते हैं।

1 min read
Akhand Gyan - Hindi
April 2021

चित्रकला में भगवान नीले रंग के क्यों?

अपनी साधना को इतना प्रबल करें कि अत्यंत गहरे नील वर्ण के सहस्रार चक्र तक पहुँचकर ईश्वर को पूर्ण रूप से प्राप्त कर लें।

1 min read
Akhand Gyan - Hindi
April 2021

ठक! ठक! ठक! क्या ईश्वर है?

यदि तुम नास्तिकों के सामने ईश्वर प्रत्यक्ष भी हो जाए, तुम्हें दिखाई भी दे, सुनाई मी, तुम उसे महसूस भी कर सको, अन्य लोग उसके होने की गवाही भी दें, तो भी तुम उसे नहीं मानोगे। एक भ्रम, छलावा, धोखा कहकर नकार दोगे। फिर तुमने ईश्वर को मानने का कौन-सा पैमाना तय किया है?

1 min read
Akhand Gyan - Hindi
March 2021

आइए, शपथ लें..!

एक शिष्य के जीवन में भी सबसे अधिक महत्त्व मात्र एक ही पहलू का हैवह हर साँस में गुरु की ओर उन्मुख हो। भूल से भी बागियों की ओर रुख करके गुरु से बेमुख न हो जाए। क्याकि गुरु से बेमुख होने का अर्थ है-शिष्यत्व का दागदार हो जाना! शिष्यत्व की हार हो जाना!

1 min read
Akhand Gyan - Hindi
March 2021

अंतिम इच्छा

भारत की धरा को समय-समय पर महापुरुषों, ऋषि-मुनियों व सद्गुरुओं के पावन चरणों की रज मिली है। आइए, आज उन्हीं में से एक महान तपस्वी महर्षि दधीची के त्यागमय, भक्तिमय और कल्याणकारी चरित्र को जानें।

1 min read
Akhand Gyan - Hindi
March 2021

भगवान महावीर की मानव-निर्माण कला!

मूर्तिकार ही अनगढ़ पत्थर को तराशकर उसमें से प्रतिमा को प्रकट कर सकता है। ठीक ऐसे ही, हर मनुष्य में प्रकाश स्वरूप परमात्मा विद्यमान है। पर उसे प्रकट करने के लिए परम कलाकार की आवश्यकता होती है। हर युग में इस कला को पूर्णता दी है, तत्समय के सद्गुरुओं ने!

1 min read
Akhand Gyan - Hindi
March 2021

ठंडी बयार

सर्दियों में भले ही आप थोड़े सुस्त हो गए हों, परन्तु हम आपके लिए रेपिड फायर (जल्दी-जल्दी पूछे जाने वाले) प्रश्न लेकर आए हैं। तो तैयार हो जाइए, निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए। उत्तर 'हाँ' या 'न' में दें।

1 min read
Akhand Gyan - Hindi
February 2021
RELATED STORIES

Teachers, you are precious to us!

Covid-19 or otherwise, whether schools remain closed yet for another year or remain open, all of us, especially the young students who have experienced the loving care and affection of their teachers for years together will always specially think of them on Teachers’ Day, celebrated annually on September 5, set aside to express our gratitude for making them what we are today to a very great extent.

5 mins read
The Teenager Today
September 2021

Q & A ith Gurudev

When we fail, who is the doer?

3 mins read
Rishimukh
June 2021

पूज्य गुरुदेव के प्रवचन

पंद्रहवाँ ४५ दिवसीय गहन ध्यान अनुष्ठान समारोह समर्पण आश्रम, दांडी महाशिवरात्रि, दिनांक ११ मार्च, २०२१

1 min read
Madhuchaitanya Hindi
May - June 2021

The Guru's Words are Unchallengeable!

The words of the Guru are like unfailing predictions, and are bound to come true. No power has the capacity to stall them, and even God cannot undo what the Guru says and desires to do.

8 mins read
Akhand Gyan - English
March 2021

Miracles abound

“Once, in 2007, a small group including me were traveling with Gurudev in Kenya. We had flown to show him the wild animals in the jungle. He was in a car ahead of us. Driving at a slow pace behind him, what we saw was quite mesmerizing. A pack of lions surrounded his car and were walking around it.”

2 mins read
Rishimukh
February 2021

हर संबंध से बड़ा है गुरु-शिष्य का संबंध

जो सुख के दाता हैं उनका नाम है सद्गुरु'।

1 min read
Rishi Prasad Hindi
December 2020

Keep Your Desire Alive...

The Guru is like a touchstone that can transform iron into gold! Even if you are incapable and incompetent, he will take you to the peaks of success for sure!

6 mins read
Akhand Gyan - English
August 2020

परिपूर्णता के असंख्य रंग

गुरुदेव श्री श्री रविशंकर की वार्ताओं से उद्धृत

1 min read
Rishimukh Hindi
July 2020

योग के अंग

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर द्वारा पतंजलि योगसूत्र पर दिए गए प्रवचनों से उद्धृत

1 min read
Rishimukh Hindi
June 2020

कुछ परे देखना!

गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी की वार्ताओं से संकलित

1 min read
Rishimukh Hindi
June 2020