निजीकरण के पहले हवाईअड्डों पर होगा ज्यादा खर्च
Business Standard - Hindi|October 18, 2021
सरकार की 2025 तक 25 अन्य हवाईअड्डों के भी निजीकरण की योजना है। इसके पहले हवाईअड्डों के उन्जयन पर भारी रकम रखर्च होने का अनुमान
साई मनीष

देश के छह हवाईअड्डों को 50 वर्षों के लिए अदाणी समूह को सौंपने के साथ ही सरकार अन्य 25 हवाईअड्डों को भी निजी कंपनियों के सुपुर्द करने की तैयारी में है। हालांकि सरकारी आंकड़े बताते हैं कि हवाईअड्डों को निजी क्षेत्र के हवाले करने की योजना के बावजूद सरकार इनका ढांचा दुरुस्त करने के नाम पर 14,500 करोड़ रुपये की बड़ी रकम खर्च कर रही है।

सरकार की तरफ से इन हवाईअड्डों का संचालन करने वाला निकाय भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) नई टर्मिनल इमारत एवं हवाईपट्टी के निर्माण, लैंडिंग प्रणालियों एवं रडार को उन्नत करने और अन्य ढांचागत सुधारों पर अरबों रुपये खर्च कर चुका है। सरकार ने पहले कहा था कि वह सभी हवाईअड्डों पर कुल 25,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी। लेकिन अब यही लगता है कि सरकार इसमें से आधी से ज्यादा रकम उन्हीं हवाईअड्डों पर खर्च करती रही है जो या तो निजी कंपनियों को सौंपे जा चुके हैं या भविष्य में उन्हें निजी क्षेत्र को देने की तैयारी है। जिन छह हवाईअड्डों का परिचालन अदाणी समूह के हाथ में आया है, उनके उन्नयन एवं विस्तार पर वर्ष 2017 से 2020 के दौरान 2,500 करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च की। नागरिक विमानन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक उसने इन छह हवाई अड्डों पर विभिन्न ढांचागत कार्यों पर 300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जिसमें तिरुवनंतपुरम एवं गुवाहाटी की हवाईपट्टियों के विस्तार में लगे 100 करोड़ रुपये भी शामिल हैं। इसके अलावा अदाणी समूह को इन हवाईअड्डों के परिचालन का अधिकार मिलते समय एएआई की तरफ से वहां पर 2,200 करोड़ रुपये से भी अधिक राशि के निर्माण कार्य जारी थे। इनमें गुवाहाटी हवाईअड्डे पर 1,000 करोड़ रुपये की लागत से एयरपोर्ट टर्मिनल की नई इमारत का निर्माण भी शामिल था।

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