स्वर्ग बना नर्क
Uday India Hindi|November 07, 2021
सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण राज्य जम्मू-कश्मीर में एकबार फिर से इस तरह के बन रहे बेहद चिंताजनक हालात देश की एकता, अखंडता व धर्मनिरपेक्षता के लिए किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं हैं। बीते 7 अक्टूबर को भी आतंकियों ने श्रीनगर में दो शिक्षक सपिंदर कौर और दीपक चंद की गोली मारकर हत्या कर दी थी, श्रीनगर शहर का गवर्नमेंट ब्वॉयज सेकेंडरी स्कूल, ईदगाह के सहन इलाके में एक बड़े भूभाग पर बना हुआ है, यह हायर सेकेंडरी स्कूल तीन मंजिला बड़ी इमारत में है, इस के विशाल परिसर में एक बड़ा खेल का मैदान भी बना हुआ है, उसमें घुसकर आतंकियों ने सुबह 11 बजे पहचान पत्र देखकर के ने हिन्दू और सिख शिक्षकों की पहचान करके हत्या कर दी थी, गनीमत यह रही कि उस समय स्कूल में छात्र नहीं थे, सपिंदर कौर स्कूल की प्रिंसिपल थी जबकि दीपक चंद टीचर थे।
नीलाभ कृष्ण

कश्मीर घाटी में हालात खराब होते जा रहे हैं। सेना के भारी पड़ने पर अब आतंकियों ने ऐसे लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है जो सॉफ्ट टारगेट हैं जिन्हें पुलिस या सेना सुरक्षा नहीं दे सकती। ऐसे लोगों में घाटी में रह रहे हिंदू, कश्मीरी पंडित और बाहर से आए लोग शामिल हैं। इस महीने आतंकी 11 आम नागरिकों की हत्या कर चुके हैं, जिनमें से 7 गैर-मुस्लिम हैं। इसके बाद घाटी के लोगों में डर बैठ गया है और पलायन के लिए मजबूर हैं। इन हालातों ने घाटी में एक बार फिर 90 के दशक की याद दिला दी है। तब गैर मुस्लिमों खासकर कश्मीरी पंडितों को रातोंरात घाटी से निकलना पड़ गया था। कश्मीर में जो हो रहा है उसे लेकर पूरा देश गुस्से में है और वो स्वभाविक है। सोचिए जरा..गोलगप्पे वाला, घर बनाने में लगे मजदूर, स्कूल टीचर..जिनसे मिलकर कश्मीरीयत शब्द बनता है। कायर आतंकी अब इन सॉफ्ट टारगेट को निशाना बना रहे। ऐसा नहीं कि जम्मू-कश्मीर में सब बदल गया है लेकिन संपूर्ण बदलाव की निष्ठा जमीन पर दिख रही है। लोग यकीन करें या नहीं लेकिन इसी वजह से आतंकवादी गुस्से में हैं, पाकिस्तान में बैठे उनके हैंडलर आगबबूला हैं। क्योंकि उनका प्लान फेल हो रहा है। कश्मीर के लोग उनका प्लान फेल कर रहे हैं। कश्मीर की अवाम भी भारत के अन्य लोगों की तरह ही आतंकवादियों की इस कायराना हरकत से दुखी है, गुस्से में है क्योंकि वो भी अब विकास के रास्ते पर पूरे हिन्दुस्तान से कंप्टीशन चाहती है। वो भी 24 घंटे बिजली, शानदार सड़कें, हर घर जल से नल, सबको वैक्सीन, सबको रोजगार चाहती है। उसे ये खून-खराबा नहीं चाहिए। लेकिन सवाल उठता है फिर ऐसा हो क्यों रहा? जवाब है..चंद मुट्ठी भर लोगों की हताशा। मुट्ठी भर लोगों की निराशा।

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पिछड़े अति पिछड़े भाजपा के साथ भगोड़े विधान भवन नहीं लौटेंगे

कुछ मंत्री, कुछ विधायक चुनाव घोषणा होते ही भाजपा को छोड़ कर गये। अब सपा का दागदार दामन थाम लिया। भाजपा के ये ये भगोड़े नेता हर चुनाव में मक्खन मलाई खाकर पार्टी बदल लेते हैं। इस बार उनका कहना है कि वे पिछड़ों के लिये पार्टी छोड़कर जा रहे हैं यानि पांच साल ये लोग पिछड़ों के अहित से जुड़े रहे। यह बात उनकी अपनी जाति बिरादरी के लोगों के गले ही नहीं उतर रही तो अन्य समाज के लोगों के गले कैसे उतरेगी।

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Uday India Hindi
January 23, 2022

तीसरी लहर का सामना करने के लिए देश तैयार

"बच्चों का टीकाकरण समय-समय पर केंद्र/राज्य सरकारों के नीति दिशानिर्देशों के अनुसार होना चाहिए। अस्पताल ने 15 से 18 साल के बच्चों का टीकाकरण शुरू कर दिया है। हालांकि, दिल्ली में किए गए पिछले सीरो सर्वेक्षण में 64 प्रतिशत बच्चों की आबादी में कोविड के प्रति एंटीबॉडी विकसित होने की सूचना है। यह दर्शाता है कि पिछले संक्रमणों के दौरान प्राकृतिक प्रतिरक्षा हासिल कर ली गई है। इसलिए, पहले से मौजूद एंटीबॉडी के कारण, बच्चों की आबादी का अच्छा प्रतिशत कोरोना संक्रमण के संपर्क में आने पर भी सुरक्षित रहना चाहिए," यह कहना है डॉ. दीपक शुक्ला, सीइओ, पुष्पावती सिंघानिया रिसर्च इंस्टीट्यूट, का अशोक कुमार से हुई बातचीत में। बातचीत के प्रमुख अंश:

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January 23, 2022

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक भौर नफरत की राजनीति प्रधानमंत्री के खिलाफ रचा गया मृत्युजाल!

पंजाब की यह घटना एक सुनियोजित साजिश है जिसके लिए जिम्मेदार सभी लोगों पर कड़ी कार्यवाही बनती है। नरेंद्र मोदी देश नागरिक नहीं अपितु वह देश के प्रधानमंत्री हैं और जिस राज्य में प्रधानमंत्री की सुरक्षा नहीं हो सकती वहां की आम जनता का क्या हाल हो रहा होगा यह समझा जा सकता है। प्रधानमंत्री के साथ घटित घटना के बाद यह साबित हो गया है कि पंजाब का पूरा प्रशासन तंत्र खालिस्तानी वामपंथियों के शिकंजे में आ चुका है और 5 जनवरी को किसान आंदोलन की आड़ में प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश रची गयी थी और प्रधानमंत्री भगवान भोलेनाथ और मां गंगा की कृपा से सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे हैं।

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January 23, 2022

बज गया बिगुल

कोरोना की चुनौतियां, ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। चुनाव आयोग ने 10 फरवरी से चुनाव की घोषणा की है। जिसमें यूपी में सात चरणों, मणिपुर में दो चरणों में चुनाव होंगे। इसके अलावा पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में एक एक चरण में चुनाव होंगे। चुनाव आयोग द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार इस बार देश के पांच राज्यों में होने वाले चुनाव में 18.3 करोड़ मतदाता चुनाव में मतदान करेंगे।

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January 23, 2022

ओमीकॉन वायरस का सामना करने के लिए आज देश बेहतर तरीके से तैयार है

"सच में, हमारे अस्पतालों ने पहली और दूसरी लहर को संभाला। अब तीसरी लहर है। जब पहली लहर आई तो हम तैयार नहीं थे- हमारे पास पीपीई किट आदि नहीं थे। हमें नहीं पता था कि क्या करना है। अच्छी बात यह थी कि सरकार पूरी स्थिति को सीधे संभाल रही थी और निजी क्षेत्र को दूर रखा गया था। संयोग से, मामलों की संख्या भी कम थी। देश भर में लगाए गए प्रतिबंध बहुत अधिक थे। पहली लहर में होने वाली मौतें दूसरी लहर की तुलना में बहुत कम थीं। जब दूसरी लहर आई तो में हमारे पास सुरक्षात्मक किट थे, लेकिन हम लापरवाह हो गए थे राज्यों और केंद्र के बीच विवाद थे। राज्यों और केंद्र के बीच इस विवाद में व्यवस्थाओं का अभाव रहा," यह कहना है डॉ. विनय अग्रवाल, चेयरमैन, पुष्पांजलि क्रॉसले हॉस्पीटल, का अशोक कुमार से हुई बातचीत में। बातचीत के प्रमुख अंश:

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January 23, 2022

डबल तड़का

फिल्म-जगत की खबरे

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January 23, 2022

चौमुखी चुनौतियों के चक्रव्यूह में उत्तर प्रदेश के चुनाव

आवरण कथा

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January 23, 2022

ओमीक्रोन संक्रमण की सुनामी के रूबरू सांस रोके खड़ा देश

टीकाकरण थामेगा बेहद तेजी से फैल रहे नए वैरियेंट की नकेल

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January 23, 2022

उत्तर प्रदेश योगी ही एकमात्र मुद्दा

चुनाव के दौरान योगी का मुद्दा

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Uday India Hindi
January 23, 2022

संकट ही नहीं हर्ष भी देकर गया बीता साल

इक्कीसवीं सदी के इक्कीसवें वर्ष को अलविदा कहते हुए नए वर्ष का स्वागत हम इस सोच और संकल्प के साथ करें कि हमें कुछ नया करना है, नया बनना है, नये पदचिह्न स्थापित करने हैं। बीते वर्ष की कोरोना महामारी के अलावा मौसमी आपदाओं, आर्थिक असंतुलन, राजनीतिक उठापटक, बर्फीले तूफान, समुद्री चक्रवात, बाढ़ और जंगलों के राख होने एवं धरती के तापमान के बढ़ने की पीड़ाओं, दर्द एवं प्रकोप पर नजर रखते हुए उन पर नियंत्रण पाने का संकल्प लेना है। हमें यह संकल्प करना और शपथ लेनी है कि आने वाले वर्ष में हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे जो हमारे उद्देश्यों, उम्मीदों, उमंगों और आदर्शों पर प्रश्नचिह्न लगा दे। कोरोना महामारी की तीसरी लहर यानी ओमीक्रोन की आहट के बीच हमें नये साल में अपनी जीवनशैली को नया रंग और आकार देना है।

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Uday India Hindi
January 09, 2022
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August 23, 2021

GLOBAL TECH GIANTS THREATEN TO LEAVE PAKISTAN OVER NEW RULES

Internet and technology companies have threatened to leave Pakistan after the government granted blanket powers to authorities to censor digital content, a move critics say was aimed at curtailing freedom of expression in the conservative Islamic nation.

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AppleMagazine #474

ACTIVISM

MARYAM and NIVAAL REHMAN became activists when they were eight years old, inspiring girls in their village in Pakistan to continue their education. The now 19-year-old twins have since worked for such causes as girls’ education, climate justice, gender equality and inclusivity. They have their own non-profit, The World With MNR, that uses advocacy, storytelling and development to take action and inspire others to do the same. They have used their social media and YouTube channels to cover several events, including the Social Good Summit in New York City, the Girl Up Leadership Summit in Washington D.C., and interviews with Canadian Prime Minister Justin Trudeau, Nobel Prize laureate Malala Yousafzai, and Madame Christine Lagarde, President of the European Central Bank. They have received several awards, including the Governor General’s Caring Canadian Award. Recently they released a documentary on the status of girls’ education in Pakistan and held global screenings to spark further conversation and inspire action.

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November 2020

EXILE IN THE AGE OF MODI

How Hindu nationalism has trampled the founding idea of my country

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Transitioning to EV is the way to go - If we'll do it is another question entirely

Pakistan has been proactive in forming an EV policy and has gotten much acclaim for it. But does the government have plans beyond just saving the environment, and will they be able to pull it off?

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