भारतीय विधार्थियों की विदेश में शिक्षा का मोह : एक चिंता का विषय
Uday India Hindi|November 07, 2021
भारत से सबसे अधिक विद्यार्थी अमेरिका (30 प्रतिशत), ऑस्ट्रेलिया (10 प्रतिशत), कनाडा (9 प्रतिशत) एवं ब्रिटेन (6 प्रतिशत) आदि विकसित देशों को जाते हैं। और तो और अब भारतीय विद्यार्थी चीन, सिंगापुर, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, संयुक्त अरब अमीरात, कतर आदि देशों को भी जा रहे हैं।
प्रो. तेज प्रताप सिंह

एक समय था जब सम्पूर्ण विश्व से लोग उच्च शिक्षा के लिए भारतवर्ष आते थे। भारत ज्ञान-विज्ञान का वैश्विक केंद्र था। भारत प्राचीन काल में विश्व में उच्च शिक्षा के लिए जाना जाता था। तक्षशिला, नालन्दा, विक्रमशिला, वल्लभी, पुष्पगिरी आदि शिक्षा के प्रमुख केंद्र थे। उड़ीसा में स्थित पुष्पगिरी को विश्व के प्राचीनतम विश्वविद्यालय की संज्ञा दी जाती है। पूरे विश्व से विद्यार्थी धर्म, दर्शन, विज्ञान आदि की शिक्षा के लिए भारतवर्ष आया करते थे। इन्ही विश्वविद्यालयों के कारण ही भारत को विश्व गुरु की संज्ञा दी गई थी। भारतीय संस्कृत का ध्वज इन्ही विश्वविद्यालयों के कारण ही पूरे विश्व में लहरा रहा था। भारतवर्ष उस समय उच्च शिक्षा का वैश्विक केंद्र था।

जब हम वर्तमान समय में उच्च शिक्षा की दयनीय स्थिति देखते है तो दुःख होता है की हम कहां से कहां आ गए हैं। आज भारत विश्व में विद्यार्थी बाहर पढ़ने हेतु भेजने के लिए जाना जाता है न की विदेश से विद्यार्थियों को शिक्षा हेतु भारत आकर्षित करने के लिए।

उच्च शिक्षा हेतु बाहर विद्यार्थी भेजने में भारत का चीन के बाद दूसरा स्थान है। एक तरफ 10 लाख से भी अधिक भारतीय विधार्थी विदेशों में पढ़ रहे हैं (विदेश मंत्रालय 2021) और दूसरी तरफ पचास हजार से भी कम विदेशी भारत पढ़ने आते हैं। 2019-20 में AISHE के अनुसार केवल 49348 विदेशी विद्यार्थी ही भारत में पढ़ रहे हैं। भारतीय विद्यार्थियों के विदेश में पढ़ने से काफी अधिक मात्रा में विदेशी मुद्रा का भी भारत से पलायन होता है जो अर्थव्यवस्था पर भी बुरा प्रभाव डालता है। इस वर्ष केवल एक महीने अगस्त 2021 में 1.8 खरब डॉलर भारत से विदेशी मुद्रा विदेश गई, जो अब तक का एक महीने का रिकार्ड है और इसमें सबसे ज्यादा हिस्सा भारतीय विद्यार्थियों द्वारा विदेश में फीस एवं अपने रहन सहन पर खर्च किया गया (Indian Express 21 October) इस पैसे को यदि भारत में व्यय किया जाता तो निश्चित रूप से यह हमारे यहां रोजगार के अवसर उत्पन्न करता और अर्थव्यवस्था के विकास में सहायक होता।

भारत से सबसे अधिक विद्यार्थी अमेरिका (30 प्रतिशत), ऑस्ट्रेलिया (10 प्रतिशत), कनाडा (9 प्रतिशत) एवं ब्रिटेन (6 प्रतिशत) आदि विकसित देशों को जाते हैं। और तो और अब भारतीय विद्यार्थी चीन, सिंगापुर, मलेशिया, दक्षिण कोरीया, संयुक्त अरब अमीरात, कतर आदि देशों को भी जा रहे हैं।

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