ममता बनर्जी का मिशन गोवाःशह या मात ?
Uday India Hindi|November 07, 2021
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मिशन-गोवा कितना कामयाब हो पाएगा, यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा ही, मगर इतना जरूर है कि ममता में एक जुनून दिव रहा है। बंगाल में तीसरी बार सत्ता हासिल करने के बाद त्रिपुरा और गोवा पर उनकी पैनी नजर है। इन्हीं बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा है इस आलेख में।
संजय सिन्हा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब राष्ट्रीय राजनीति में आने की जद्दोजहद में लगी हैं। बंगाल की सत्ता पर तीसरी बार काबिज होने के बाद त्रिपुरा और गोवा पर उनकी निगाह है। आपको बता दूं कि गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के विधायक लुइजिन्हो फलेरियो ने कोलकाता पहुंचकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। सीएम ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद लुइजिन्हो तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। लुइजिन्हों के साथ नौ अन्य नेताओं ने भी टीएमसी का दामन थाम लिया था। तब ऐसे कयास लगाए जाने लगे थे कि क्या टीएमसी की नजर लुइजिन्हों के सहारे गोवा में पार्टी के विस्तार पर है। अब तस्वीर करीब-करीब साफ हो चुकी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद गोवा के दौरे पर जा रही हैं। ममता बनर्जी 28 अक्टूबर को गोवा पहुंचेंगी। ममता बनर्जी ने 28 अक्टूबर से शुरू हो रहे गोवा दौरे से पहले ट्वीट कर अपने इरादे जाहिर कर दिए। टीएमसी सुप्रीमो ने कहा है कि 28 अक्टूबर से अपनी पहली गोवा यात्रा की तैयारी करते हुए मैं सभी से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उसके विभाजनकारी एजेंडे को हराने के लिए एकजुट होने का आह्वान करती हूं।

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पिछड़े अति पिछड़े भाजपा के साथ भगोड़े विधान भवन नहीं लौटेंगे

कुछ मंत्री, कुछ विधायक चुनाव घोषणा होते ही भाजपा को छोड़ कर गये। अब सपा का दागदार दामन थाम लिया। भाजपा के ये ये भगोड़े नेता हर चुनाव में मक्खन मलाई खाकर पार्टी बदल लेते हैं। इस बार उनका कहना है कि वे पिछड़ों के लिये पार्टी छोड़कर जा रहे हैं यानि पांच साल ये लोग पिछड़ों के अहित से जुड़े रहे। यह बात उनकी अपनी जाति बिरादरी के लोगों के गले ही नहीं उतर रही तो अन्य समाज के लोगों के गले कैसे उतरेगी।

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Uday India Hindi
January 23, 2022

तीसरी लहर का सामना करने के लिए देश तैयार

"बच्चों का टीकाकरण समय-समय पर केंद्र/राज्य सरकारों के नीति दिशानिर्देशों के अनुसार होना चाहिए। अस्पताल ने 15 से 18 साल के बच्चों का टीकाकरण शुरू कर दिया है। हालांकि, दिल्ली में किए गए पिछले सीरो सर्वेक्षण में 64 प्रतिशत बच्चों की आबादी में कोविड के प्रति एंटीबॉडी विकसित होने की सूचना है। यह दर्शाता है कि पिछले संक्रमणों के दौरान प्राकृतिक प्रतिरक्षा हासिल कर ली गई है। इसलिए, पहले से मौजूद एंटीबॉडी के कारण, बच्चों की आबादी का अच्छा प्रतिशत कोरोना संक्रमण के संपर्क में आने पर भी सुरक्षित रहना चाहिए," यह कहना है डॉ. दीपक शुक्ला, सीइओ, पुष्पावती सिंघानिया रिसर्च इंस्टीट्यूट, का अशोक कुमार से हुई बातचीत में। बातचीत के प्रमुख अंश:

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January 23, 2022

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक भौर नफरत की राजनीति प्रधानमंत्री के खिलाफ रचा गया मृत्युजाल!

पंजाब की यह घटना एक सुनियोजित साजिश है जिसके लिए जिम्मेदार सभी लोगों पर कड़ी कार्यवाही बनती है। नरेंद्र मोदी देश नागरिक नहीं अपितु वह देश के प्रधानमंत्री हैं और जिस राज्य में प्रधानमंत्री की सुरक्षा नहीं हो सकती वहां की आम जनता का क्या हाल हो रहा होगा यह समझा जा सकता है। प्रधानमंत्री के साथ घटित घटना के बाद यह साबित हो गया है कि पंजाब का पूरा प्रशासन तंत्र खालिस्तानी वामपंथियों के शिकंजे में आ चुका है और 5 जनवरी को किसान आंदोलन की आड़ में प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश रची गयी थी और प्रधानमंत्री भगवान भोलेनाथ और मां गंगा की कृपा से सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे हैं।

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January 23, 2022

बज गया बिगुल

कोरोना की चुनौतियां, ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। चुनाव आयोग ने 10 फरवरी से चुनाव की घोषणा की है। जिसमें यूपी में सात चरणों, मणिपुर में दो चरणों में चुनाव होंगे। इसके अलावा पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में एक एक चरण में चुनाव होंगे। चुनाव आयोग द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार इस बार देश के पांच राज्यों में होने वाले चुनाव में 18.3 करोड़ मतदाता चुनाव में मतदान करेंगे।

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January 23, 2022

ओमीकॉन वायरस का सामना करने के लिए आज देश बेहतर तरीके से तैयार है

"सच में, हमारे अस्पतालों ने पहली और दूसरी लहर को संभाला। अब तीसरी लहर है। जब पहली लहर आई तो हम तैयार नहीं थे- हमारे पास पीपीई किट आदि नहीं थे। हमें नहीं पता था कि क्या करना है। अच्छी बात यह थी कि सरकार पूरी स्थिति को सीधे संभाल रही थी और निजी क्षेत्र को दूर रखा गया था। संयोग से, मामलों की संख्या भी कम थी। देश भर में लगाए गए प्रतिबंध बहुत अधिक थे। पहली लहर में होने वाली मौतें दूसरी लहर की तुलना में बहुत कम थीं। जब दूसरी लहर आई तो में हमारे पास सुरक्षात्मक किट थे, लेकिन हम लापरवाह हो गए थे राज्यों और केंद्र के बीच विवाद थे। राज्यों और केंद्र के बीच इस विवाद में व्यवस्थाओं का अभाव रहा," यह कहना है डॉ. विनय अग्रवाल, चेयरमैन, पुष्पांजलि क्रॉसले हॉस्पीटल, का अशोक कुमार से हुई बातचीत में। बातचीत के प्रमुख अंश:

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Uday India Hindi
January 23, 2022

डबल तड़का

फिल्म-जगत की खबरे

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January 23, 2022

चौमुखी चुनौतियों के चक्रव्यूह में उत्तर प्रदेश के चुनाव

आवरण कथा

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January 23, 2022

ओमीक्रोन संक्रमण की सुनामी के रूबरू सांस रोके खड़ा देश

टीकाकरण थामेगा बेहद तेजी से फैल रहे नए वैरियेंट की नकेल

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January 23, 2022

उत्तर प्रदेश योगी ही एकमात्र मुद्दा

चुनाव के दौरान योगी का मुद्दा

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Uday India Hindi
January 23, 2022

संकट ही नहीं हर्ष भी देकर गया बीता साल

इक्कीसवीं सदी के इक्कीसवें वर्ष को अलविदा कहते हुए नए वर्ष का स्वागत हम इस सोच और संकल्प के साथ करें कि हमें कुछ नया करना है, नया बनना है, नये पदचिह्न स्थापित करने हैं। बीते वर्ष की कोरोना महामारी के अलावा मौसमी आपदाओं, आर्थिक असंतुलन, राजनीतिक उठापटक, बर्फीले तूफान, समुद्री चक्रवात, बाढ़ और जंगलों के राख होने एवं धरती के तापमान के बढ़ने की पीड़ाओं, दर्द एवं प्रकोप पर नजर रखते हुए उन पर नियंत्रण पाने का संकल्प लेना है। हमें यह संकल्प करना और शपथ लेनी है कि आने वाले वर्ष में हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे जो हमारे उद्देश्यों, उम्मीदों, उमंगों और आदर्शों पर प्रश्नचिह्न लगा दे। कोरोना महामारी की तीसरी लहर यानी ओमीक्रोन की आहट के बीच हमें नये साल में अपनी जीवनशैली को नया रंग और आकार देना है।

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Uday India Hindi
January 09, 2022