भारत के पड़ोस में एक और संभावित तालिबान
Uday India Hindi|November 07, 2021
लज्जा उपन्यास लिखकर गहरे विवादों में आई तस्लीमा नसरीन यदि कह रही हैं कि बांग्लादेश अब जेहादी स्तान बनता जा रहा है तो इस टिप्पणी महज कागजी भरपाई मानकर नहीं चला जा सकता। वजह है तस्लीमा लज्जा उपन्यास के कारण अपने ही वतन बांग्लादेश से अभी तक निर्वासन भोग रही हैं। तस्लीमा ने यह भी कहा है कि शेख हसीना बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को मुमकिन है अपने राजनीतिक फायदों के लिए मुहैया नहीं करा रही हैं।
नवीन जैन

हदें पार कर देना कहेंगे इसे। यूं 1971 में भारत की गोद में जन्म लेने वाले बांग्लादेश में हिंदू तीज त्योहारों पर हिंदुओं के मंदिर, पूजा स्थलों, घरों और उन पर हिंसक हमले आम बातें रही हैं, लेकिन उक्त देश से निकली खबरों में यह दुर्दात जानकारी तक दी जा रही है कि इस बार तो वहां छोटी-छोटी बच्चियों से जबरदस्ती तक की गई। इस वर्ष जैसे ही दुर्गा पूजा का उत्सव मनना प्रारम्भ हुआ उक्त सभी घटनाएं ही नहीं हुई, बल्कि कुछ हिंदुओं की हत्या भी कर दी गई। आगजनी की खबरें तो अब भी आ रही हैं।

इन सबके पीछे कदाचित पहली बार यह हौलनाक अफवाह फैला दी गई कि हिंदुओं ने मुसलमानों के पवित्र धर्म ग्रन्थ कुरान-एशरीफ की बेअदबी की। कितनी भी गिरी हुई सोच वाला व्यक्ति क्यों न हो, कभी और किसी भी कीमत पर यह मानने को तैयार होगा कि हिंदुओं की मानसिकता और सोच इतनी लीचड़ होने के साथ इतनी घटिया है कि वे किसी भी सम्प्रदाय के पवित्र धर्म ग्रन्थ का अपमान करने की धृष्टता करें। और वह उस देश में जहां उनकी (हिंदुओं) की जनसंख्या 13.5 से हटकर सिर्फ 8.5 प्रतिशत रह गई हो।

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पिछड़े अति पिछड़े भाजपा के साथ भगोड़े विधान भवन नहीं लौटेंगे

कुछ मंत्री, कुछ विधायक चुनाव घोषणा होते ही भाजपा को छोड़ कर गये। अब सपा का दागदार दामन थाम लिया। भाजपा के ये ये भगोड़े नेता हर चुनाव में मक्खन मलाई खाकर पार्टी बदल लेते हैं। इस बार उनका कहना है कि वे पिछड़ों के लिये पार्टी छोड़कर जा रहे हैं यानि पांच साल ये लोग पिछड़ों के अहित से जुड़े रहे। यह बात उनकी अपनी जाति बिरादरी के लोगों के गले ही नहीं उतर रही तो अन्य समाज के लोगों के गले कैसे उतरेगी।

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January 23, 2022

तीसरी लहर का सामना करने के लिए देश तैयार

"बच्चों का टीकाकरण समय-समय पर केंद्र/राज्य सरकारों के नीति दिशानिर्देशों के अनुसार होना चाहिए। अस्पताल ने 15 से 18 साल के बच्चों का टीकाकरण शुरू कर दिया है। हालांकि, दिल्ली में किए गए पिछले सीरो सर्वेक्षण में 64 प्रतिशत बच्चों की आबादी में कोविड के प्रति एंटीबॉडी विकसित होने की सूचना है। यह दर्शाता है कि पिछले संक्रमणों के दौरान प्राकृतिक प्रतिरक्षा हासिल कर ली गई है। इसलिए, पहले से मौजूद एंटीबॉडी के कारण, बच्चों की आबादी का अच्छा प्रतिशत कोरोना संक्रमण के संपर्क में आने पर भी सुरक्षित रहना चाहिए," यह कहना है डॉ. दीपक शुक्ला, सीइओ, पुष्पावती सिंघानिया रिसर्च इंस्टीट्यूट, का अशोक कुमार से हुई बातचीत में। बातचीत के प्रमुख अंश:

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January 23, 2022

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक भौर नफरत की राजनीति प्रधानमंत्री के खिलाफ रचा गया मृत्युजाल!

पंजाब की यह घटना एक सुनियोजित साजिश है जिसके लिए जिम्मेदार सभी लोगों पर कड़ी कार्यवाही बनती है। नरेंद्र मोदी देश नागरिक नहीं अपितु वह देश के प्रधानमंत्री हैं और जिस राज्य में प्रधानमंत्री की सुरक्षा नहीं हो सकती वहां की आम जनता का क्या हाल हो रहा होगा यह समझा जा सकता है। प्रधानमंत्री के साथ घटित घटना के बाद यह साबित हो गया है कि पंजाब का पूरा प्रशासन तंत्र खालिस्तानी वामपंथियों के शिकंजे में आ चुका है और 5 जनवरी को किसान आंदोलन की आड़ में प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश रची गयी थी और प्रधानमंत्री भगवान भोलेनाथ और मां गंगा की कृपा से सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे हैं।

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January 23, 2022

बज गया बिगुल

कोरोना की चुनौतियां, ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। चुनाव आयोग ने 10 फरवरी से चुनाव की घोषणा की है। जिसमें यूपी में सात चरणों, मणिपुर में दो चरणों में चुनाव होंगे। इसके अलावा पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में एक एक चरण में चुनाव होंगे। चुनाव आयोग द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार इस बार देश के पांच राज्यों में होने वाले चुनाव में 18.3 करोड़ मतदाता चुनाव में मतदान करेंगे।

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ओमीकॉन वायरस का सामना करने के लिए आज देश बेहतर तरीके से तैयार है

"सच में, हमारे अस्पतालों ने पहली और दूसरी लहर को संभाला। अब तीसरी लहर है। जब पहली लहर आई तो हम तैयार नहीं थे- हमारे पास पीपीई किट आदि नहीं थे। हमें नहीं पता था कि क्या करना है। अच्छी बात यह थी कि सरकार पूरी स्थिति को सीधे संभाल रही थी और निजी क्षेत्र को दूर रखा गया था। संयोग से, मामलों की संख्या भी कम थी। देश भर में लगाए गए प्रतिबंध बहुत अधिक थे। पहली लहर में होने वाली मौतें दूसरी लहर की तुलना में बहुत कम थीं। जब दूसरी लहर आई तो में हमारे पास सुरक्षात्मक किट थे, लेकिन हम लापरवाह हो गए थे राज्यों और केंद्र के बीच विवाद थे। राज्यों और केंद्र के बीच इस विवाद में व्यवस्थाओं का अभाव रहा," यह कहना है डॉ. विनय अग्रवाल, चेयरमैन, पुष्पांजलि क्रॉसले हॉस्पीटल, का अशोक कुमार से हुई बातचीत में। बातचीत के प्रमुख अंश:

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January 23, 2022

डबल तड़का

फिल्म-जगत की खबरे

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चौमुखी चुनौतियों के चक्रव्यूह में उत्तर प्रदेश के चुनाव

आवरण कथा

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January 23, 2022

उत्तर प्रदेश योगी ही एकमात्र मुद्दा

चुनाव के दौरान योगी का मुद्दा

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संकट ही नहीं हर्ष भी देकर गया बीता साल

इक्कीसवीं सदी के इक्कीसवें वर्ष को अलविदा कहते हुए नए वर्ष का स्वागत हम इस सोच और संकल्प के साथ करें कि हमें कुछ नया करना है, नया बनना है, नये पदचिह्न स्थापित करने हैं। बीते वर्ष की कोरोना महामारी के अलावा मौसमी आपदाओं, आर्थिक असंतुलन, राजनीतिक उठापटक, बर्फीले तूफान, समुद्री चक्रवात, बाढ़ और जंगलों के राख होने एवं धरती के तापमान के बढ़ने की पीड़ाओं, दर्द एवं प्रकोप पर नजर रखते हुए उन पर नियंत्रण पाने का संकल्प लेना है। हमें यह संकल्प करना और शपथ लेनी है कि आने वाले वर्ष में हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे जो हमारे उद्देश्यों, उम्मीदों, उमंगों और आदर्शों पर प्रश्नचिह्न लगा दे। कोरोना महामारी की तीसरी लहर यानी ओमीक्रोन की आहट के बीच हमें नये साल में अपनी जीवनशैली को नया रंग और आकार देना है।

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January 09, 2022