नैरेटिव की लड़ाई से कांग्रेस को आगे बढ़ना होगा
Uday India Hindi|October 17, 2021
जब भी चुनाव आते हैं, देश की सबसे पुरानी पार्टी के शुभचिंतक उसके उभार की भविष्यवाणियां करने लगते हैं। लंबे समय तक की सत्ता के दम पर कांग्रेस ने बौद्धिक और पत्रकारीय दुनिया में एक ऐसा समर्थक वर्ग जरूर बना रखा है, जो कांग्रेस के पहले परिवार के हर कदम पर मर मिटता है।
उमेश चतुर्वेदी

कांग्रेस के पहले परिवार के सदस्यों के हर कदम उस वर्ग को 'भूतो न भविष्यति' जैसे लगने लगते हैं। कांग्रेस के प्रथम परिवार के सदस्य जब ऐन चुनावों के पहले मंदिरों का दौरा करने लगते हैं तो उसे हिंदुत्व का असल नायक बताया जाने लगता है। लेकिन अगले चुनाव में परिवार का सदस्य जब अल्पसंख्यकविशेषकर मुस्लिम वर्ग की हिमायत करने लगता है तो कांग्रेस के समर्थक बौद्धिक वर्ग की नजर में देश में स्थापित नेहरूवादी सेकुलर मॉडल की ना सिर्फ प्रतिष्ठा होने लगती है, बल्कि वह कदम उससे भी एक कदम आगे निकलता लगता है। कांग्रेस के प्रथम परिवार के सदस्य जब भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों में किसी घटना या हादसे में पीड़ित परिवार को गले लगा लेता है तो उससे कांग्रेस के समर्थक वर्ग की दृष्टि विकसित होने लगती है। गले लगाने के फोटो देखकर उसके समर्थकों को पत्रकारिता का मशहूर वाक्य याद आने लगता है, 'एक चित्र हजार शब्दों पर भारी पड़ता है।'

दरअसल आज कांग्रेस का सबसे बड़ा संकट यह है कि वह नैरेटिव की लड़ाई लड़ रही है। इस लड़ाई के पीछे कांग्रेस के प्रथम परिवार के सलाहकार मंडल में शामिल वामपंथी विचारधारा के लोगों का बड़ा हाथ है। जिस भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस अपने समर्थक आधार, बौद्धिक समर्थक परिवार और अपने राजनीतिक हथकंडों से अछूत-सा बनाए रखने की लगातार कोशिश करती रही, वही अब उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। भारतीय जनता पार्टी का उसकी बड़ी चुनौती बनना यह साबित करने के लिए काफी है कि कांग्रेस जिस राह पर चलती रही है, जो उपक्रम वह करती रही है, अपने विशाल बौद्धिक समर्थक वर्ग के सहारे नैरेटिव रचती रही है, उसकी पोल-पट्टी आज के भारतीय मतदाता के समक्ष खुल चुकी है। इसीलिए जब राहुल गांधी मंदिरों की यात्रा करते हैं, जब वे खुद को दत्तात्रेय गोत्र का बताते हैं तो उनका भारतीय जनमानस के बड़े वर्ग में उपहास उड़ाया जाता है। राहुल के ये कदम विश्वसनीयता हासिल नहीं कर पाते, इसलिए चुनावी राजनीति में कांग्रेस ज्यादातर मौकों पर मात खा जाती है।

कांग्रेस का गठन चूंकि अंग्रेजी साम्राज्यवाद को लोक आधार देने के लिए हुआ था। इसलिए आप देखेंगे कि उसके शुरूआती कुछ सालों तक कांग्रेस में वे ही लोग प्रभावी थे, जो उस दौर के खाए-अघाए परिवारों से थे। एक तरह से कह सकते हैं कि उस कांग्रेस में तत्कालीन भारतीय समाज का अभिजात्य वर्ग ज्यादा सक्रिय था। आम लोगों की भूमिका ज्यादातर दरी-जाजिम बिछाने की रही। बाद में तिलक के उभार के बाद कांग्रेस के चरित्र में बदलाव होना शुरू होता है। लेकिन तिलक की पूरी कोशिश के बावजूद कांग्रेस अपनी अभिजात्य संस्कृति से उबर नहीं पाती। उसी कांग्रेस को गांधी लोक की कांग्रेस बनाने में सफल रहे। गांधी ने रणनीतिक रूप से कांग्रेस को बदला, उसमें आम भागीदारी बढ़ी, आम लोगों के सवाल उठे।

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वर्चुअल ऑटिज्म मोबाइल जनित मानसिक विकार

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बहुत से कांग्रेसी ऐसे हैं जो सचमुच विचारधारा के कारण कांग्रेस के भीतर हैं। यह विचारधारा कितनी प्रासंगिक है और कितनी नहीं यह विवाद का विषय हो सकता है। ऐसे कांग्रेसी अपनी वैचारिक आस्था के कारण पार्टी छोड़ कर दूसरी राजनीतिक दलों में भी नहीं जा सकते हैं। लेकिन सोनिया परिवार के व्यक्तिगत हितों के लिए सम्पूर्ण पार्टी के दुरुपयोग को देखते हुए, उनके लिए पार्टी के भीतर रहना भी कठिन होता जा रहा था। ममता बनर्जी ने इस प्रकार के कांग्रेस-जनों के लिए अपना दरवाजा यह कह कर खोल दिया है कि तृणमूल कांग्रेस ही वास्तव में कांग्रेस की विरासत की उत्तराधिकारी है।

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December 12, 2021

स्वच्छता में नम्बर वन इन्दौर

21 नवंबर की सुबह इन्दौरवासियों के लिए कुछ ज्यादा ही इतराई, इठलाई हुई, शोख, गुलाबी और हसीन थी। इस दिन की बीती हुई रात को लोगों ने एक तरह से रतजगा किया था। इंतजार था तो बस रोज आने वाले मेहमान का जो इस सुबह एक तोहफा देने आने वाला था। यह मेहमान यानी शहर के सभी दैनिक। हॉकर्स ने जैसे ही आंगन या बॉलकनी में अखबार फेंके, पाठकों की नजरें निहाल हो उठीं। अखबार के लिए घरों में छीना झपटी मच गई। लोगों के चेहरों पर फिर से हाल में गुजरी हुई दीपावली झिलमिला गई। लगा जैसे लगभग बत्तीस लाख वाली आबादी ने कोई छोटा मोटा महायुद्ध जीत लिया हो। बधाइयों के लिए लगभग सभी मोबाइल उठाए गए लेकिन एक ही कैसेट सुनाई पड़ी ---सभी लाइने अभी व्यस्त है ...! राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सम्मान स्वीकार करने वाले प्रदेश के काबीना मंत्री भूपेन्द्र सिंह के साथ गए अन्य वरिष्ठ जनों को एक निराली अदा में शाबाशी दी। उन्होंने कहा नम्बर वन तो कोई भी आ सकता है लेकिन इन्दौर ने लगातार पांचवी बार अव्वल रहकर जो कीर्तिमान अर्जित किया है वह अद्भुत है। इन्दौर को फाइव स्टार सिटी और सफाई मित्र का रूपए 12 करोड़ का अवार्ड भी मिला।

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December 12, 2021

बिहार में शराबबंदी की फजीहत

30 नवम्बर को विधानसभा परिसर में शराब की खाली बोतल मिलने के बाद दरभंगा समाहरणालय के परिसर में शुक्रवार को भी शराब की दर्जनों बोतलें मिली। मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, अधिकारी, मातहत आये दिन उस जगह पर बैठक करते हैं। उसी के सामने शराब की बोतलें मिलना बिहार में पूर्ण रूप से शराबबंदी के दावो पर सवाल उठाता है। इसी मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने है। भाजपा और जदयु जहां राष्ट्रीय जनता दल के साजिश बता रहे हैं। वहीं तेजस्वी यादव शराबबंदी को एक सिंडीकेट के जरिए शराब की तस्करी करने का आरोप लगा रहे हैं। जबकि शराब माफियाओं के तार पड़ोसी देश नेपाल और पूर्वोत्तर राज्यों से जुडे हुए हैं। वहीं कभी ग्रामीण क्षेत्रों में शराब के खिलाफ नक्सलियों के आंदोलन अब कुंद पड़ गई है। जहां निर्वाध रूप से इसके निर्माण बिहार और झारखंड से सटे इलाके में हो रहे हैं।

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December 12, 2021

भाजपा की यात्राओं से बढ़ेगा प्रदेश में राजनैतिक तापमान?

2017 में जब विधानसभा चुनाव हुए उस समय केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बन चुकी थी और प्रदेश में समाजवादी पार्टी, सरकार के खिलाफ जनमानस में एक आक्रोश उबल रहा था जिसका लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिला लेकिन अब भाजपा सरकार का कार्यकाल करीब-करीब पूरा हो चुका है और बीजेपी अपने दूसरे कार्यकाल के लिए जनता से आशीर्वाद मांगने निकल पड़ी है।

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December 12, 2021

ममता की ममता के सहारे विपक्ष

टीएमसी को पश्चिम बंगाल में जीत दिलाने में कामयाब रहीं ममता बनर्जी भले ही खुद अपना चुनाव नंदीग्राम से हार गई हैं, लेकिन विपक्ष अब उन्हीं में अपना सहारा ढूंढ रहा है। कांग्रेस धीरे-धीरे खात्मे की ओर है, ऐसे में भला विपक्ष ममता के अलावा आस भी किससे लगाए। मिशन 2024 के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ साझा विपक्ष के नेतृत्व को लेकर घमासान की स्थिति बनने लगी है। ममता बनर्जी ने अब खुले तौर पर घोषणा कर दी है कि साझा विपक्ष का नेतृत्व अब वो ही करेंगी। तृणमूल कांग्रेस ने बता दिया है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ विकल्प के रूप में उभरने में नाकाम रहे हैं। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के साझा विपक्ष की तैयारियों में जुटी तृणमूल कांग्रेस ने अपने बंगाली मुखपत्र 'जागो बांग्ला' में 'राहुल गांधी विफल, ममता हैं विकल्प' के हेडिंग से एक लेख के सहारे कांग्रेस सांसद की उन सभी कोशिशों को कमतर बताया, जो वह भाजपा के खिलाफ नेतृत्व की कमान पाने के लिए कर रहे हैं। वैसे, टाइम मैग्जीन की साल 2021 के 100 प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ममता बनर्जी का नाम शामिल होने के बाद तृणमूल कांग्रेस का उत्साहित होना सही है। लेकिन, इस स्थिति में सवाल उठना लाजिमी है कि साझा विपक्ष के नेतृत्व पर ममता ने दावा तो ठोंक दिया, लेकिन क्या ऐसा हो पायेगा?

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December 12, 2021

एस-400 भारतका नया रक्षा कवच

अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश है, लेकिन दुनिया को सबसे घातक हथियार देने वाला अमेरिका भी एक ब्रह्मास्त्र से खौफ खाता है। वो है रूस का एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम। पुतिन का ये हथियार तुर्की ने लिया तो अमेरिका ने उस पर कई तरह के बैन लगा दिए। भारत ने रूस से एस-400 खरीदने की डील साइन की तो अमेरिका का पारा हाई हो गया। असल में एस-400 की तैनाती का मतलब है, देश की सुरक्षा की गारंटी और इस मिसाइल के प्रहार का मतलब है, आसमान में अभेद्य कवच। दुश्मन के पास कितनी भी ताकतवर मिसाइल हो, कैसा भी फाइटर जेट हो, सीक्रेट तरीके से घुसपैठ करने वाला ड्रोन हो, एस-400 के रहते वो सरहद क्रास नहीं कर सकता।

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December 12, 2021

फ्यूजन इग्निशन द्वारा असीमित स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन

इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर का उद्देश्य ऊर्जा के व्यापक और कार्बनमुक्त स्रोत के रूप में 'नाभिकीय संलयन की व्यवहार्यता को साबित करने के लिये दुनिया के सबसे बड़े टोकामक का निर्माण करना है। इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर के सदस्यों में चीन, यूरोपीय संघ, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। चीन द्वारा डिजाइन किया गया ‘प्रायोगिक उन्नत सुपरकंडक्टिंग टोकामक' उपकरण सूर्य द्वारा किये गए परमाणु संलयन प्रक्रिया के समान प्रक्रिया का संचालन करता है।

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December 12, 2021

अभद्र आचरण की निलंबन कार्रवाई गलत कैसे?

संसद के शीतकालीन सत्र की शुरूआत जिस रंजिश भरे माहौल में हुई है उसे लोकतन्त्र के लिए किसी भी दृष्टि से शुभ एवं श्रेयष्कर नहीं कहा जा सकता। संसद के शीतकालीन सत्र में राज्यसभा में अशोभनीय आचरण, हिंसा एवं अशालीनता करने के आरोप में 12 सांसदों का निलंबन लोकतंत्र की लगातार गिरती साख को बचाने की दिशा में एक सार्थक एवं सराहनीय कदम है। विपक्षी दल जिस तरह से इस निलंबन का बचाव कर रहे हैं, उससे वे न केवल अपना नुकसान कर रहे हैं बल्कि लोकतंत्र को भी कमजोर बना रहे हैं। विपक्षी दल निलंबित सांसदों के बचाव में जैसी खोखली दलीलें दे रहे हैं, जिन भ्रामकता से गलत को सही ठहराने का प्रयास कर रहे हैं, उससे वे अभद्रता की पैरवी करते हुए भी दिखने लगे हैं। इस प्रकरण ने यह सवाल खड़ा भी किया है कि देश को अनुशासित करने एवं नियमों में बांधने वाली संसद में अनुशासनहीनता, हिंसा एवं अराजकता पर होने वाली कार्रवाही इतनी कड़वी क्यों लगती है? जो संसद देश चलाने के लिए नियमकायदे बनाने की जगह है, वह लगातार बाधित क्यों चल रही है?

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December 12, 2021