अधिकार असीमित नहीं हो सकते
Uday India Hindi|October 17, 2021
कहने को भारत एक ऐसा देश है जो संविधान से चलता है लेकिन जब देश के सुप्रीम कोर्ट को यह कहना पड़ता है कि वो जांच करेगा कि 'क्या विरोध करने का अधिकार एक पूर्ण अधिकार है' तो लगता है कि हम आज भी गुलाम हैं।
डॉ. नीलम महेंद्र

गुलाम हैं उस सत्तालोलुप वोटबैंक की राजनीति के जिसे अपने स्वार्थ के आगे कुछ नहीं दिखता। गुलाम हैं उस स्वार्थी सोच के जो संविधान द्वारा दिए गए हमारे अधिकारों के बारे में हमें समय-समय पर जागरूक करती है लेकिन देश के प्रति हमारे दायित्वों का कर्तव्यबोध हमें होने नहीं देती।

गुलाम हैं उन विपक्षी उन विपक्षी दलों की मेहत्वकांक्षाओं की जो उन्हें संसद की हारी लड़ाई सड़क पर जीतने का मार्ग दिखा देती है। यह विषय इसलिए गंभीर हो जाता है कि हमारी यह गुलामी कभी 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय गौरव के दिन देश को हिंसा की आग में झोंक देती है तो कभी लखीमपुर जैसे घटनाओं को अंजाम देती है। अतः निश्चित रूप से यह चिंता और चिंतन दोनों का ही विषय होना चाहिए।

क्योंकि लखीमपुर जैसी घटनाएं इस बात की गवाह हैं कि आज की राजनीति में येनकेन-प्रकारेण सत्ता हासिल करने और अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने के लिए किसी बेगुनाह के परिवार के घर का चूल्हा बुझाने से भी परहेज नहीं किया जाता। विडंबना की पराकाष्ठा यह है कि संविधान की दुहाई देकर उन कृषि कानूनों का विरोध किया जा रहा है जो संसद के दोनों सदनों से पारित हो कर आए हैं।

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November 07, 2021

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November 07, 2021

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November 07, 2021

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November 07, 2021

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November 07, 2021

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November 07, 2021

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October 17, 2021