बदलते भारत की तस्वीर को बयां करता टोक्यो ओलंपिक
Uday India Hindi|August 22, 2021
बदलते भारत की तस्वीर कों बयां करता टोक्यो ओलंपिक 'पढोगे लिखोगे, बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे, होगे खराब' अक्सर घर में बड़े बुजुर्गों से इस वाक्य को आपने कई बार सुना होगा, क्योंकि पुराने समय में एक धारणा थी कि सिर्फ पढ़ाई करने से बच्चे का भविष्य सुधरता है। इसी कारण माता-पिता अपने बच्चों को खेल कूद से दूर रखते थे। लेकिन, अब जमाना बदल चुका है।
डॉ. प्रीति

अब खेलोगे कूदोगे बनोंगे नवाब का जमाना आ चुका है। आज खेलो के क्षेत्र में हमारे एथलीटओलंपिक, विश्व चैपियनशिप और तमाम विश्व स्तरीय टूर्नामेंट में नए-नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश का झंडा बुलंद कर रहे है। फिर चाहे ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू हो या फिर नीरज चोपड़ा जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक भाला फेंक में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। खिलाड़ियों ने यह दर्शाया है कि अगर कुशल मार्गदर्शन हो और मजबूत मन हो, तो क्या कुछ नही किया जा सकता। इस का ही नतीजा है कि भारतीय समाज की सोच में आता बदलाव वह सकारात्मक संकेत है जो पी. वी. सिंधु, साक्षी मलिक, दीपा कर्माकर, सुशील कुमार, मेरी कॉम, योगश्वर दत्त, अभिनव बिंद्रा, नीरज चोपड़ा, मीराबाई चानू, दीपक पुनिया जैसे हजारों खेल प्रतिभाओं कों उभारने में मदद करेगा।

टोक्यो ओलंपिक में शामिल होने जा रहे एथलीटों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 13 जुलाई को संवाद किया था। इस दौरान उनका प्रमुख लक्ष्य खिलाड़ियों को तनावरहित रखना और एथलीटों को भरोसा दिलाना था कि मेडल आये या न आये, एथलीट तनावरहित होकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दें। यह उसी संवाद का नतीजा है कि टोक्यो ओलपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए 7 मेडल अपने नाम किए।

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