परफोर्मेंस बढ़िया पर जयललिता के साथ अधूरा न्याय
Sarita|October First 2021
यह फिल्म नएनए युवा हुए दर्शकों, जिन्हें 70-80 के दशक की ज्यादा जानकारी नहीं है, को देखनी ,चाहिए, अच्छी लगेगी.

थलाइवी **

'थलाइवी' तमिल भाषा का शब्द है, जिस का अर्थ होता है नेता या लीडर. चूंकि फिल्म तमिल, तेलुगू में भी बनाई गई है, इसीलिए इस का शीर्षक तमिल में ही रखा गया है. 'थलाइवी' फिल्म अजयन बाला की इसी नाम की किताब पर आधारित है. फिल्म दक्षिण भारत की कद्दावर नेता जयललिता की बायोपिक है. फिल्म की पटकथा विजयेंद्र प्रसाद ने ही लिखी है.

जयललिता तमिलनाडु की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं. वे वहां 4 बार मुख्यमंत्री रहीं. राजनीति में आने से पहले जयललिता ने तमिल के अलावा तेलुगु, कन्नड़, हिंदी और इंग्लिश फिल्मों में काम किया था. 1965 से 1972 तक उन की अधिकतर फिल्में एमजी रामचंद्रन के साथ आईं, फिर फिल्मी कैरियर के बाद उन की राजनीतिक शुरुआत 1982 से एमजीआर के साथ हुई.

कहते हैं एमजीआर के जयललिता संग बेहद मजबूत रिश्ते थे, लेकिन ये रिश्ते कभी परिभाषित नहीं किए गए. न तो सार्वजनिक मंचों पर खुल कर एमजीआर ने इस पर बात रखी और न जयललिता ने अपना पक्ष रखा. पर पार्टी के भीतर सुगबुगाहट हमेशा रहती थी. दोनों के बीच अलग तरह की कैमिस्ट्री थी, जिस में उन दोनों की आपसी अंडरस्टैंडिंग थी और बाहरी लोगों के बीच सिर्फ उड़तीफिरती बातें ही थीं. उन दोनों के जीवन की इस उलझन को फिल्म में दिखाया गया है. पर इस रिश्ते पर किसी प्रकार की राय रखने से मेकर्स बचे हैं.

जयललिता तमिलनाडु की राजनीति में एक अलग अध्याय लिखने वाली शख्सियत हैं. उन का कद बेहद ऊंचा है. वे किसी पहचान की मुहताज नहीं हैं, हालांकि उन्होंने अपनी पहचान को हमेशा पब्लिक स्पेस में खुल कर व्यक्त भी नहीं किया है.

इस फिल्म को माना जा सकता है कि यह जयललिता के जीवन का पहला अध्याय खोलती है. यह इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि फिल्म में उन के शुरुआती जीवन से ले कर मुख्यमंत्री बनने तक के सफर को दिखाया गया है. अगर यह कहा जाए कि इस के आगे दूसरा अध्याय बने या बनना चाहिए तो हैरानी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि फिल्म अधूरी लगती है और जयललिता के साथ न्याय करने से चूक रही है.

दक्षिण के लोग अपने नेता या लीडर को पूजते हैं, इसलिए विजयेंद्र प्रसाद ने विवादों में घिरी जयललिता के जीवन से कुछ प्रश्नों को अनुत्तरित छोड़ कर बढ़ियाबढ़िया दिखा दिया है. जयललिता के जीवन में जो कंट्रोवर्सी थी, उसे ठीक से छुआ तक नहीं.

बौलीवुड में राजनेताओं की निष्पक्ष बायोपिक बनाने का चलन नहीं है. इसलिए इस फिल्म को निष्पक्ष बायोपिक नहीं कहा जा सकता. राजनीति की टेढ़ीमेढ़ी सीढ़ियों पर संभल कर चढ़ती हुई जयललिता का जीवन बड़ा दिलचस्प रहा था. राजनीति में आने से पहले वे फिल्मों में काम करती थीं. उन का अफेयर एमजीआर (अरविंद स्वामी) से काफी चर्चा में रहा. एमजीआर ने ही जयललिता को राजनीति में आने का मौका दिया.

Continue reading your story on the app

Continue reading your story in the magazine

MORE STORIES FROM SARITAView All

पुरातनी अहंकार पर किसान विजयी

अगर उलटा हुआ होता यानी किसानों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया होता तो तय है उठाने वाले देश सिर पर उठा लेते, जगहजगह पटाखे फोड़े जा रहे होते, , गुलालअबीर उड़ रही होती, मिठाइयां बांटी जा रही होतीं, जुलूस निकल रहे होते, जश्न मन रहे होते और कहा यह जाता कि देखो, मोदी की एक और जीत, फर्जी किसान मुंह छिपा कर भाग गए, राष्ट्रद्रोही ताकतों ने घुटने टेक दिए और देश एक बार फिर टूटने से बच गया.

1 min read
Sarita
December First 2021

रक्ष

रक्ष एक कपड़े को कस कर दबोचे सो रहा था. इसे देख राघव की आंखों में आंसू आ गए और एक क्षणभंगुर विचार उस के दिमाग में कौंध गया कि रक्ष क्या उस के पिता की गंजी पकड़ कर सो रहा है या उन का असीमित स्नेह रक्ष को पकड़े है. आखिर रक्ष का बाबूजी से रिश्ता कैसा था.

1 min read
Sarita
December First 2021

एमिल की सोफी

महिला की वैज्ञानिक चेतना को अवरुद्ध कर पुरुष समाज उसे एमिल की सोफी बनाए रखना चाहता है. इसी अवधारणा को धर्म भी किसी न किसी माध्यम से बड़ी ही चालाकी से साकार करता आ रहा है.

1 min read
Sarita
December First 2021

धूमावती

36 साल की आयु में 25 साल की लगने वाली हेमा को देख ब्रांच मैनेजर प्रभास की आंखों की चमक देखते ही बनती थी. दोनों एकदूसरे की ओर आकर्षित हो चुके थे. हेमा की सीधेसादे पति तरुण में अब जरा भी दिलचस्पी नहीं थी. क्या प्रभास पत्नी मेघना के हाथों में बंधी डोर तोड़ सका.

1 min read
Sarita
December First 2021

महिला विमर्श हिंदू धर्म, आरएसएस और कांग्रेस

कांग्रेस महिला विमर्श के मसले पर सच में संवेदनशील दिखाई दे रही है या चुनावी जमीन तैयार कर रही है, यह बाद में पता चलेगा, पर उत्तर प्रदेश में महिलाओं को 40 प्रतिशत सीटें देने और महिला कांग्रेस दिवस पर राहुल गांधी का महिलाओं के नाम आरएसएस पर बेबाक बयान, बहुतकुछ इशारा करता है.

1 min read
Sarita
December First 2021

कमर्शियल गैस के बढ़ते दाम ताबे और मजदूरों पर महंगाई की मार

'बहुत हुई महंगाई की मार, अब की बार...' यह नारा याद है न. यह नारा आज लोगों की मुसीबत बन गया है. हर चीज के दाम बढ़े हैं, नई मार कमर्शियल गैस पर पड़ी है. क्या आप जानते हैं कमर्शियल गैस के दाम बढ़ने से किन पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है?

1 min read
Sarita
December First 2021

खिलौने बदल दें लड़कियां बदल जाएंगी

बेटियों को घिसेपिटे खिलौने मिलेंगे तो वे हमेशा दब्बू बनी रहेंगी. आत्मविश्वासी और साहसी बनाने के लिए 6 महीने बाद ही कौन से सही खिलौने दें, जानें.

1 min read
Sarita
December First 2021

अमीरों से रिश्ते कैसे निभाएं

अमीरी और गरीबी समाज का सत्य है. समाज को छोड़िए, परिवार के भीतर तक में यह अंतर होता है. एक की आर्थिक स्थिति अच्छी होती है तो दूसरे की बेहद खराब होती है. दोस्तों में भी ऐसा संभव है.

1 min read
Sarita
December First 2021

अंधकार मन से दूर केरो

मुझे रातें पसंद हैं पर, ऐसा नहीं कि अंधेरा मेरी जिंदगी का हिस्सा हो...

1 min read
Sarita
December First 2021

5 साल से रिस रहा है नोटबंदी का घाव

नोटबंदी हुए 5 साल बीत चुके हैं. 50 दिन का समय मांगते प्रधानमंत्री मोदी को जनता ने 5 साल दे दिए, पर आज भी सभी के दिमाग में कई सवाल घूम रहे हैं कि आखिरकार नोटबंदी से क्या फायदा हुआ? क्या कालाधन आया? क्या आतंकवाद व नक्सलवाद खत्म हुआ? क्या देश की अर्थव्यवस्था बढ़ी? अगर नहीं, तो यह जनता पर क्यों थोपी गई?

1 min read
Sarita
December First 2021