कैप्टन हुए आउट चन्नी नए कप्तान
Sarita|October First 2021
अपमान का बोझ लिए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह जब इस्तीफा देने गवर्नर हाउस पहुंचे तो उस वक्त उन के साथ पत्नी परनीत कौर भी मौजूद थीं. राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को इस्तीफा सौंपने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खुल कर कांग्रेस आलाकमान से अपनी नाराजगी जाहिर की.
नसीम अंसारी कोचर

पटियाला राजघराने से ताल्लुक रखने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जब दूसरी बार 2017 में पंजाब की कमान संभाली थी तो चंडीगढ़ के मुख्यमंत्री आवास से ले कर पटियाला के महल तक रंगगुलाल उड़ा था कि जैसे फागुन झूम उठा हो. ढोलनगाड़ों की आवाजें और झूमतीनाचती पगड़ियों के साथ पंजाब की जनता ने अपने नए सरदार का इस्तकबाल किया था. 'चाउंदा है पंजाब, कैप्टन दी सरकार' नारे ने 'हरहर मोदी, घरघर मोदी' के नारे को ध्वस्त किया और तत्कालीन सत्ताधारी शिअद-भाजपा को घुटने टेकने पर मजूबर कर दिया.

पंजाब में सब ठीक चल रहा था जब तक नवजोत सिंह सिद्धू ने कांग्रेस जौइन नहीं की थी. सिद्धू ने पार्टी में आते ही कप्तान की कुरसी हिलानी शुरू कर दी. बेबाक अंदाज वाले सिद्धू राहुल और प्रियंका वाड्रा की पसंद थे. पार्टी जीती तो सिद्धू को डिप्टी सीएम बनाने की चर्चाएं तेज हो गईं. लेकिन कैप्टन ने साफ कह दिया कि पंजाब को डिप्टी सीएम की जरूरत नहीं है.

अतिमहत्त्वाकांक्षी सिद्धू के लिए यह नाक का सवाल बन गया. फिर उन की पत्नी को चुनाव में टिकट न मिलने से वे न वे और नाराज हो गए. बीते 6 महीने में दिल्ली आ कर उन्होंने राहुलप्रियंका के साथ कई मीटिंगें कीं, दबाव बनाया. उन के इस तांडव ने अमरिंदर सिंह के प्रति आलाकमान के रवैए में भी तल्खी ला दी और शक, सवाल व अपमान से परेशान आखिरकार अमरिंदर को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा.

अपमान का बोझ लिए अमरिंदर सिंह जब इस्तीफा देने गवर्नर हाउस पहुंचे तो उस वक्त उन के साथ पत्नी परनीत कौर भी मौजूद थीं. कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर भी राजनेता हैं और मनमोहन सिंह सरकार में भारत की विदेश राज्यमंत्री रह चुकी हैं. राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को इस्तीफा सौंपने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खुल कर कांग्रेस आलाकमान से अपनी नाराजगी जाहिर की.

उन्होंने कहा, 'मैं ने आज सुबह ही इस्तीफा देने का फैसला कर लिया था. बीते एक महीने में जिस तरह से 3 बार विधायकों की मीटिंग दिल्ली और पंजाब में बुलाई गई थी, उस से साफ था कि आलाकमान को मुझ पर संदेह है. ऐसे में मैं ने पद से इस्तीफा दे दिया है और पार्टी अब जिसे चाहे सीएम बना सकती है. मेरे लिए भविष्य की राजनीति के विकल्प खुले हैं.

सोनिया गांधी की पसंद थे अमरिंदर

2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह का मुख्यमंत्री बनना, हालांकि कांग्रेस के कुछ आला नेताओं को नापसंद गुजरा था, मगर उन की नाराजगी को नजरअंदाज कर के कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की सहमति उन के ही पक्ष में बनी थी. आखिर बनती भी क्यों न, कैप्टन अमरिंदर सिंह को राजनीति में लाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से अमरिंदर सिंह की दोस्ती स्कूल के जमाने की थी और कैप्टन गांधीनेहरू परिवार के खासे करीबी माने जाते हैं.

सियासत उन के खून में थी तो जनता का दिल जीतने की कला भी उन्हें आती थी. यही वजह रही कि पंजाब की जनता ने उन्हें सिरआंखों पर बिठाया.

पंजाब में दलित मुख्यमंत्री

कांग्रेस ने पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर से से इस्तीफा ले कर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बना दिया है. चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री बने हैं. वे अमरिंदर सरकार में तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री थे. 58 साल के चन्नी अमरिंदर सिंह के प्रबल विरोधी रहे हैं. चन्नी 3 बार विधायक बन चुके हैं. 2007 में वे निर्दलीय विधायक बने थे. इस के बाद 2012 और 2017 में वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे.

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