अब सोनू सूद पर आयकर विभाग की रेड
Sarita|October First 2021
ऐसा पहली बार नहीं है कि सत्ता को उस की खामियों का एहसास कराने वाले किसी व्यक्ति को जांच एजेंसियों के उत्पीड़न से गुजरना पड़ा हो. हर्ष मंदर, यूथ कांग्रेस के श्रीनिवास बीवी, सिद्दीक कप्पन जैसे बहुतेरे नाम हैं.
नसीम

कोरोनाकाल में लौकडाउन लगने पर महानगरों और अन्य शहरों से पैदल ही अपने गांवकसबों की तरफ पलायन करने के लिए मजबूर लाखों प्रवासी मजदूरों के लिए अभिनेता सोनू सूद मदद के लिए सड़कों पर उतरे थे और उन्हें उन के गंतव्य तक पहुंचाने में मदद की थी.

उन्होंने कई लोगों के रहने और खाने के साथ काम का भी इंतजाम किया था.प्रवासी मजदूरों को घरवापसी कराने के अभियान के तहत उन्होंने नीति गोयल के साथ मिल कर 75 हजार प्रवासी मजदूरों को अपने घर भिजवाया, लौटवाया. इन में ओडिशा, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड के प्रवासी मजदूर थे. इस के अलावा बड़ी संख्या में दक्षिण भारत के प्रवासी मजदूरों को भी भेजा गया. इतना ही नहीं, प्रवासी मजदूरों के सामने रोजगार की समस्या खड़ी हुई तो उन्हें रोजगार दिलाने के लिए प्रवासी रोजगार ऐप भी शुरू किया था.

उन दिनों अखबारों के पन्ने, टीवी चैनलों के स्क्रीन सोनू सूद की तारीफों से पट गए थे. कौन ऐसा होगा जिस ने सोनू सूद की तारीफ न की होगी, चाहे वह पक्ष हो या विपक्ष.

सोनू सूद की दरियादिली और गरीबों के प्रति उन की भावनाओं के चर्चे इस कदर हुए कि कुछ राजनीतिक पार्टियों ने, जिन में भाजपा भी शामिल थी, उन को राजनीति में आने का औफर दिया. उन्हें राज्यसभा सीट पर भेजने की बातें हुईं, मगर सोनू सूद ने मना कर दिया और अपनी समाजसेवी संस्था के माध्यम से जनता की सेवा में लगे रहे.

पिछले दिनों वे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ एक मंच पर नजर आए. सूद को अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली दिल्ली सरकार ने 'देश के मेंटोर' कार्यक्रम का बैंड एंबेसडर बनाया है. इस कार्यक्रम के जरिए स्कूली बच्चों को भविष्य के बारे में मार्गदर्शन दिया जाएगा. इसी की घोषणा के समय वे अरविंद केजरीवाल के साथ बैठे मीडिया के कैमरों में कैद हुए. फिर क्या था, सोनू सूद को केजरीवाल के साथ देख कर राजनीतिक पार्टियों में हलचल मच गई.

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