"समाज में एलजीबीटी समुदाय को ले कर जो टैबू है उसे बदलने का प्रयास है हमारी यह फिल्म" अंशुमन झा
Sarita|July First 2021
'लव, सैक्स और धोखा' और 'नो फादर इन कश्मीर' जैसी फिल्मों में ऐक्टिग कर चुके अंशुमन अब अपनी फिल्म 'हम भी अकेले तुम भी अकेले' ले कर आए हैं. फिल्म एलजीबीटी समुदाय को केंद्र में रख कर बनाई गई है.
शांतिस्वरूप त्रिपाठी

सुभाष घई के साथ बतौर मुख्य सहायक निर्देशक और फिर . फिल्म 'कांची' में सहायक रचनात्मक निर्देशक का काम कर चुके अंशुमन झा ने बतौर अभिनेता अपने अभिनय कैरियर की शुरुआत दिबाकर बनर्जी की फिल्म 'लव, सैक्स और धोखा' से की थी. उस के बाद वे 'यह है बकरापुर', 'चैरंगा', 'मोना डार्लिंग', 'अंग्रेजी में कहते हैं' और 'नो फादर्स इन कश्मीर' जैसी फिल्मों के अलावा 'मस्तराम' जैसी वैब सीरीज में अपने अभिनय का जलवा दिखा चुके हैं. अब वे बतौर अभिनेता व निर्माता एलजीबीटी समुदाय पर सोचने को मजबूर करने वाली फिल्म 'हम भी अकेले तुम भी अकेले' ले कर आए हैं.

ओटीटी प्लेटफौर्म 'डिजनी हौट स्टार' पर स्ट्रीम हो रही इस फिल्म को ले कर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. 6 सितंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा एलजीबीटी समुदाय को अपराध से मुक्त किए जाने के निर्णय के बाद बहुतकुछ बदला है पर यह फिल्म कई जगह चूक गई है. मगर खुद अंशुमन झा का दावा है कि उन की यह फिल्म एलजीबीटी समुदाय पर गहन शोध का नतीजा है. प्रस्तुत हैं अंशुमन झा से हुई एक्सक्लूसिव बातचीत के अंश.

अंशुमन से जब पूछा कि उन्होंने फिल्म 'हम भी अकेले तुम भी अकेले में एक 'गे' युवक का किरदार निभाने के साथ इस का निर्माण करने की बात क्यों सोची, तो वे कहते हैं, "सच यह है कि निर्देशक हरीश व्यास ने मुझ से इस फिल्म में अभिनय करने के लिए संपर्क किया था. जब मैं ने कहानी सुनी तो मुझे यह कहानी चुनौतीपूर्ण लगी क्योंकि दुनिया में कहीं भी ऐसी फिल्म नहीं बनी है जो एक लड़का और एक लड़की, जोकि दोनों समलैंगिक समुदाय से हैं, की दोस्ती पर आधारित हो. 2 होमोसैक्सुअल लड़कों या 2 लड़कियों पर फिल्में बहुत बनी हैं. तो इस कहानी में मुझे अलग बात यही लगी कि यह एक समलैंगिक लड़के व एक समलैंगिक लड़की की दोस्ती की कहानी है.

इस में सकारात्मकता व इंसानियत की बात की गई है. असल प्यार में अपेक्षाएं नहीं होती हैं. इस फिल्म के अंत में मानसी जो कुछ करती है, वह बहुत बड़ी इंसानियत वाली बात है. इस में काफी भावुकता वाली बातें हैं. सकारात्मक बात यह है कि अपने मन को दरकिनार कर के किसी और की सेवा करना, क्योंकि आप उस से प्यार करते हो. मेरे हिसाब से 2 लोगों के बीच प्यार भी वैसा हो सकता है जैसा मांबेटे का होता है, जिस को 'सोल कनैक्ट' या 'सोल मेट' बोलते हैं. लेकिन आजकल लोगों को हर चीज के बारे में ज्ञान ज्यादा है मगर प्रैक्टिस कम है. लोग पढ़ते बहुतकुछ हैं मगर जब करने की बात आती है तो करते कम हैं. पर फिल्म में वीर व मानसी एकदूसरे के लिए वह सब कर रहे हैं जोकि प्यार दिखाता है."

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