नताशा नरवाल- क्रूर, बेरहम और तानाशाह सरकार की शिकार
Sarita|June First 2021
इस समय जितनी असंवेदनशील कोरोना महामारी है उतनी ही शासन व्यवस्था हो चली है. ऐसे समय में शासन द्वारा राजनीतिक कैदियों को अपने प्रियजनों से दूर करना, यातना देने से कम नहीं है. जबकि, कई तो सिर्फ और सिर्फ इसलिए बिना अपराध साबित हुए जेलों में हैं क्योंकि वे सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे.
रोहित

पिछले एक साल से ऊपर जेल में बंद आंदोलनकारी नताशा नरवाल के पिता, 71 वर्षीय महावीर नरवाल का कोरोना से जूझते हुए 9 मई को निधन हो गया. जिस के बाद नताशा को 10 मई को कोर्ट ने पिता के अंतिम संस्कार के लिए 3 हफ्ते के लिए अंतरिम जमानत दे दी. महावीर नरवाल रोहतक अस्पताल में भरती थे, जहां तकरीबन शाम के 6 बजे उन की मौत की खबर का पता चला.

वे डायबिटिक पेशेंट भी थे जिस के चलते उन पर कोरोना का अधिक प्रभाव हुआ. कोरोना के चलते औक्सीजन स्तर में गिरावट आने के बाद उन्हें सांस लेने में दिक्कत आने लगी थी. सो, उन्हें 3 मई को अस्पताल में भरती कराया गया. मात्र एक हफ्ते चले इलाज के बाद वे अपनी संघर्षशील जिंदगी से विदा हो गए.

कौन हैं महावीर नरवाल

महावीर नरवाल हरियाणा के रोहतक के रहने वाले थे. वे प्रगतिशील आंदोलन के प्रति प्रतिबद्ध थे. महावीर नरवाल हरियाणा के ज्ञानविज्ञान आंदोलन और पीपल्स साइंस मूवमैंट की स्थापना के समय से ही इन से जुड़े हुए थे. वे हरियाणा विज्ञान मंच और भारत ज्ञानविज्ञान समिति, हरियाणा, के अध्यक्ष भी थे. ऐसे मौके पर ज्ञानविज्ञान आंदोलन ने महावीर की असमय मृत्यु पर खेद जताते हुए बयान जारी कर कहा, “ज्ञान विज्ञान आंदोलन के लिए डा. नरवाल का निधन एक बहुत बड़ी क्षति है. अत्यधिक दुख के इस समय आंदोलन अपने शोक संतप्त परिवार के साथ पूरी एकजुटता से खड़ा है."

महावीर नरवाल, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार से रिटायर्ड वरिष्ठ वैज्ञानिक और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ सदस्य थे. अपनी शुरुआती उच्चशिक्षा की पढ़ाई में ही वे आंदोलनों से जुड़ गए थे और आपातकाल के समय वे आंदोलन करते हुए कई बार जेल भी गए थे. उस दौरान वे बीएससी की पढ़ाई कर रहे थे. तब से ले कर आज अपनी अंतिम सांस तक उन का वैचारिक झुकाव प्रगतिशील विचारधारा की तरफ ही रहा. अपने पूरे जीवनकाल में वे विभिन्न सरकारों की गलत नीतियों के खिलाफ तत्पर मुखर तौर पर संघर्षरत रहे और जनआंदोलनों को प्रेरणा देने का काम करते रहे.

इस मौके पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से महावीर नरवाल के निधन पर संवेदना जताई और इस परिस्थिति को भाजपा सरकार का आपराधिक कृत्य बताया.

ट्वीट में कहा गया, 'सीपीआईएम अपने वरिष्ठ सदस्य, कामरेड महावीर नरवाल के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करती है. यह मोदी सरकार का आपराधिक कृत्य है कि उन की बेटी नताशा नरवाल को पिछले साल यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया था और वह अपने पिता से भी नहीं मिली थी. लाल सलाम महावीर नरवाल.'

नताशा नरवाल मामला

सीपीआईएम द्वारा भाजपा सरकार पर इस तरह के आरोप लगाना जायज भी है. फरवरी माह 2020 में हुए दिल्ली दंगों से पहले 2019-20 की सर्दी में चलाए जा रहे सीएए-एनआरसी विरोधी लंबे जन आंदोलन का सरकार द्वारा जिस बुरी तरह से दमन किया गया उसे भारत ही नहीं, पूरी दुनिया ने देखा. इस आंदोलन की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही आंदोलनकारियों को 'कपड़ों से पहचान लेने की नसीहत दे माहौल को सांप्रदायिक बना दिया था. लेकिन इस आंदोलन का अंजाम आखिरकार सांप्रदायिक दंगों की लपटों पर जा कर खत्म होगा, यह सोच से परे था.

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