अनाथ बच्चे गोद लेने में भी जातीयता
Sarita|June First 2021
'2 साल की बेटी और 2 माह के बेटे के मातापिता कोविड के कारण नहीं रहे. इन बच्चों को अगर कोई गोद लेना चाहता है तो दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करें. ये ब्राह्मण बच्चे हैं. सभी ग्रुपों में इस पोस्ट को भेजें ताकि बच्चों को जल्दी से जल्दी मदद मिल सके.' ऐसे मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं.
शैलेंद्र सिंह

जातीयता देश का सब से बड़ा अभिशाप है. यहां अनाथ बच्चों को गोद लेते समय भी जाति देखी जाती है. सरकारी नियम से गोद लेने में जाति का पता नहीं चलता है. इस कारण लोग कानूनीतौर पर बच्चा गोद लेने की जगह चोरी का बच्चा गोद लेना पसंद करते हैं. यही वजह है कि बच्चा चोरी करने वाला गैंग सक्रिय है. लोग कानूनीतौर पर बच्चों को गोद लें, इस के लिए जरूरी है कि गोद लेने वाले कानून को आसान किया जाए. तभी कोरोनाकाल में अनाथ हुए बच्चों को ज्यादा से ज्यादा गोद लेने के लिए लोग आगे आएंगे.

'2 साल की बेटी और 2 माह के बेटे के मातापिता कोविड के कारण नहीं रहे. इन बच्चों को अगर कोई गोद लेना चाहता है तो दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करें. ये ब्राह्मण बच्चे हैं. सभी ग्रुपों में इस पोस्ट को भेजें ताकि बच्चों को जल्दी से जल्दी मदद मिल सके.' ऐसे मैसेज सोशल मीडिया पर तेजी के साथ वायरल हो रहे हैं.

कोरोनाकाल में बच्चे बहुत ज्यादा संख्या में अनाथ हुए हैं. अनाथ बच्चे वे हैं जिन के मातापिता कोरोना के कारण मर गए. उन के पीछे बच्चों की देखभाल करने वाला कोई नातेरिश्तेदार भी नहीं है. मैसेज के जरिए जब लोग संपर्क करते हैं तो उन से पैसों की वसूली भी हो जाती है. लाखों रुपए गोद लेने वाले से गोद देने के नाम पर वसूल लिया जाता है.

असल में बच्चों को बेचने वाले गैंग इस तरह के मैसेज के सहारे अपना कालाधंधा चलाते हैं. बड़े शहरों के आसपास ऐसे गैंग अधिक सक्रिय होते हैं. इस की वजह यह होती है कि यहां आसानी से कोई पहचान नहीं पाता है.गाजियाबाद में बच्चों की चोरी की घटनाएं काफी हो रही थी. पुलिस को भी लंबे समय से शक था कि कोई गैंग इस अपराध को अंजाम दे रहा है. पुलिस ने ऐसे गैंग को पकड़ने के लिए अपना जाल बिछाया. 12 मई को लोनी, गाजियाबाद की रहने वाली फातिमा ने थाने में शिकायत दर्ज कराई कि दोपहर करीब 12 बजे एक पुरुष और एक महिला उस के घर पर किराए का मकान देखने के लिए आए थे. बातोंबातों में ही दोनों ने फातिमा को कुछ नशीला पदार्थ दे दिया और उस का 15 दिन का बच्चा ले कर फरार हो गए.

बच्चा बेच देते हैं चोरी के बाद

फातिमा की शिकायत पर गाजियाबाद पुलिस ने इस गैंग को पकड़ने के लिए जाल बिछाया. आखिरकार पुलिस की मेहनत रंग लाई और बच्चों की तस्करी व उन की खरीदफरोख्त करने वाले सफेदपोशों के गैंग के 11 महिलापुरुष सदस्यों को गिरफ्तार कर के इस संगीन अपराध का खुलासा कर दिया. बच्चों की तस्करी और उन्हें चुरा कर उन का सौदा मोटी रकम में करने वाले गैंग ने अबोध बच्चे को पहले तो खरीदने का प्रयास किया था लेकिन जब बात सौदे पर अटक गई तो उस गैंग के 2 बदमाशों ने बच्चे को चुरा लिया. इस के बाद बच्चे को लखनऊ क्षेत्र में रहने वाले एक दंपती को साढ़े 5 लाख रुपए में बेच दिया.

एसएसपी अमित पाठक ने बच्चे की सकुशल बरामदगी के लिए पुलिस की टीमों का गठन किया जिस के बाद दिल्ली से साढ़े 400 किलोमीटर दूर चोरी किए गए बच्चे रमजानी को आलोक अग्निहोत्री नाम के शख्स के कब्जे से बरामद कर लिया गया. लखनऊ से गिरफ्तार आलोक अग्निहोत्री ने बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया. उस ने पुलिस को बताया कि शादी के बाद उस की कोई औलाद नहीं थी जिस के चलते उस ने यह बच्चा 5.50 लाख रुपए में अश्मित कौर व उस के पति गुरमीत कौर से खरीदा. अश्मित और गुरमीत दोनों ही दिल्ली के रहने वाले हैं.

गाजियाबाद पुलिस के सामने चुनौती थी कि आखिर बच्चा अश्मित और गुरमीत के पास कैसे पहुंचा, तो पता चला कि यह बच्चा वाहिद और तरमीम ने चोरी कर के रूबिना तथा मोनिका को दिया था. फिर इन दोनों ने बच्चे को सरोज, प्रीति और ज्योति को दिया. इन के द्वारा यह बच्चा प्रभा, इंदु व उस के दोस्त शिवा द्वारा अश्मित कौर व उस के पति गुरमीत के पास पहुंचा था. पुलिस ने आरोपियों के पास से 5 लाख रुपए बरामद कर लिए हैं.

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