पुजारियों को दानदक्षिणा क्यों
Sarita|May First 2021
मध्य प्रदेश में आम लोग जाएं तेल लेने. युवाओं को न नौकरी न बेरोजगारी भत्ता, किसानों को राहत नहीं, कर्मचारियों को एरियर व महंगाई भत्ता नहीं और महिलाओं को सुरक्षा नहीं. लेकिन धर्म की दुकानदारी में बिलकुल भी कमी नहीं, इस के लिए पंडेपुजारियों को सरकारी दानदक्षिणा जारी है.
भारत भूषण श्रीवास्तव

कोई नहीं पूछता कि युवाओं को बेरोजगारी भत्ता क्यों नहीं दिया जाता, किसानों को राहत और इमदाद खासतौर से सुपात्रों को क्यों वक्त पर नहीं दी जा रही. सरकार जनता का पैसा निकम्मे पंडेपुजारियों पर क्यों लुटा रही है, कर्मचारियों को एरियर और महंगाई भत्ता देने को सरकार के खजाने में पैसा नहीं है लेकिन पैसा उन पुजारियों के लिए ही क्यों है जो कुछ नहीं करते.

अव्वल तो तमाम धर्मग्रंथ इन नसीहतों से भरे पड़े हैं कि ब्राह्मण को दानदक्षिणा देते रहने में ही कल्याण और सार्थकता है लेकिन महाभारत का अनुशासन पर्व तो खासतौर से गढ़ा ही इसीलिए गया है. इस पर्व में भीष्म पितामह और युधिष्ठिर का संवाद है जिस में युधिष्ठिर एक जिज्ञासु की तरह भीष्म से पूछ रहा है कि दान और यज्ञ कर्म इन दोनों में से कौन मृत्यु के पश्चात महान फल देने वाला होता है और ब्राह्मणों को कब और कैसे दान देना चाहिए.

दानधर्म पर्व के अध्याय 61 को पढ़ें तो यह पूरा ब्राह्मणों की दान महिमा से रंगा हुआ है. श्लोक 1 से ले कर श्लोक 38 तक में भीष्म युधिष्ठिर को बता रहे हैं कि:

• तुम नियमपूर्वक यज्ञ में सुशील सदाचारी तपस्वी वेदवेत्ता, सब से मैत्री रखने वाले तथा साधु स्वभाव वाले ब्राह्मणों को संतुष्ट करो.

• यज्ञ करने वाले ब्राह्मणों का सदा सम्मान करो.

• जो बहुतों का उपकार करने वाले ब्राह्मणों का पालनपोषण करता है वह उस शुभकर्म के प्रभाव से प्रजापति के समान संतानवान होता है.

• युधिष्ठिर, तुम समृद्धिशाली हो इसलिए ब्राह्मणों को गाय, बैल, अन्न, छाता, घोड़े, जुते हुए रथ आदि की सवारियां, घर और शैया आदि वस्तुएं देनी चाहिए.

• ब्राह्मणों के पास जो वस्तु न हो उसे उन को दान देना और जो हो उस की रक्षा करना भी तुम्हारा नित्य कर्तव्य है. तुम्हारा जीवन उन्हीं की सेवा में लग जाना चाहिए.

• यदि तुम्हारे राज्य में कोई विद्वान ब्राह्मण भूख से कष्ट पा रहा हो तो तुम्हें भ्रूणहत्या का पाप लगेगा.

• जिस राजा के राज्य में स्नातक ब्राह्मण भूख से कष्ट पाता है उस के राज्य की उन्नति रुक जाती है. ये सब व ऐसी कई हाहाकारी डराने वाली बातें सभी धर्मग्रंथों में कही गई हैं जिन्हें पढ़ कर नास्तिक से नास्तिक आदमी को भी एक बार भ्रम हो जाता है कि बात में कोई तो दम होगा. जबकि हकीकत यह है कि ब्राह्मण जैसी श्रेष्ठ जाति को मेहनतमजदूरी जैसा तुच्छ काम न करना पड़े, इसलिए यह साजिश रची गई, जो लोकतंत्र के इस दौर में भी कायम है और जनप्रतिनिधि भी इस का आचरण व पालन कर रहे हैं.

शिवराज सिंह बने युधिष्ठिर

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