गायत्री प्रजापति पर कस गया ईडी का शिकंजा
Sarita|May First 2021
दलित समाज को उम्मीद होती है कि उस के बीच से उठा कोई युवक अगर देश की राजनीति में अपनी जगह बनाता है तो वह अपनी बिरादरी को गरीबी, अशिक्षा और जिल्लत की जिंदगी से उबारने के लिए कुछ करेगा. मगर अफसोस कि राजनीति में आने के बाद दलित नेता भी सवर्णों का चोला ओढ़ कर लूटकांड और दरिंदगी के झुंड का हिस्सा बन जाते हैं. उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति की कहानी इसी की बानगी है.
नसीम अंसारी कोचर

कभी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे दलित नेता गायत्री प्रजापति की फर्श से अर्श तक पहुंचने और फिर अर्श से फर्श पर आ गिरने की कहानी काफी दिलचस्प है. ब्रशपेंट का डब्बा हाथ में उठाए गलीगली काम ढूंढ़ने वाला एक दलित युवक देखते ही देखते कैसे एक बड़े राज्य का खनन मंत्री बन गया? सुबहशाम 2 निवाला रोटी को तरसने वाला उस का परिवार कैसे अरबोंकरोड़ों की संपत्ति का मालिक हो गया? ये बातें अचंभित करने वाली तो हैं ही, साथ ही यह बताने के लिए काफी हैं कि देश की राजनीति में भ्रष्टाचार और लूट का खेल किस चरमबिंदु को छू रहा है.

दलित तबके को देश की राजनीति में भागीदारी करने का मौका आज भी कम ही मिलता है. मगर अफसोस कि जब मिलता है तो वह समाज में अपनी बिरादरी के अगुआ बन कर उसे जिल्लत व गरीबी की जिंदगी से उबारने के बजाय वह राजनीति पर कब्जा जमाए सवर्णों की चरणवंदना व चाटुकारिता कर के अपनी और अपने परिवार की तिजोरियां भरने में जुट जाता है. गायत्री प्रजापति तो दो कदम और आगे निकले हुए नेता हैं जिन्होंने न केवल गरीबों के पैसे लूट कर अपनी तिजोरियों में भरे बल्कि औरत को अपनी दासी समझने वाले सवर्णों की आदतें भी अंगीकार करते हुए अपनी ही जाति की महिलाओं की इज्जत तारतार करते रहे.

गायत्री प्रजापति पर साइकिल चोरी से ले कर सामूहिक बलात्कार में शामिल होने तक के मुकदमे दर्ज हैं. उन की रासलीलाओं की कहानियां अमेठी की जनता चटखारे लेले कर सुनाती है.

गायत्री प्रजापति का राजनीतिक और आपराधिक इतिहास खंगालने से पहले बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की लखनऊ यूनिट के जौइंट डायरैक्टर डा. राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में गायत्री प्रजापति की करोड़ों रुपए मूल्य की चलअचल संपत्तियां जब्त की गई हैं और इस मामले में आरोप पत्र अदालत में दाखिल हो चुका है. जब्त की गई अचल संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य 55 करोड़ रुपए है. गायत्री के परिवारीजन के 32 बैंक खाते व 17 संपत्तियां अटैच की गई हैं जिन की कीमत करीब 11.70 करोड़ रुपए है. कुछ बेनामी संपत्तियां भी अटैच की गई हैं. इन में 7 बैंक खाते व 17 अचल संपत्तियां शामिल हैं. इन की कुल कीमत 2.77 करोड़ रुपए है. वहीं, गायत्री की कंपनियों के 12 बैंक खाते व 26 अचल संपत्तियां अटैच की गई हैं जिन की कीमत 22.47 करोड़ रुपए है. जिन कंपनियों की संपत्तियां अटैच की गई हैं उन में एमजीए कौलोनाइजर्स, एमजीए हौस्पिटैलिटी सर्विसेज, एमएसए इंफ्राबैंचर, एमजीएम एग्रोटेक, कान्हा बिल्डवैल, दया बिल्डर्स, एक्सेल बिल्डटैक, लाइफक्योर मैडिकल एंड रिसर्च सेंटर प्राइवेट लिमिटेड व गुरुनानक कोल्ड स्टोरेज शामिल हैं.

प्रवर्तन निदेशालय की जांच में गायत्री प्रजापति और उन के परिवार को ले कर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. जौइंट डायरैक्टर डा. राजेश्वर सिंह कहते हैं, "गायत्री प्रजापति की पत्नी महाराजी देवी, जो वर्ष 2012 तक सिलाईकढ़ाई काम कर के मात्र 10-15 हजार रुपए महीना कमाती थी, डा. राजेश्वर सिंह ने 2013 में महाराष्ट्र के लोनावला में एक आलीशान बंगला खरीदा. पढ़ाई कर रही प्रजापति की 2 बेटियां अचानक प्रोपर्टी डीलिंग का बड़ा धंधा करने लगी. साल 2013 से 2017 के बीच प्रजापति की पत्नी और दोनों बेटियों के खाते में देखते ही देखते 6 करोड़ 60 लाख रुपए जमा हो गए.

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