फिर आ गए नीतिश कुमार
Rajasthan Diary|November 2020
बिहार के एनडीए में नीतीश बाबू लोगों के गुस्से का शिकार हुए। भाजपा का चेहरा नरेंद्र मोदी के रूप में था। इन परिणामों से यह भी लगता है कि जनता का भाजपा पर भरोसा बरकरार रहा और उस भरोसे का कुछ लाभ जद-यू को भी मिला। लालू परिवार अभी भी बिहार की राजनीति को प्रभावित करता है। जंगलराज की यादें अपनी जगह, लेकिन लालू परिवार का करिश्मा बरकरार है। कुछ राजनीतिक विश्लेषण राजद की सफलता का श्रेय तेजस्वी यादव को देना चाहते हैं, लेकिन इसका श्रेय बहुत बड़ी सीमा तक लालू को ही जाता है। कहा जा रहा है कि तेजस्वी ने पोस्टरों में लालू की तस्वीर भी नहीं लगाई थी, यह उस बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकता है जिसके चलते लालू स्वयं ही बेटे को भविष्य का नेता स्थापित करना चाहते हैं।
महीपाल सिंह

पांच वर्ष पूर्व नीतीश कुमार ने लालू यादव की आरजेडी के साथ हाथ मिलाकर प्रधानमंत्री को चुनौती दी थी और जनता का दिल जीत कर मुख्यमंत्री बने थे तो वे लोकप्रियता के चरम पर थे और उन्हें विपक्ष के संभावित नेता और विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद के अगले दावेदार के रूप में देखा जाने लगा था। तब भी बिहार विधानसभा में उनके दल को कम सीटें मिली थीं और आरजेडी के ज्यादा उम्मीदवार जीत कर आए थे। शीघ्र ही उनका मन आरजेडी से उचट गया और वे भाजपा के पाले में आ गए। विधानसभा में उनका बहुमत कायम रहा और वे मुख्यमंत्री बने रहे। अब पांच वर्ष बाद उन्होंने सातवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है और मुख्यमंत्री के रूप में यह उनका चौथा कार्यकाल है।

इस बार भी उनके दल को विधानसभा में उनके भागीदार भाजपा से कम सीटें मिली हैं, फिर भी मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य उन्हें ही मिला है और नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर उन्होंने कार्यभार संभाल लिया है। पर इस बार दो बड़े अंतर हैं। पहला, वे पहले की तरह लोकप्रिय नहीं हैं, उनकी लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है और यदि भाजपा की कुछ विवशताएं न होतीं तो वे मुख्यमंत्री न बने होते। दूसरा, अब उनके साथ विकल्पहीनता की स्थिति है और मुख्यमंत्री बन जाने के बावजूद वे प्रधानमंत्री मोदी के अंगूठे तले ही रहेंगे। सवाल यह है कि प्रधानमंत्री की ऐसी क्या विवशता थी कि भाजपा की स्थिति मजबूत हो जाने और नीतीश कुमार की व्यक्तिगत लोकप्रियता रसातल में चली जाने के बावजूद उन्हें बिहार की कमान नीतीश कुमार को ही सौंपनी पड़ी, वह भी तब जब अपनी तमाम असफलताओं के बावजूद नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ प्रभावित नहीं हुआ है। मोदी जानते हैं कि जो उनके विरोधी हैं, वे विरोधी रहेंगे ही और जो उनके प्रशंसक हैं वे और अधिक गहरे भक्त बनते जा रहे हैं। नरेंद्र मोदी की प्रोपेगैंडा मशीन बड़ी कुशलता से सच और झूठ के घालमेल से उन्हें हर रोज घुट्टी पिला देती है और वे सब तालियां बजाने लग जाते हैं।

यहां तक कि अपने कार्यकर्ताओं को भेजे संदेशों में मोदी की प्रोपेगैंडा मशीन उनकी असफलताओं को भी सफलता के रूप में प्रचारित कर देती है और भक्तगण सम्मोहित हो जाते हैं। एक छोटा सा उदाहरण मेरी बात को और स्पष्ट कर देगा। कुछ दिन पूर्व भाजपा के कार्यकर्ताओं के एक व्हाट्सऐप ग्रुप में एक संदेश आया जिसमें ओवैसी को यह कहते हुए दिखाया गया है कि मोदी इस देश को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं, और उसके बाद नीचे टिप्पणी के रूप में यह लिखा था 'और तुमने क्या समझा था कि हमने 15 लाख के लिए वोट दिए हैं?' यानी, मोदी द्वारा काले धन पर नकेल लगाकर हर नागरिक को 15 लाख देने का जो वायदा किया गया था उसका कुछ नहीं बना। न काले धन पर नकेल लगी, न स्विस बैंक के खातों का पता चला, न नागरिकों को 15 लाख मिले, पर उपरोक्त संदेश में उस असफलता को भी चतुराई से सफलता में बदल दिया। मजे की बात यह है कि हिंदू-मुस्लिम भावनाएं उभार कर इस संदेश ने भी तालियां बटोर लीं। व्यवस्था की असफलता का ऐसा जश्न कहीं और देखने को नहीं मिलता।

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फिर 'ट्रैक पर गुज्जर

राजस्थान सरकार की तरफ से कई बार फैसले किए जा चुके हैं। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा घोषित आंदोलन की तारीख 1 नवम्बर से ठीक पहले 31 अक्टूबर को गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति और अशोक गहलोत सरकार के बीच 14 बिंदुओं पर सहमति बनी। संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला इस वार्ता में शामिल नहीं हुए, वार्ता में गुर्जर नेता हिम्मत सिंह के गुट के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस बैठक में गुर्जरों के लिए राज्य सरकार ने बड़े निर्णय किए। इसके बावजूद गुर्जर ट्रैक पर उतर गए।

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Rajasthan Diary
November 2020

फिर आ गए नीतिश कुमार

बिहार के एनडीए में नीतीश बाबू लोगों के गुस्से का शिकार हुए। भाजपा का चेहरा नरेंद्र मोदी के रूप में था। इन परिणामों से यह भी लगता है कि जनता का भाजपा पर भरोसा बरकरार रहा और उस भरोसे का कुछ लाभ जद-यू को भी मिला। लालू परिवार अभी भी बिहार की राजनीति को प्रभावित करता है। जंगलराज की यादें अपनी जगह, लेकिन लालू परिवार का करिश्मा बरकरार है। कुछ राजनीतिक विश्लेषण राजद की सफलता का श्रेय तेजस्वी यादव को देना चाहते हैं, लेकिन इसका श्रेय बहुत बड़ी सीमा तक लालू को ही जाता है। कहा जा रहा है कि तेजस्वी ने पोस्टरों में लालू की तस्वीर भी नहीं लगाई थी, यह उस बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकता है जिसके चलते लालू स्वयं ही बेटे को भविष्य का नेता स्थापित करना चाहते हैं।

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Rajasthan Diary
November 2020

दिवाली पर प्रदूषण का साया क्यों?

तेजोमय उल्लास के महापर्व दीपावली के आते ही पर्यावरण प्रदूषण की बात जोरों से उठती है। एक शाश्वत सवाल हर बार उठाया जाता है कि दीपावली पर आतिशबाजी करने की मान्यता का क्या कोई धार्मिक इतिहास है? माता लक्ष्मी को पूजने के पुरातन इतिहास से आतिशबाजी कब व कैसे जुड़ी? यदि यह धर्मशास्त्र द्वारा बनाई रीति नहीं है तो दीपावली पर पटाखों का चलाना कैसे रस्म बनता गया? इस सवाल का जवाब जरूरी है कि पारंपरिक पर्व पर प्रदूषण का साया क्यों पड़ा हुआ है?

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November 2020

पाक की नापाक जासूसी जंग

तमाम सुरक्षा व्यवस्थाओं में सेंधमारी कर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई किस कदर हमारी सैन्य जानकारियां बटोर लेती है, इसको सीआईडी के ताजा खुलासे से जाना जा सकता है। सीआईडी ने एक नागौर जिला निवासी सैन्य कार्मिक को गिरफ्तार किया है। बाड़मेर में भारत माला प्रोजेक्ट में जेसीबी ड्राइवर रोशनदीन भी जासूसी करने के मामले में एटीएस के हत्थे चढ़ा है।

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November 2020

जोधपुर रिसायत के विलय में सिगरेट लाइटर की भी भूमिका

राजस्थान के एकीकरण की दिलचस्प कहानियां

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Rajasthan Diary
November 2020

रोशनी का दिव्यबोध फैलाती दीपावली

लक्ष्मी की आराधना होनी चाहिए क्योंकि लक्ष्मी का संबंध धन से नहीं वरन उसकी पवित्रता से है। लक्ष्मी अशुद्ध, अपवित्र और अप्राकृतिक से कभी नहीं जुड़ती। इस नाते जिसका आस्वादनभोजन अशुद्ध है, जिसकी भाषा-वाणी अपवित्र है, जिसका संस्कार-विहार अप्राकृतिक है, वह लक्ष्मी का आशीर्वाद कैसे प्राप्त कर सकता है। सच्ची और स्थाई लक्ष्मी वही है जो शील और मर्यादा से पायी जाए।

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November 2020

खुशियों की जगमग में भांति-भांति की रीत

आज भी प्रचलन में है मारवाड़मेवाड़ की ये कुछ खास परम्पराएं

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Rajasthan Diary
November 2020

कोरोना काल में पटाखों पर न देंजोर, सबसे बुरा है इसका शोर

इस बार दीपावली केवल दीप जलाकर ही मनाएं तो यह मानवता की सेवा होगी। हमने और आपने अगर इस बार पटाखे जलाए तो कोविङ-19 के दौर में यह धूमधड़ाका सभी के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं में और जहर घोल देगा और ऑक्सीजन लेने में लोगों को दिक्कत होगी। पटाखे न जलाकर हम कई लोगों की जान जोखिम में डालने से बच जाएंगे।

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Rajasthan Diary
November 2020

ऑपरेशन लोटस की आहट

क्या वाकई में अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाने की किसी योजना पर अंदरखाने काम चल रहा है या कटारिया ने सहज तरीके से कोई बयान दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो जुलाई के महीने में चले ऑपरेशन लोटस की जिस तरह से भद्द पिटी, उसके बाद इसकी संभावना न के बराबर है कि इस प्रकार की कोई कोशिश फिर से की जाएगी। विश्लेषक इसके पीछे कई पुख्ता कारण बताते हैं। सबसे बड़ा कारण यह है कि न तो राजस्थान मध्यप्रदेश है और न ही अशोक गहलोत कमलनाथ हैं।

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November 2020

आजादी के पीछे लाखों बेटे-बेटियों का त्याग और बलिदानः पीएम

दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भारत ने इस बार अपना 74वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर पर ध्वजारोहण किया और देश के संबोधित किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने तकरीबन डेढ़ तक भाषण दिया। बतौर प्रधानमंत्री सातवीं बार लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर, आत्मनिर्भर भारत, कोरोना संकट, आतंकवाद, रिफॉर्म, मध्यमवर्ग और कश्मीर का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आजादी के पीछे लाखों बेटे-बेटियों का त्याग और बलिदान है। आजादी का पर्व नए संकल्पों के लिए ऊर्जा का अवसर है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बिना नाम लिए चीन और पाकिस्तान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विस्तारवाद की सोच ने विस्तार के बहुत प्रयास किए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विस्तारवाद की सोच ने सिर्फ कुछ देशों को गुलाम बनाकर ही नहीं छोड़ा, बात वही पर खत्म नहीं हुई। भीषण युद्धों और भयानकता के बीच भी भारत ने आजादी की जंग में कमी और नमी नहीं आने दी।

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Rajasthan Diary
September 2020
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January 27, 2021