बिजनेस छिनने का डर
Outlook Hindi|December 28, 2020
छोटी कंपनियों को तिमाही रिटर्न फाइल करने की सुविधा, लेकिन टैक्स क्रेडिट में देरी के कारण बड़ी कंपनियां उनसे सामान नहीं खरीद रहीं
एस.के. सिंह

अशोक गुप्ता की दिल्ली से सटे साहिबाबाद इंडस्ट्रियल एरिया में छोटी सी औद्योगिक इकाई है। वे जेनरेटर और कई अन्य उपकरणों के पास बनाकर बड़ी कंपनियों को बेचते हैं। दो महीने पहले एक कंपनी ने उनसे पार्ट्स खरीदना बंद कर दिया। कारण बताया कि उनके तिमाही जीएसटी रिटर्न फाइल करने से इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलने में देर होती है और पूंजी फंस जाती है। गुप्ता अकेले नहीं, उन जैसे अनेक छोटे कारोबारियों को इस दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है सरकार ने भले उन्हें तिमाही रिटर्न फाइल करने की सहूलियत दे रखी हो, लेकिन वास्तव में यह सहूलियत उनके कारोबार में रोड़ा बन रही है। बड़ी कंपनियां, जिन्हें वे माल सप्लाई करती हैं, या तो उन पर हर महीने रिटर्न फाइल करने का दबाव बना रही हैं या उनसे माल खरीदना बंद कर रही हैं।

नियम है कि जब तक सप्लायर (छोटी) कंपनी रिटर्न फाइल नहीं करेगी, तब तक उससे सामान खरीदने वाली कंपनी को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) नहीं मिलेगा। जो छोटी कंपनियां बड़ी कंपनियों को नियमित रूप से सप्लाई करती हैं, उनका काम तो कमोबेश चल रहा है, लेकिन कम अवधि के लिए सप्लाई करने वाली छोटी कंपनियों को ज्यादा दिक्कतें आ रही हैं। खासकर उन्हें जो तिमाही जीएसटी रिटर्न फाइल करती हैं। यह समस्या काफी बड़ी है। इसकी वजह बताते हुए एसएमई चैंबर ऑफ इंडिया और महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल एंड इकोनॉमिक डेवलपमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रकांत सालुंखे कहते हैं, "यह समस्या इसलिए बड़ी है क्योंकि छोटे सप्लायरों की संख्या काफी अधिक है और बड़ी कंपनियां हमेशा किसी एक सप्लायर से सामान नहीं खरीदतीं, वे सप्लायर बदलती रहती हैं।" सालुंखे के अनुसार जीएसटी को लेकर एसोसिएशन के पास सात-आठ हजार कंपनियों की तरफ से शिकायतें आई हैं। एमएसएमई मंत्रालय की 2019-20 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार देश में 633.88 लाख एमएसएमई हैं। इनमें से 630.52 लाख लघु, 3.31 लाख छोटी और 5 हजार मझोली इकाइयां हैं।

सरकारी विभागों से पैसे भले छह महीने या सालभर बाद मिले, लेकिन कंपनियों को उस बिक्री पर जीएसटी समय पर जमा करना पड़ता है। इससे समस्या दोहरी होती है

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