मिली दारा शिकोह की कब्र
Outlook Hindi|July 27, 2020
औरंगजेब ने अपने जिस भाई का सिर कलम करवाया था, दिल्ली के एक नगर निगम इंजीनियर ने उसकी कब्र तलाशी, इसकी तलाश सदियों से थी
जीवन प्रकाश शर्मा

मध्यकालीन भारत के इतिहास के बारे में 'अगर ऐसा होता तो' सवाल किया जाए तो सबसे बड़ा सवाल होगा- औरंगजेब की जगह दारा शिकोह बादशाह होता तो क्या होता? आज भले ही लोग 'मुगल' और 'भारतीय' शब्दों के अलग अर्थ निकालते हों, लेकिन यह अंतर इतिहास में नहीं है। आजकल 'मुगल' का मतलब अमूमन उस दौर में बनी इमारतों, किलों, स्मारकों वगैरह से लिया जाता है। यह विचार अंग्रेजों के समय ही पनपा। हालांकि उस दौर में जो घटा, वह काफी पेचीदा था। अपनी मूल संस्कृति की खास छाप छोड़कर स्थानीयता का अंगीकार और संस्कृतियों का संगम अधिक गहरा था। लेकिन पश्चिम का खासकर औपनिवेशिक काल में जिस भारत से परिचय हुआ, वह उसके लिए परिवर्तनकारी था। हालांकि इस परिवर्तन की कड़ी की सबसे बड़ी शख्सियत थी दारा शिकोह। लेकिन दारा शिकोह खुद कहां था? वह दोआब की मिट्टी में कहीं लापता हो गया था।

अभी तक किसी भी अभिनेता ने दारा शिकोह की भूमिका नहीं निभाई, उसके लिए कोई मुगल-ए-आजम नहीं बनी (हालांकि करन जौहर ने हाल ही में ऐसा करने की घोषणा की)। उसके खिलाफ कोई राजनीतिक आंदोलन भी नहीं खड़ा हुआ। इसकी जरूरत भी नहीं थी। आप किस बात का विरोध करेंगे? उसने अपनी देख-रेख में उपनिषदों का अनुवाद करवाया इसलिए? उसी के बाद उपनिषद पश्चिम में पहुंचे, अन्यथा पश्चिम का बौद्धिक इतिहास अलहदा होता। अपने ही भाई औरंगजेब के आदेश के बाद दारा शिकोह का 1659 में सिर कलम कर दिया गया। इसके बाद कहीं उसकी चर्चा नहीं मिलती।

वह इस तरह गायब हुआ कि मौत के 300 साल बाद भी यह रहस्य बरकरार है कि उसे कहां दफनाया गया था। आखिरकार रोशनी की एक किरण मिली है जो हमें उसकी कब्र तक ले जाती है। इतिहास में उपलब्ध दस्तावेज विरोधाभासी हैं। क्या उसका सिर कलम किया गया था? क्या उसका सिर और धड़ अलग-अलग दफनाए गए थे? उस समय के किस रिकॉर्ड को विश्वसनीय माना जाए? भाई की कब्र के बारे में औरंगजेब का रवैया क्या था? इस बात पर काफी हद तक एक राय है कि दारा शिकोह को हुमायूं के मकबरे में दफनाया गया था, लेकिन यहां मुगल परिवार के सदस्यों की 140 कब्र हैं। इसलिए दारा शिकोह की कब्र कौन सी है, यह नहीं मालूम था। कोई इतिहासकार या अनुसंधानकर्ता अभी तक उसके करीब नहीं पहुंच सका था।

इस काम को पूरा करने का प्रयास ऐसी पार्टी की सरकार ने किया जो कम से कम मुगलों के प्रति प्रेम के लिए तो नहीं जानी जाती है। इसी साल फरवरी में लॉकडाउन से कुछ दिनों पहले केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने अतीत के इस रहस्य को सुलझाने का फैसला किया। आमतौर पर सरकारें जो करती हैं, इसने भी दारा की कब्र तलाशने के लिए देश के सात नामचीन वास्तुविदों की समिति बना दी। समिति कुछ करती, इससे पहले ही लॉकडाउन के चलते सब कुछ थम गया। तीन महीने बाद जब जीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा और समिति के सदस्य बैठक करने ही वाले थे कि एक घटना हो गई। दक्षिण दिल्ली नगर निगम के 49 वर्षीय सिविल इंजीनियर संजीव कुमार सिंह ने आश्चर्यजनक रूप से हुमायूं के मकबरे में दारा शिकोह की कब्र खोजने का दावा कर दिया।

संजीव का कहना है कि मकबरे के प्रथम तल पर एक कक्ष में दारा की कब्र पर लगा पत्थर (कुतबा) है। इसके साथ दो और कुतबा हैं जो अकबर के बेटों दनियाल और मुराद के हैं। सवाल है कि इतिहासकार अभी तक जिस दरवाजे तक पहुंच नहीं सके थे, एक नगर निगम इंजीनियर ने उसका ताला कैसे खोल दिया? इसके पीछे संजीव का चार साल का परिश्रम है। उन्होंने इतिहास पढ़ा, ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन किया, एक विद्वान जो भी करता है वह सब उन्होंने किया। इसी दिलचस्प खोज का नतीजा उनका यह मजबूत दावा है। इतना मजबूत कि सरकार की बनाई समिति के पांच सदस्यों ने उनकी तारीफ की है। इनमें पद्मश्री के.के. मुहम्मद, राष्ट्रीय संग्रहालय के पूर्व महानिदेशक डॉ. बी.आर. मनी और भारतीय पुरातत्व विभाग के तीन पूर्व निदेशक डॉ. सैयद जमाल हसन, बी.एम. पांडे और गुलाम सैयद ख्वाजा शामिल हैं।

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