खतरनाक जैव चिकित्सा कचरे से खतरे में जीवन
Open Eye News|October 2021
सारी दुनिया जानती है कि अस्पतालों और इससे जुड़े स्वास्थ्य संबंधी संस्थानों जैसे नर्सिंग होम, क्लिनिक, पशु चिकित्सालयों, ब्लक बैंक,शिक्षा संस्थानों, फोरेंसिक लैब तथा अनुसंधान लेब से निकलने वाला जैव चिकित्सा कचरा यानी बायोमेडिकल वेस्ट मानव जीवन के लिए कितना जानलेवा है मगर इसके बावजूद इस खतरनाक अपशिष्ट के सही निस्तारण के प्रति सरकार और इसको पैदा करने वाले संस्थान बेहद लापरवाह है। वर्ष 1989 से बने बायोमेडिकल वेस्ट मैनेटमेंट रूल्स को चार बार अलग-अलग तरीसे से लागू किया गया मगर आज तक इसका सही ढंग से पालन नहीं किया गया और न अभी किया जा रहा है। बल्कि यूं कहें कि इस नियम को लेकर कोई भी गंभीर ही नहीं है।
रमेश शर्मा

मानव जीवन को जीने के लिए चिकित्सीय देखभाल बेहद जरूरी है। पृथ्वी पर जन्मा हर प्राणी, पशु इत्यादि को जीवन यापन के दौरान कई बार व्याधियों का सामना करना पड़ता है और बीमारियों के इलाज हेतु व्यक्ति को अस्पताल, लैब, क्लिनिक आदि जगहों पर जाना पड़ता है जहां तमाम जांच और परामर्श के बाद जरूरत के मुताबिक इलाज किया जाता है। इन प्रक्रियाओं में जो जैव चिकित्सा कचरा यानी बायोमेडिकल वेस्ट उत्पन्न होता है उसमें से 10 फीसदी कचरा संक्रामक और 5 फीसदी खतरनाक अपशिष्ट होता है। इन स्वास्थ्य संस्थानों से उत्पन्न शेष 85 फीसदी कचरे का अगर सही ढंग से निस्तारण नहीं किया गया तो यह भी फैलकर हमारे पर्यावरण और समाज के लिए खतरनाक साबित हो जाता है। एक अनुमान के के मुताबिक पूरी दुनिया में बायोमेडिकल कचरे से होने वाली संक्रामक बीमारियों से मरने वालों की संख्या 52 लाख के आसपास है जिनमें से 40 लाख तो बच्चे ही रहते हैं। यह आंकड़ा बेहद खतरनाक है जिसकी गंभीरता को देखते हुए पूरी दुनिया में बायोमेडिकल वेस्ट के प्रबंधन के नियम बनाए गए।

बायोमेडिकल वेस्ट के स्रोत

• मानव अंग, टिश्यूज, पशुओं के अंग।

• माइक्रोबायोलाजी और बायो टेक्नोलॉजी कचरा, लेबोरेट्रीज कल्चर इत्यादि।

• अस्पतालों की उपयोगी सुई, सिरींज, कांच ।

• एक्सपायर्ड दवाईयां, बैण्डेज, प्लास्टर, खून से दूषित सामान, केमिकल वेस्ट

• ये सारे अपशिष्ट सरकारी और निजी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, वेटरनरी अस्पतालों, क्लिनिक्स, मेडिकल कैम्प, ब्लड डोनेशन कैम्प, लेबोरेटरी से निकलते हैं। अगर इन्हें समय के अंदर निस्तारित यानी डिस्पोजल नहीं किया गया तो ये कई खतरनाक संक्रामक बीमारियां फैला सकते हैं।

इन संस्थानों पर लागू है बायोमेडिकल वेस्ट अधिनियम

अस्पतालों, नर्सिंग होम्स, क्लिनिक, डिसपेंसरीज, वेटरनरी संस्थानों, पशुगृह, पैथोलाजिकल लैब, ब्लड बैंक, आयुष अस्पताल, क्लिनिकल स्थापना, रिसर्च या शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य शिविर, मेडिकल या सर्जिकल शिविर, रक्तदान शिविर, स्कूलों के प्राथमिक चिकित्सा कमरे, फोरेंसिक लैब और रिचर्स लैब्स । इन जगहों से प्रतिदिन काफी मात्रा में बायोमेडिकल वेस्ट उत्पन्न होता है जिसका कलेक्शन और डिस्पोजल वेस्ट डिस्पोजल ऑपरेटर द्वारा किया जाता है।

जिन संस्थानों पर ये अधिनियम लागू नहीं होते हैं

रेडियो एक्टिव कचरा, खतरनाक रयासन, लेड ऐसिड बैटरी, ई-वेस्ट और खतरनाक माइक्रोजीन।

पर्यावरण के लिए सबसे खतरनाक

स्वास्थ्य संस्थानों से निकलने वाला यह अपशिष्ट या आम भाषा में कहें तो चिकित्सीय कचरा मानव जाति के लिए कितना खतरनाक है इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। अमूमन यह देखा जाता है कि इन स्वास्थ्य संस्थानों से निकला कचरा सही कलेक्शन और सही निस्तारण के अभाव में गंदगी के रूप में पड़ा रहा है। खोज बताती है कि इन कचरों से टायफाइड, हेपेटाइटिस, पीलिया, पार्वोवायरस, त्वचा एलर्जी, प्लेग इत्यादि संक्रामक रोग हो सकते हैं। ये कचरा न सिर्फ वायु और जल को प्रदूषित करता है बल्कि हमारी मिट्टी को भी भारी नुकसान पहुंचाता है। अनुसंधान तो ये भी बताते हैं कि विगत दो वर्षों में फैली महामारी कोरोना भी बायोमेडिकल वेस्ट के सही डिस्पोजल नहीं होने से तेजी से फैली है।

कठोर नियम पर पालन कमजोर

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