जात न पूछो 'इश्क' की
India Today Hindi|January 12, 2022
तेजस्वी-रेचल के अंतरधार्मिक विवाह पर बस थोड़ी हलचल हुई लेकिन बिहारी समाज ने इसे ज्यादा हवा न देकर साबित कर दिया कि वो सचमुच प्रगतिशील है
पुष्यमित्र

सुप्रीम कोर्ट ने 'अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह के अधिकार' को भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत दिए गए अधिकारों का हिस्सा बताया है बावजूद इसके हमारे समाज है की बुनावट कुछ ऐसी है कि वह इंटरफेथ मैरिज यानी अंतरधार्मिक विवाह को इतनी सहजता से स्वीकार नहीं कर पाया है. खासतौर से तब जब इंटरफेथ मैरिज करने वाला को राजनेता हो. और वो राजनेता भी खांटी बिहारी हो.

पिछले दिनों जिस रोज अभिनेता विक्की कौशल की शादी अभिनेत्री कैटरीना कैफ के साथ हो रही थी, उसी दिन बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी अपनी प्रेयसी रेचल गोदिनाहो के साथ वैवाहिक बंधन में बंध गए. संयोग ऐसा रहा कि दोनों इंटरफेथ यानी दो अलग-अलग धर्म के मानने वालों की शादी थी और दोनों युगलों में दूल्हा हिंदू और दुल्हन क्रिश्चिन थे. मगर जहां शादी के बाद विक्की कौशल और कैटरीना के रोमांस और पारिवारिक जीवन के किस्से मीडिया में आने लगे. कुछ सवाल उठे भी. मसलन हिंदू मैरिज एक्ट के तहत हिंदू और क्रिश्चिन की आपस में शादी नहीं हो सकती.

तेजस्वी-रेचल विवाह के बाद जो पहली खबर निकली वह यह कि शादी से पहले रेचल का धर्म, नाम और टाइटल सब बदल दिया गया है. वह हिंदू हो गई है, उसका नाम अब रेचल नहीं राजेश्वरी होगा और तेजस्वी ने खुद आकर बताया कि उसका टाइटल तो 'यादव' ही होगा. जाहिर है नाम ये बदलाव उनकी राजनीतिक मजबूरी हो. पर दावा है कि सब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की सहमति से हुआ है. ये एक मिसाल भर है कि बिहार जैसे जागरुक प्रांत में शादी जैसा पर्सनल मामला भी कैसे पोलिटिकल हो जाता है. ये कोई पहला और अकेला मामला नहीं है. बिहार के कई बड़े राजनेताओं ने इंटरफेथ शादियां की हैं.

संघ के दफ्तर में हुई थी सुशील मोदी की शादी

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