क्यों इतना अहम है देवचा पचमी कोल ब्लॉक?
India Today Hindi|December 01, 2021
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए देवचा पचमी कोयला खनन परियोजना अब तक की सबसे बड़ी चुनौती होगी. इस परियोजना में काफी वन इलाकों और 12 आदिवासी गांवों सहित हजारों एकड़ भूमि का अधिग्रहण शामिल है.
रोमिता दत्ता

बंगाल में कोई भी यह बात नहीं भूला है कि 14 साल पहले, ममता सिंगूर में वाम मोर्चा सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई कर रही थीं, जिसके कारण टाटा समूह को अपनी कार परियोजना के लिए बंगाल छोड़ना पड़ा और राज्य पर उद्योगों के लिए 'गैर-दोस्ताना' सूबे का टैग चस्पां हो गया जो अभी तक जारी है. उस आंदोलन की वजह से ही माकपा सरकार 2011 में विधानसभा चुनाव हार गई और ममता के हाथ में सत्ता आई थी.

एक दशक के बाद, तृणमूल कांग्रेस की मुखिया खुद अब हॉट सीट पर हैं और वह इसके लिए कटबिद्ध हैं कि सिंगूर सरीखा प्रकरण इस बार न हो. किसी भी बड़े निवेश के लिए अधिक भूमि की जरूरत होती है और उसके साथ समस्याएं भी जुड़ी होती हैं. लेकिन वक्त को देखते हुए परियोजना की घोषणा के दो साल बाद मुख्यमंत्री ने आम सहमति बनाने तथा भूमि और आजीविका खोने वालों के लिए मुआवजा देने पर जोर दिया है. ऐसे में लग रहा है कि यह खनन परियोजना हकीकत बन सकती है. ममता ने यह भी सुनिश्चित किया है कि देवचा पचमी पर सरकारी अधिसूचना में कहीं भी अधिग्रहण' शब्द का उल्लेख नहीं हो. वे जोर देकर कहती हैं कि सरकार मालिकों से और उनकी सहमति से जमीन की सीधी खरीद के लिए जा रही है.

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