परिवारों को पहचान पत्र क्यों दे रही सरकार
India Today Hindi|December 01, 2021
हरियाणा की खट्टर सरकार की परिवार पहचान पत्र योजना का उद्देश्य सामाजिक कल्याण के लाभों की डिलिवरी में सुधार करने के लिए प्रमाणित नागरिकों का डेटा तैयार करना है
अनिलेश एस. महाजन

इस साल जनवरी में हरियाणा सरकार के 'परिवार पहचान पत्र (पीपीपी)' के लिए पंजीकरण कराते समय सोनीपत के नागरिक नवीन कुमार सरकारी रिकॉर्ड में खुद को मृतकों की सूची में देखकर स्तब्ध रह गए. पता चला कि उनके पिता टेक राम की जगह उन्हीं के नाम का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया था. टेक राम का देहांत 25 मई, 2018 को हो गया था. सरकारी आंकड़ों में नाम की गड़बड़ी और गलत पता समेत इस तरह की खामियों के मद्देनजर मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर को विश्वास है कि उनकी यूनिक फैमिली आइडी, पीपीपी योजना गेम चेंजर साबित होगी.

पीपीपी का उद्देश्य राज्य के सभी परिवारों का प्रमाणित डेटा तैयार करना है ताकि पहचान संबंधी गलतियों की वजह से नागरिकों को सामाजिक कल्याण के लाभों से वंचित न किया जाए. हरियाणा 1 नवंबर को यूनीक फैमिली आइडी योजना लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया. इससे जन्म, मृत्यु और संपत्ति का पंजीकरण, छात्रवृत्ति समेत 456 सेवाएं और विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रम जुड़े होंगे. राज्य का 2021-22 का कुल खर्च 1.55 लाख करोड़ रु. तय किया गया है और खट्टर को उम्मीद है कि सामाजिक क्षेत्र का खर्च इस पीपीपी के जरिए ज्यादा से ज्यादा लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचेगा.

स्मार्ट डिलिवरी

इस योजना के लिए डेटा जुटाने का केंद्र चंडीगढ़ में मुख्यालय वाला सिटीजन रिसोर्स इन्फॉर्मेशन डिपार्टमेंट (सीआरआइडी) है. यह स नोडल एजेंसी सीधे खट्टर को रिपोर्ट करती है. युवा पेशेवरों को मौके पर किए गए सर्वेक्षणों के जरिए जुटाए गए डेटा को प्रमाणित और उसे विभिन्न विभागों के लिए प्रॉसेस करने में मसरूफ देखा जा सकता है. नागरिकों का सभी प्रमाणित डेटा पीपीपी नंबर के जरिए अधिकारियों को उपलब्ध है. इससे किसी भी तरह की सरकारी सेवा हासिल करने के लिए सहायक दस्तावेज लगाने की जरूरत खत्म हो जाएगी. मिसाल के तौर पर, हरियाणा की नागरिक श्रुति मलिक और उनके पति को अपने बच्चे के जन्म का पंजीकरण कराने के लिए अपने आधार के ब्योरे जमा करने की जरूरत नहीं पड़ी. श्रुति के पीपीपी नंबर से न केवल सारी जानकारी मिल गई बल्कि स्तनपान करा रही माताओं से जुड़ी उन सारी योजनाओं का ब्यौरा मिल गया जिनकी वे हकदार हैं, साथ ही उनका आवासीय पता और बैंक अकाउंट नंबर भी मिल गया, जिसमें सरकार उन्हें मिलने वाले लाभ को हस्तांतरित कर सकती है.

पीपीपी नंबर के दो हिस्से हैं-एक सातनंबर की फैमिली आइडी, और आठवां अंक परिवार विशेष के सदस्यों की सूचना से जुड़ा है. नागरिकों को दिए जा रहे पीपीपी स्मार्ट कार्ड में राज्य में उनकी संपत्ति का डेटा, आय, किसी में तरह की पेंशन के साथ ही छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य और उन्हें उपलब्ध दूसरे लाभ की जानकारी है. खट्टर का कहना है, "हकदार लाभार्थियों की प्रायः कोई आवाज नहीं होती. इसका विचार शासन को उनके द्वार तक ले जाना है."

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