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India Today Hindi|December 01, 2021
कोविड-19 बच्चों का टीका
सोनाली आचार्जी

गुरुग्राम की श्रेया नांगिया दो बच्चों की मां हैं. उन्होंने मार्च 2020 में कोविड महामारी की शुरुआत के बाद से ही बच्चों को अपने चार बेडरूम के घर से बाहर नहीं निकलने दिया. उनकी 12 और 14 साल की दोनों बेटियों को करीब 20 महीने से घर में बंद होने की हताशा और आक्रोश से उबरने के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग की शरण लेनी पड़ी. पर 48 वर्षीया नांगिया कहती हैं कि वे उनके सामाजिक मेलजोल का जोखिम नहीं उठा सकती क्योंकि परिवार में उनके 86 वर्षीय पिता भी रहते हैं जो डायबिटिक और दिल के मरीज हैं. वे कहती हैं, "मेरे पति घर से ही अपना कारोबार चलाते हैं और मैं गृहिणी हूं. हमने अपने बच्चों को टीके लगने तक घर पर ही पढ़ने देने की विशेष अनुमति ली है. अपने बच्चों को तकलीफ उठाते देखना बहुत कष्टदायक है, पर जिंदगी का जोखिम इस कष्ट से कहीं ज्यादा है.'

जब 20 अगस्त, 2021 को 12 से 18 साल के बच्चों को टीके लगाने का ऐलान हुआ और भारतीय कंपनी जायडस कैडिला की सूई-मुक्त डीएनए वैक्सीन जायकोव-डी को आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिली, तो नांगिया परिवार खुशी से चहक उठा. मगर दो महीने बाद भी जब टीके लगने के बारे में कुछ पता नहीं चला, तो उत्साह ठंडा पड़ गया. नांगिया कहती हैं कि दो महीने पहले उनकी बेटियां वैक्सीन लगवाने वालों की कतार में शायद सबसे आगे होती, पर अब वे दावे से ऐसा नहीं कह सकतीं. वे सवाल करती हैं, 'क्या यह सुरक्षित है? हम ऑनलाइन खबरें पढ़ते रहते हैं कि बच्चों की इस वैक्सीन के लिए और परीक्षणों की जरूरत है जिसमें वक्त लगेगा. और साइड इफेक्ट? उसका भी पता नहीं.

नांगिया अकेली नहीं हैं. चंडीगढ़ की पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन ऐंड रिसर्च और पुदुच्चेरी की जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन ऐंड रिसर्च के शोधकर्ताओं ने 770 मरीजों पर ऑनलाइन सर्वे किया. इसके अनुसार, करीब 77 फीसद मरीजों ने कहा कि वे अपने बच्चों को टीके नहीं लगवाना चाहते. क्यों भला? इसके कारण हैं-सुरक्षा और प्रभाव के बारे में चिंता (86.4 फीसद), साइड इफेक्ट (78.2 फीसद) और यह विचार कि बच्चों को हल्की-फुल्की बीमारी होते रहने के रुझान के कारण उन्हें टीके लगवाने की जरूरत नहीं (52.8 फीसद).

"महामारी के चलते कई बच्चे घरों में बंद हैं. यह उनकी सेहत या भविष्य के लिए अच्छा नहीं. जिंदगी को फिर सामान्य बनाने के लिए टीके लगवाना जरूरी है" डॉ. अनिल सचदेवा बाल रोग विशेषज्ञ, सर गंगाराम हॉस्पिटल, दिल्ली "

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