शीर्ष पर हमला
India Today Hindi|December 01, 2021
भारत में माओवादी उग्रवाद के लिए नवंबर बहुत ही खराब महीना साबित हुआ. चार शीर्ष नेताओं का काम तमाम होने के बाद उनका नेतृत्व चरमरा गया
अमरनाथ के. मेनन, किरण डी. तारे और अमिताभ श्रीवास्तव

नवंबर की 13 तारीख को, जब गढ़चिरौली पुलिस को खुफिया जानकारी मिली कि महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा के पास ग्यारपट्टी के जंगलों में प्रतिबंधित माओवादी इकट्ठा हुए हैं, तो उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी कि एक इनामी माओवादी उनकी पकड़ में आएगा. लगभग 10 घंटे तक सी-60 फोर्स के जवानों ने माओवादियों को मुठभेड़ में उलझाए रखा. उनमें से 26 माओवादी मारे गए. मरने वालों में 61 वर्षीय मिलिंद तेलतुंबड़े भी था, जो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य था. केंद्रीय समिति एक कोर समूह है, जो पूरे भारत में अलग-अलग इलाकों में माओवादियों और उनके समर्थकों के अलगअलग समूहों की गतिविधियों का समन्वय करता है. वह वही व्यक्ति था, जिसने कथित तौर पर महाराष्ट्र-मध्य प्रदेशछत्तीसगढ़ (एमएमसी) क्षेत्र में माओवादियों का नेतृत्व किया था. सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि तेलतुंबड़े के मारे जाने से इलाके में माओवादी काफी कमजोर हो गए हैं.

एक दिन पहले, 12 नवंबर को सुबह होने से पहले, झारखंड पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की एक संयुक्त टीम ने झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के गिद्दीबेड़ा टोल गेट पर एक सफेद महिंद्रा स्कॉर्पियो को रोका; उसमें बैठे लोगों को दूसरी कार में बिठाकर रांची ले जाया गया. एक घंटे की लगातार पूछताछ के बाद, 82 वर्षीय वयोवृद्ध प्रशांत बोस ने खुद को देश के मोस्ट वांटेड माओवादियों में से एक किशनदा बताया. वह गिरिडीह के पारसनाथ पहाड़ियों में अपने ठिकाने से लौट रहा था और पश्चिम बीरभूम के सारंडा साल जंगल की ओर जा रहा था, जहां उसका कई वर्षों से अड्डा है.

केंद्रीय समिति और भाकपा (माओवादी) पोलितब्यूरो का सदस्य बोस अपनी 64 वर्षीया पत्नी शीला मरांडी और चार अन्य माओवादियों के साथ यात्रा कर रहा था. शीला केंद्रीय समिति की पहली महिला सदस्य है. बोस की गिरफ्तारी (उस पर 1 करोड़ रु. का इनाम था) को 24 नवंबर, 2011 को पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर जिले के बरीशोल जंगल में पोलितब्यूरो के सदस्य माल्लोजुला कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी की मुठभेड़ में मौत के बाद सुरक्षाबलों की सबसे बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है.

दरअसल, प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादियों) के लिए नवंबर एक बुरा महीना रहा है. केरल पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस)ने 9 नवंबर को वकील से माओवादी बने और केंद्रीय समिति के सदस्य 51 वर्षीय बी.जी. कृष्णमूर्ति उर्फ विजय और एक अन्य माओवादी (दोनों निहत्थे) को पकड़ा, जब वे कर्नाटक से केरल तक सड़क मार्ग से यात्रा कर रहे थे. एटीएस ने उसे कई मामलों में मुकदमा चलाने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) को सौंप दिया. केवल पांच दिनों में केंद्रीय समिति के चार सदस्यों को पकड़ना या मारना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि है. पिछले कुछ महीनों में केंद्रीय समिति के दो अन्य सदस्यों की भी मृत्यु हो गई-21 जून को तेलंगाना के 52 वर्षीय हरिभूषण उर्फ यापा नारायण या लक्मू दादा और 14 अक्तूबर को आंध्र प्रदेश के 63 वर्षीय अक्कीराजू हरगोपाल उर्फ रामकृष्ण या आरके की छत्तीसगढ़ के जंगल में बीमार पड़ने के बाद मृत्यु हो गई.

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