वापसी की उड़ान
India Today Hindi|October 27, 2021
एयर इंडिया का निजीकरण देर से 1 सही केंद्र की मोदी सरकार के लिए बड़ी राहत की तरह होनी चाहिए, जो कारोबार से छुटकारा पाकर राजकाज पर फोकस करने के वादे पर अपनी प्रत्यक्ष नाकामी पर काफी आलोचना की शिकार हो चुकी है. हालांकि एयर इंडिया के लिए टाटा घराने की 18,000 करोड़ रुपए की बोली कोई महाराजा की कीमत नहीं था, फिर भी टाटा की बोली केंद्र सरकार के रिजर्व प्राइस से 40 फीसद अधिक और दूसरी बोली लगाने वाले स्पाइस जेट के मालिक अजय सिंह से करीब 20 फीसद अधिक थी. हालांकि, इस सौदे से सरकार को 2,700 करोड़ रुपए ही मिलेंगे, बाकी 15,300 करोड़ रुपए का कर्ज टाटा के मत्थे रहेगा.
एम.जी. अरुण

एयर इंडिया तो मोदी सरकार की इस साल कई सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश की फेहरिस्त में केवल एक है. केंद्र ने 2021-22 के लिए विनिवेश/संपत्ति मौद्रीकरण के लिए 1.75 लाख रुपए का लक्ष्य रखा है. हालांकि इसको लेकर प्रगति काफी धीमी है. भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया जैसी कंपनियों की बिक्री अभी होनी है. सरकार का प्रस्ताव दो सरकारी बैंकों और एक सार्वजनिक बीमा कंपनी के निजीकरण का भी है.

इस कोशिश में केंद्र सरकार का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं रहा है. मोदी सरकार ने 2014-15 और 2020-21 के बीच विनिवेश से 6.57 लाख करोड़ रुपए उगाहने का लक्ष्य रखा है, लेकिन वह करीब 60 फीसद या 4.04 लाख करोड़ रुपए ही उगाह पाई है. वहीं, सरकार ने 2020-21 में ही 2.1 लाख ने करोड़ रुपए उगाहने की उम्मीद की थी, लेकिन वित्तीय वर्ष के आखिरी में बाजार में उत्साह के बावजूद करीब 10 फीसद (21,000 करोड़ रु.) ही जुट पाया है. एयर इंडिया की खरीद के बाद अब टाटा समूह के जिम्मे कुल मिलाकर तीन एयरलाइन हो गई हैं. एयर इंडिया सौदे की औपचारिकताएं दिसंबर में पूरी होनी है. टाटा घराना विस्तारा का संचालन सिंगापुर एयरलाइन्स के साथ करता है और किफायती एयरलाइन एयरएशिया इंडिया में मलेशियाई एयर एशिया के साथ उसकी साझेदारी है.

Continue reading your story on the app

Continue reading your story in the magazine

MORE STORIES FROM INDIA TODAY HINDIView All

क्रिप्टो करेंसी का जुनून

क्रिप्टो के उन्माद को हवा दे रहा है डिजिटल मुद्रा में युवा भारतीयों का 6 अरब डॉलर का निवेश. क्या यह बुलबुला है जो फूटने का इंतजार कर रहा है?

1 min read
India Today Hindi
December 01, 2021

क्यों इतना अहम है देवचा पचमी कोल ब्लॉक?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए देवचा पचमी कोयला खनन परियोजना अब तक की सबसे बड़ी चुनौती होगी. इस परियोजना में काफी वन इलाकों और 12 आदिवासी गांवों सहित हजारों एकड़ भूमि का अधिग्रहण शामिल है.

1 min read
India Today Hindi
December 01, 2021

घरों में होने लगी घुसपैठ

अगले विधानसभा चुनावों के लिए पाले अब साफ-साफ खिंचने लगे. भाजपा ने सपा के मजबूत इलाकों में तो सपा ने भाजपाई गढ़ों में घुसपैठ के दांव चलने शुरू किए

1 min read
India Today Hindi
December 01, 2021

सवाल+जवाब - अपनी जिंदगी का ऐंकर

नेटफ्लिक्स पर आई नई फिल्म धमाका में कार्तिक आर्यन एक अलग अंदाज वाले न्यूज ऐंकर के किरदार में हैं. और उनके मुताबिक, असल जिंदगी में वे एक ऐसे दौर में हैं जहां उनका मनचाहा सब कुछ उन्हें मिल रहा है

1 min read
India Today Hindi
December 01, 2021

परिवारों को पहचान पत्र क्यों दे रही सरकार

हरियाणा की खट्टर सरकार की परिवार पहचान पत्र योजना का उद्देश्य सामाजिक कल्याण के लाभों की डिलिवरी में सुधार करने के लिए प्रमाणित नागरिकों का डेटा तैयार करना है

1 min read
India Today Hindi
December 01, 2021

चलना है जरा संभल-संभल के

कोविड-19 बच्चों का टीका

1 min read
India Today Hindi
December 01, 2021

शीर्ष पर हमला

भारत में माओवादी उग्रवाद के लिए नवंबर बहुत ही खराब महीना साबित हुआ. चार शीर्ष नेताओं का काम तमाम होने के बाद उनका नेतृत्व चरमरा गया

1 min read
India Today Hindi
December 01, 2021

उग्रवाद की वापसी!

म्यांमार सीमा के पास एक सैन्य काफिले पर भीषण हमले ने राज्य में हालिया अतीत में कायम शांति को छिन्न-भिन्न कर दिया है और भारत में सबसे लंबे चलने वाले विद्रोहों में से एक को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं

1 min read
India Today Hindi
December 01, 2021

अब लंबा कार्यकाल

नौकरशाही का विस्तार

1 min read
India Today Hindi
December 01, 2021

"दुनिया के मालदार के मुल्क पैसे के मामले में दी गई जबान पूरी करने में नाकाम रहे"

ग्लासगो में हाल ही संपन्न जलवायु परिवर्तन सम्मेलन की पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस बात के लिए खासी आलोचना की कि उसने दुनिया को बचाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए. लेकिन कुछ बड़ी पहलकदमियों के लिए इसकी तारीफ भी हुई. इस सम्मेलन में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही. केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव वहां पर भारत के मुख्य वार्ताकार थे. ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा के साथ एक खास बातचीत में उन्होंने सम्मेलन में हासिल उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा की और यह भी बताया कि क्या कुछ था जो हाथ आने से रह गया. पेश हैं बातचीत के चुनिंदा अंशः

1 min read
India Today Hindi
December 01, 2021