दाने-दाने में है दम पर सेहतमंद न हो जाएं बेदम
India Today Hindi|September 29, 2021
सरकार की ओर से फोर्टिफाइड चावल को राष्ट्रीय मानक बनाना सुविचारित कदम है, लेकिन विशेषज्ञ पोषक तत्वों की अधिकता से होने वाले जोखिमों के प्रति कर रहे हैं आगाह
अमरनाथ के. मेनन

भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि सरकार 2024 तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और महिलाओं और बच्चों को लक्षित खाद्य योजनाओं के माध्यम से ऊपर से मिलाए गए पोषक तत्वों से युक्त चावल (फोर्टिफाइड राइस) की आपूर्ति करेगी. खून की कमी या एनीमिया और कुपोषण से निपटने की दिशा में बड़े प्रयास के रूप में, केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय 2021-22 से एकीकृत बाल विकास सेवा (आइसीडीएस) योजना और मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएमएस) के माध्यम से फोर्टिफाइड चावल का वितरण शुरू करेगा. इसमें 112 आकांक्षी जिलों (खराब सामाजिक-आर्थिक संकेतक वाले) पर विशेष जोर रहेगा. इस वर्ष के लिए, केंद्र ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत पीडीएस, एमडीएमएस और आइसीडीएस योजना के लिए 3.28 करोड़ टन चावल आवंटित किया है. लेकिन 2024 तक चावल की पूरी आपूर्ति को फोर्टिफाइड चावल के रूप में उपलब्ध कराना, कठिन लक्ष्य लगता है.

राइस फोर्टिफिकेशन की प्रक्रिया में अनाज में आयरन, विटामिन बी12 और फोलिक एसिड जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों से समृद्ध किया जाता है ताकि पूरे देश में बड़े पैमाने पर कुपोषित और इसके जोखिम वाली बड़ी आबादी को पोषण उपलब्ध कराया जा सके. भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्रधिकरण (एफएसएसएआइ) के मानदंडों के अनुसार, एक किलो फोर्टीफाइ चावल में आयरन (28 एमजी से 42.5 एमजी), फोलिक एसिड (75-125 एमसीजी) और विटामिन बी 12 0.75-1.25 एमजी) होना चाहिए.

आयरन की कमी और एनीमिया से पीड़ित लोगों की दुनिया में सबसे ज्यादा संख्या भारत में है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस-4) के अनुसार, 59 प्रतिशत बच्चों और 50 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं की कमी है. बाल और मातृ कुपोषण की देश में बीमारियों के बोझ में 15 प्रतिशत की हिस्सेदारी है. साल 2015-16 में हुए एनएफएचएस-4 में पाया गया कि पांच साल तक के बच्चों में कम वजन, बौनापन और दुर्बलता का औसत क्रमश: 35.7, 38.4 और 21 प्रतिशत है.

केंद्र सरकार का मानना है कि अतिरिक्त पोषक तत्वों से युक्त फोर्टिफाइड चावल, कुपोषण से लड़ने में रामबाण साबित होगा. सरकार नीति आयोग और एफएसएसएआइ के अलावा टाटा ट्रस्ट, विश्व खाद्य कार्यक्रम, पाथ और न्यूट्रिशन इंटरनेशनल जैसे गैर-सरकारी हितधारकों के साथ परामर्श से आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और आपूर्ति संबंधी अन्य परेशानियों को दूर करने पर काम कर रही है. दुनिया में उत्पन्न कुल चावल का पांचवां हिस्सा भारत में पैदा होता है. प्रति व्यक्ति 6.8 किलो प्रति माह खपत के साथ, यह चावल का सबसे बड़ा उपभोक्ता है.

आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ में 2019-20 से फोर्टिफाइड चावल आपूर्ति की एक पायलट योजना (हर राज्य के एक जिले में) चल रही है और इसे विस्तार देते हुए मध्य प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, केरल और झारखंड में भी शुरू करने की योजना है. परियोजना के प्रारंभिक आंकड़े बताते हैं कि लाभार्थी फोर्टिफाइड चावल पसंद कर रहे हैं.

किसी भी खाद्य पदार्थ को फोर्टिफाइ करने के पीछे उद्देश्य भोजन की पोषण गुणवत्ता में सुधार करना है ताकि जो लोग अल्प जोखिम में हैं उन्हें स्वास्थ्यकर आहार देकर स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया जा सके. इसके लिए तय मात्रा में खाद्य योजकों या फूड एडिटिव का उपयोग करना होता है.

क्या फोर्टिफाइड चावल से लाभ होगा?

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