गुजरात का गेमप्लान
India Today Hindi|September 29, 2021
गुजरात में मुख्यमंत्री बदलने के पीछे दो मकसद हैं: पाटीदार समुदाय को संतुष्ट करना और भाजपा कार्यकर्ताओं में असंतोष से निपटना. क्या नए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल 2022 के चुनाव से पहले सबको एकजुट रख पाएंगे?
किरण डी. तारे

मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के इस्तीफे की घोषणा के अगले दिन 12 सितंबर को जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक नया नेता 'चुनने के लिए गांधीनगर में पार्टी मुख्यालय 'कमलम' पर इकट्ठा हुए, तो माहौल फीका ही था. दोपहर करीब चार बजे केंद्रीय पर्यवेक्षक नरेंद्र तोमर ने रूपाणी के उत्तराधिकारी के तौर पर भूपेंद्र पटेल के नाम की घोषणा की तो चकाचौंध से दूर रहने वाले इस विधायक को खोजने के लिए अफरा-तफरी मच गई. हॉल के कोने में अकेले बैठे पटेल को ढूंढने में पार्टी कार्यकर्ताओं को करीब पांच मिनट लगे. वे मंच पर आए तो सबसे पहले रूपाणी ने उनका अभिवादन किया. तोमर ने उनसे आग्रह किया कि विधायकों से दो शब्द कहें. नए मुख्यमंत्री इस कदर अभिभूत थे कि ज्यादा कुछ नहीं कह पाए. उन्होंने सबको दिल खोलकर धन्यवाद दिया और बैठ गए.

शीर्ष पद के लिए पहली-बार विधायक और आरएसएस के अंशकालिक कार्यकर्ता 59 वर्षीय भूपेंद्र पटेल का चयन गुजरात में भाजपा की कार्यप्रणाली में एक और बदलाव का इशारा है. अहमदाबाद शहरी विकास प्राधिकरण (एयूडीए) के पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र की किस्मत तब पलटी जब गुजरात की मुख्यमंत्री (2014-16) और उत्तर प्रदेश की मौजूदा राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें ज्यादा बड़ी राजनैतिक भूमिका के लिए चुना. इंजीनियर से बिल्डर और फिर नेता बने भूपेंद्र 2010 तक थलतेज नगर परिषद के अध्यक्ष थे जब इस क्षेत्र को अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) में मिला दिया गया. इस तरह 2010 में अभूतपूर्व स्थिति में पहली बार एएमसी में आने के बाद भूपेंद्र इस ताकतवर निकाय की स्थायी समिति के अध्यक्ष बने.

एएमसी में उनके बेदाग कार्यकाल की बदौलत 2015 में उन्हें एयूडीए के अध्यक्ष की कुर्सी मिली. दो साल बाद आनंदीबेन जब मध्य प्रदेश की राज्यपाल बनकर भोपाल गईं तो उन्होंने अहमदाबाद के घटलोदिया विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से उन्हें अपना उत्तराधिकारी चुना. भूपेंद्र ने यह सीट 1,17,000 वोटों से जीती. 2017 के चुनाव में कोई और उम्मीदवार इतने ज्यादा वोटों के अंतर से नहीं जीता.

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