शटर गिराकर चल दिए !
India Today Hindi|September 29, 2021
ऑटोमोबाइल सेक्टर
एम.जी. अरुण

अपने कामकाज के केवल 25 वर्षों में किसी ऑटो निर्माता के लिए यह बहुत लंबा समय नहीं होता-अमेरिका की फोर्ड मोटर कंपनी ने भारत छोड़ने का फैसला कर लिया है. ऐसा भी नहीं कि मॉडल टी, थंडरबर्ड और मस्टैंग जैसी कारों के इस प्रतिष्ठित निर्माता के लिए ये 25 साल आसान थे. फोर्ड को भारत में जहां आइकॉन, एंडेवर और ईकोस्पोर्ट जैसे मॉडलों में बड़ी सफलता मिली, वहीं मोंडेओ और फ्यूजन सरीखे मॉडलों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया. कंपनी ने अपने कार्य-व्यापार में दो अरब डॉलर (करीब 14,700 करोड़ रुपए) से ज्यादा का घाटा दर्ज किया था और इसके वाहनों की मांग कमजोर थी. फोर्ड इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अनुराग मेहरोत्रा के मुताबिक, कंपनी दीर्घकालिक लाभ का स्थायी रास्ता नहीं खोज पाई.

महामारी का हवाला देते हुए 2019 में महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के साथ साझा उद्यम को बंद करने से फोर्ड के लिए स्थिति और खराब हो गई. साझा उद्यम का लक्ष्य भारत में फोर्ड वाहनों के विकास, विपणन और वितरण के साथ-साथ कुछ फोर्ड और महिंद्रा उत्पादों को ऊंची विकास दर वाले अंतरराष्ट्रीय बाजारों में वितरित करना था. साझा उद्यम खत्म होने के साथ ही भारतीय बाजार में फोर्ड के जीवित रहने की संभावना धूमिल हो गई.

फोर्ड का कहना है कि वह 2021 की चौथी तिमाही तक अपने साणंद (गुजरात) संयंत्र को बंद कर देगी और 2022 तक चेन्नै संयंत्र में वाहन और इंजीनियरिंग मैन्युफैक्चरिंग बंद कर देगी. इस फैसले से देश भर में उसके 4,000 कर्मचारियों पर असर पड़ेगा. साणंद संयंत्र की सालाना क्षमता 2,40,000 वाहन उत्पादन की है और चेन्नै संयंत्र में 2,00,000 वाहन सालाना तैयार हो सकते हैं. खैर, फोर्ड भारत में आयात के जरिए कारें बेचती रहेगी. इस बारे में आए समाचारों के मुताबिक, इनमें मस्टैंग माक-ई, मस्टैंग और रेंजर जैसे हाइ-एंड मॉडल होंगे. कंपनी मौजूदा ग्राहकों को सेवा देती रहेगी.

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