आखिर सब कुछ इतना महंगा क्यों हो गया?
India Today Hindi|September 22, 2021
भारत धीरे-धीरे महामारी से हुए आर्थिक नुक्सान से उबर रहा है लेकिन महंगाई में लगातार उछाल से जंग जारी है.
श्वेता पुंज

सीपीआइ (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक जिसमें खाने-पीने की चीजें, आवास, कपड़े, परिवहन, इलाज, शिक्षा और ऐसे दूसरे खर्च शामिल हैं) पर आधारित महंगाई जून 2019 में 3.8 फीसद से करीब दोगुनी बढ़कर जून 2021 में 6.26 फीसद हो गई. यह लगातार दूसरा महीना था जब महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) की 6 फीसद की सीमा से ऊपर थी. हालांकि यह जुलाई में कुछ कम होकर तीन माह के निचले स्तर 5.59 फीसद पर आ गई.

खाने-पीने की चीजों (खासकर दलहन और तेल) से लेकर ईंधन और बिजली तक सभी चीजों के दाम बढ़े, खाद्य महंगाई जून में 5.15 फीसद थी जो जुलाई में घटकर 3.96 फीसद पर आ गई, जबकि खाद्य तेलों और वसा की मंहगाई जून में 34.78 फीसद और जुलाई में 32.53 फीसद रही. (इस वर्ग की चीजें अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उतार-चढ़ाव से खासी प्रभावित होती हैं क्योंकि भारत खाद्य तेल की अपनी आधी जरूरत आयात से पूरी करता है.) ईंधन और बिजली की महंगाई जून में 12.68 फीसद से बहुत मामूली घटकर जुलाई में 12.38 फीसद पर आ गई. थोक महंगाई सूचकांक (डब्ल्यूपीआइ) पर आधारित महंगाई जुलाई में कुछ घटकर 11.16 फीसद रही, जो जुलाई 2020 में -0.25 फीसद थी.

भारत में महंगाई तेज मांग या बढ़ते वेतनों की वजह से नहीं बढ़ी. केंद्रीय उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय के बयान में कहा गया कि जुलाई 2021 में महंगाई की ऊंची दर मुख्यतः निचले आधार प्रभाव और कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस के साथ खनिज तेल, बुनियादी धातुओं, खाद्य उत्पादों, कपड़ों, रसायनों और रासायनिक उत्पादों सहित दूसरी चीजों के दाम में बढ़ोतरी की वजह से थी.

Continue reading your story on the app

Continue reading your story in the magazine

MORE STORIES FROM INDIA TODAY HINDIView All

सत्ताधीश

नौकरशाह नरेंद्र मोदी सरकार के लिए अपरिहार्य हैं. सरकार के पहले कार्यकाल में यह यथार्थबोध अच्छा रहा. अपने दूसरे कार्यकाल के बीच में सरकार ने प्रमुख नौकरशाहों के एक समूह पर इतनी निर्भरता बढ़ा दी है, जितना हाल के वर्षों में किसी प्रशासन में शायद ही देखा गया हो. अधिकारी विनिवेश से लेकर रक्षा मंत्रालय के पुनर्गठन तक न केवल अहम नीतिगत निर्णय लेते हैं, बल्कि उन्हें लागू भी करते हैं. उन्हें सरकार के प्रदर्शन के लिए निर्णायक माना जाता है. दक्षता और उपलब्धि का पुरस्कार सेवाविस्तार के रूप में मिलता है. प्रमुख नौकरशाह सेवानिवृत्ति के बाद पीएमओ में सलाहकार रख लिए जाते हैं. इंदिरा गांधी के बाद से मोदी सरकार का प्रधानमंत्री कार्यालय यकीनन सबसे ताकतवर है. यह राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर अर्थव्यवस्था और कोविङ-19 प्रबंधन तक शासन के हर पहलू को प्रभावित करता है. पूर्व नौकरशाह केंद्रीय मंत्रिमंडल तक पहुंच रहे हैं. जुलाई 2021 के फेरबदल के बाद कैबिनेट में रिकॉर्ड पांच पूर्व ब्यूरोक्रेट हैं-हरदीप पुरी, एस. जयशंकर, आर.के. सिंह, आर.पी. सिंह और अश्विनी वैष्णव. पीएमओ में दो प्रमुख पूर्व लोकसेवकप्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्र और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को भी कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है. नौकरशाही का स्वर्ण युग है यह !

1 min read
India Today Hindi
November 03, 2021

सत्ता के खिलाड़ी

पिछले साल पूरी दुनिया पर धावा बोल देने वाली कोविड महामारी ने न केवल लाखों लोगों की जाने लीं और अर्थव्यवस्थाओं को बर्बाद कर दिया, बल्कि कई भूभागों की राजनैतिक व्यवस्था में भी रद्दोबदल कर डाला. भारत विनाशकारी वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में था, पर यहां कोविड का राजनैतिक असर अभी तक सामने नहीं आया है. मार्च 2020 में महामारी का प्रकोप होने के बाद छह राज्यों में चुनाव हुए, सभी अप्रैल 2021 की शुरुआत में देश में कोविड की दूसरी लहर की दस्तक से पहले. लेकिन इन राज्यों के चुनाव अभियान में कोविड चुनावी मुद्दा नहीं था. देश की राजनैतिक सत्ता व्यवस्था मोटे तौर पर जस की तस बनी हुई है, जिसमें आरएसएस-भाजपा का तंत्र शीर्ष पर मजबूती से कायम है. कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली भाजपा सरकार के खिलाफ अकेली राष्ट्रीय आवाज बने हुए हैं, पर हाल के सियासी आंदोलनों ने नए सत्ता केंद्रों के रूप में क्षेत्रीय क्षत्रपों को उभरते देखा. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस साल हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें सत्ता से बेदखल करने के लिए चलाए गए भाजपा के जबरदस्त अभियान का न केवल डटकर मुकाबला किया, बल्कि अब खुद को मोदी के विकल्प के तौर पर भी पेश कर रही हैं. इस चाहत में उन्हें मराठा दिग्गज शरद पवार के समर्थन की दरकार होगी. इंडिया टुडे की 2021 की सियासी सत्ता वाली सूची देश में राजनैतिक विमर्श को दिशा देने वाले सबसे मजबूत खिलाड़ियों का खाका पेश करती है.

1 min read
India Today Hindi
November 03, 2021

आधे इधर, आधे उधर जाएंगे?

सिनेमाघरों के खुलने के ऐलान के साथ ही इससे जुड़े हजारों लोगों के चेहरे खिले. दूसरी ओर अब दर्शकों के उधर मुड़ने की संभावनाओं के मद्देनजर ओटीटी प्लेटफॉर्म भी बदल रहे रणनीति

1 min read
India Today Hindi
November 03, 2021

शिखर समूह

इसे चाहे लचीलेपन की ताकत कह लें, लेकिन आगे के पन्नों पर नमूदार 50 दिग्गजों में से ज्यादातर ऊंचे और असरदार लोगों की हमारी सालाना फेहरिस्त में पिछले कई बार से बने हुए हैं. इसमें कोई शक नहीं कि वैश्विक स्वास्थ्य संकट और उसकी वजह से घोर आर्थिक बदहाली के दौरान सत्ता, संपदा और शोहरत का कवच साथ होना अच्छा है और महामारी की शुरुआत के बाद यह 'रसूखदार लोगों' की हमारी दूसरी फेहरिस्त है. फिर भी ऐसे साल में जब बहुत-से नीचे की ओर लुढ़क रहे हों, कामयाबी की बागडोर थामे रखना सिर्फ विशेषाधिकार के बूते संभव नहीं. ऐसे अनिश्चित दौर में देश के कारोबार, संस्कृति और मनोरंजन जगत की प्रमुख शख्सियतें खुद को प्रासंगिक बनाए रखकर ही शिखर पर बनी रह सकती हैं. उद्योग दिग्गज दूसरी लहर के संकट के दौर में अनिवार्य सामान और सेवाएं मुहैया कर मैन्युफैक्चरिंग के पहियों को गति देते रहे. डिजिटल रुझान वालों को महामारी से भारी उछाल मिली. बड़ी फार्मा कंपनियों ने जरूरी दवाइयां मुहैया कराके रसूख और साख का नया आभामंडल हासिल किया. अब महामारी के आतंक की जगह उम्मीद का नाजुक एहसास अंगडाई ले रहा है, हमारी फेहरिस्त उनकी प्रतिभा और भूमिका की भी कायल है जो घोर अंधेरे दिनों में हमारा दिल बहलाते रहे और हमें एकजुट किए रखा.

1 min read
India Today Hindi
November 03, 2021

दुनिया में देसी

पश्चिम के सर्वोच्च राजनैतिक पदों पर 'कमला', 'ऋषि' और 'प्रीति' का विराजमान होना महज वक्त की ही बात थी. हमारी जबान से इन नामों का इतनी सहजता से निकलना कहीं न कहीं बेहद रोमांचक है. इनसे जो अपनापन हमें महसूस होता है, वह पूरी तरह मनगढंत नहीं है. मौजूदा अमेरिकी उपराष्ट्रपति और ब्रिटिश चांसलर के साथ हमारी जो साझा सांस्कृतिक विरासत है, राष्ट्रीयता और वंशावली के अक्सर सीमित करने वाले रूपकों से आगे जाती है. ब्रिटेन की गृह मंत्री प्रीति पटेल जब मैनचेस्टर में कंजरवेटिव पार्टी के साथियों के साथ 'सेवा' की अहमियत पर बात करती हैं, तो वे भारतीयता को अपने विमर्श का हिस्सा बना रही होती हैं.

1 min read
India Today Hindi
November 03, 2021

सबसे पुरानी पार्टी के नए तेवर

अक्तूबर महीने की 16 तारीख को कांग्रेस कार्यसमिति ( (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के दौरान महासचिव (संगठन)के.सी. वेणुगोपाल ने पार्टी संगठन के लिए अरसे से लंबित चुनाव का कार्यक्रम जारी किया.

1 min read
India Today Hindi
November 03, 2021

सोने सी खरी बात

जादुई सोचः कैसे काम करता है खेल जगत के दो ध्रुव तारों का दिमाग

1 min read
India Today Hindi
October 27, 2021

वापसी की उड़ान

एयर इंडिया का निजीकरण देर से 1 सही केंद्र की मोदी सरकार के लिए बड़ी राहत की तरह होनी चाहिए, जो कारोबार से छुटकारा पाकर राजकाज पर फोकस करने के वादे पर अपनी प्रत्यक्ष नाकामी पर काफी आलोचना की शिकार हो चुकी है. हालांकि एयर इंडिया के लिए टाटा घराने की 18,000 करोड़ रुपए की बोली कोई महाराजा की कीमत नहीं था, फिर भी टाटा की बोली केंद्र सरकार के रिजर्व प्राइस से 40 फीसद अधिक और दूसरी बोली लगाने वाले स्पाइस जेट के मालिक अजय सिंह से करीब 20 फीसद अधिक थी. हालांकि, इस सौदे से सरकार को 2,700 करोड़ रुपए ही मिलेंगे, बाकी 15,300 करोड़ रुपए का कर्ज टाटा के मत्थे रहेगा.

1 min read
India Today Hindi
October 27, 2021

बेहतर ढंग से सामान्य स्थिति कैसे हो बहाल

जलवायु परिवर्तन से लेकर महामारी तक, अर्थव्यवस्था से लेकर भूराजनैतिक शक्ति परिवर्तन तक...इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के 19वें संस्करण ने इस दशक में हमारी जिंदगियों को गढ़ने वाली चार बड़ी धाराओं को समझने का जतन किया

1 min read
India Today Hindi
October 27, 2021

चलती का नाम इलेक्ट्रिक गाड़ी

मिशन इलेक्ट्रिकः पथ-प्रदर्शकों से मिलें. भारत कैसे हरित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है नितिन गडकरी, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री

1 min read
India Today Hindi
October 27, 2021